काशी की प्राचीन काष्ठ कला की पहचान और चमक सात समुंदर पार तक है। लकड़ी से बने राम दरबार की इन दिनों विदेशों में काफी मांग है। कारीगर उत्पादों की आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। कारीगरों का कहना है कि 2017 के बाद से इन उत्पादों की पूछ बढ़ी है। इसके पहले कारीगर बाजार की तलाश में रहते थे। वाराणसी के कतुआपुरा, विशेश्वरगंज निवासी राज्य पुरस्कार विजेता ओम प्रकाश शर्मा और घनश्याम शर्मा का पूरा परिवार काष्ठ कला से जुड़ा है। चार पीढ़ियों से एक इंच से लेकर सात फीट तक के लकड़ी के उत्पाद तैयार करने के लिए यह परिवार प्रसिद्ध है।
ओम प्रकाश ने बताया कि यह बनारस की अपनी कला है। इससे बने उत्पाद हजारों वर्षों से उपयोग हो रहे हैं। आधुनिकता के दौर में यह कला लुप्त हो रही थी। 2014 से उम्मीद जगी है। सरकार के प्रचार-प्रसार के कारण काष्ठ कला से बने उत्पादों को लोग जानने लगे और उनका रुझान बढ़ा। प्रदर्शनियों की वजह से 2017 के बाद से बल मिला। स्थिति यह है कि हम मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं।