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धर्मगुरु दलाई लामा ने बताया, इस ज्ञान के सहारे विश्व बन सकता है ‘न्यूक्लियर फ्री’

Tue, 20 Mar 2018 10:30 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
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dalai lama - फोटो : अमर उजाला
तिब्बती धर्मगुरु व शांति दूत दलाई लामा परमाणु हथियारों को लेकर एक बार फिर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि हथियार जुटाने की होड़ से मानवता को खतरा है। मौजूदा वक्त में दुनिया भर में सात हजार न्यूक्लियर हथियार इस्तेमाल के लिए हैं। अब वो वक्त आ गया है कि हम दुनिया को ‘न्यूक्लियर फ्री’ बनाएं। इसके लिए धर्मगुरु ने कुछ सुझाव भी दिए। आगे की स्लाइड्स में देखें... 

 
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dalai lama - फोटो : अमर उजाला
तिब्बती धर्मगुरु ने सोमवार को भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ से दुनिया के देशों को ताकत की आजमाइश न करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि युद्ध करने वाले हीरो नहीं बल्कि हत्यारे हैं। युद्ध के चलते व्यक्ति के अंदर डर और क्रोध पनप रहा है और इसी के चलते दुनिया भर में हिंसा जन्म ले रही है।

 
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dalai lama - फोटो : अमर उजाला
न्यूक्लियर हथियारों पर चिंता जताते हुए कहा कि अब वो वक्त आ गया है कि हम दुनिया को ‘न्यूक्लियर फ्री’ बनाएं। इसके लिए हमें समय सीमा निर्धारित करनी होगी। विश्व स्तर पर अभियान चलाना होगा। इसमें भारत अपनी अहम भूमिका निभा सकता है। 

 

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dalai lama - फोटो : अमर उजाला
धर्म गुरु ने कहा कि आज की 21वीं सदी को शांति व संवाद की सदी प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा से ही बनाया जा सकता है। इस निधि का समावेश हमें आज की आधुनिक शिक्षा में करना होगा। इससे ही डर और क्रोध की जगह अहिंसा और करुणा स्थापित किया जा सकता है। 

 
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dalai lama - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी के सारनाथ स्थित केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान में आयोजित भारतीय विश्वविद्यालय संघ के तीन दिवसीय 92वें अधिवेशन का उद्घाटन करते हुए परम पावन दलाईलामा ने कहा कि ‘मैं’ और ‘तुम’ की भावना ही आज तमाम समस्याओं की जड़ हैं। 

 
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dalai lama - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि भारतीय पारंपरिक ज्ञान भावनाओं पर आधारित है। इसलिए भारत में वो शक्ति है जिससे कि वो पूरी दुनिया को शांति का संदेश दे सकता है। इसलिए शिक्षा के मामले में भारत को यूरोप और अमेरिका की कॉपी करने ही जरूरत नहीं। तकनीकी और विज्ञान का इस्तेमाल आज हिंसा के लिए हो रहा है जो गलत है। 
 
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आध्यात्मिक गुरु

उन्होंने कहा कि सिंधु घाटी सभ्यता विश्व की अभूतपूर्व सभ्यता रही है। इसी सभ्यता के कारण भारत में बुद्ध और महावीर जैसे विचारक और अहिंसा के समर्थक हुए। हमें इसके मूलभूत सिद्धांतों को पाठ्यक्रम में शामिल करना होगा। 
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