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वाराणसी एनकाउंटर की तस्वीरें: 10 साल पहले हत्या कर सुर्खियों में आया था किट्टू

Fri, 27 Nov 2020 02:11 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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वाराणसी मुठभेड़: घटनास्थल पर मौजूद पुलिस - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी के बड़ी पियरी निवासी रोशन गुप्ता उर्फ किट्टू के पिता रामकुमार ने बचपन में उसका नाम बाबू रखा था। उन्हें क्या पता था कि बाबू अपनी उम्र से ज्यादा आपराधिक मुकदमों का आरोपी बनकर पुलिस मुठभेड़ में एक दिन मारा जाएगा। किट्टू के खिलाफ वाराणसी और गाजीपुर में हत्या के सात, हत्या के प्रयास में नौ और रंगदारी मांगने सहित अन्य आरोपों में 34 मुकदमे दर्ज थे।

किट्टू ने वर्ष 2011 में दशाश्वमेध क्षेत्र के खालिसपुरा के गोपाल यादव की हत्या करके जरायम जगत में प्रवेश किया था। फिर उसने 29 जुलाई 2015 को मुठभेड़ में मारे गए रोहित सिंह उर्फ सनी के गिरोह का दामन थाम लिया। इसके बाद शहर के ठेकेदारों, व्यापारियों और डॉक्टरों से किट्टू रंगदारी मांगने के लिए कुख्यात हो गया था।

इस बीच किट्टू का नाम गाजीपुर में सराफा कारोबारियों की हत्या व लूट, हत्या के प्रयास और डकैती में लगातार सामने आता रहा। फिर वर्ष 2012 में भोजूबीर में सुपारी लेकर बैंक कर्मी महेश जायसवाल की हत्या में किट्टू का नाम सामने आया। इस मामले में चंदौली का पूर्व सांसद जवाहर जायसवाल भी आरोपी है।
 
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वाराणसी मुठभेड़: घटनास्थल पर मौजूद पुलिस - फोटो : अमर उजाला
सनी जब एसटीएफ के हाथों मारा गया तो किट्टू ने उसके गिरोह की कमान संभाल ली और मनीष सिंह सोनू के साथ आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने लगा। इसके बाद वह जेल से भी रंगदारी वसूलने और हत्या की साजिश रचने में शामिल रहता था।

इस बीच किट्टू गाजीपुर में अफीम का अवैध धंधा करने वाले एक बदमाश और पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों के कई अन्य सफेदपोशों के साथ भी नजदीकी संबंध स्थापित कर लिया था। सितंबर 2018 में 50 हजार के कुख्यात इनामी बदमाश रईस बनारसी और बदमाश राकेश अग्रहरि की हत्या में किट्टू का नाम सामने आया था।

इसके बाद भी चौक क्षेत्र के दालमंडी, रेशम कटरा, सुडि़या, ठठेरी बाजार और सप्तसागर मंडी के दवा व्यापारियों के साथ ही ठेकेदारों और डॉक्टरों से लगातार वह रंगदारी वसूल रहा था।
 
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वाराणसी मुठभेड़: घटनास्थल पर मौजूद पुलिस - फोटो : अमर उजाला
20 महीने पहले साथी के साथ गिरफ्तार हुआ था किट्टू

बदमाश रईस बनारसी और राकेश अग्रहरि की हत्या में वांछित किट्टू को क्राइम ब्रांच ने 20 मार्च 2019 को लोहता क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। तब किट्टू पर 50 हजार का इनाम घोषित था। उस दौरान किट्टू अपने साथी नारायण के साथ डीरेका के एक ठेकेदार की हत्या करने जा रहा था। किट्टू ने तब पुलिस को बताया था कि मुठभेड़ में मारे गए सनी सिंह के गिरोह की कमान अब वही संभाल रहा है। मनीष और अन्य बदमाश अब उसे ही अपना सरगना मानते हैं।

 

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वाराणसी मुठभेड़: घटनास्थल पर मौजूद पुलिस - फोटो : अमर उजाला
बनना चाहता था मुन्ना बजरंगी, पहनता था काली टोपी
मार्च 2019 में जब किट्टू गिरफ्तार किया गया था तब उसने कहा था कि वह जरायम जगत के कुख्यात नाम रहे मुन्ना बजरंगी के तौर पर खुद को स्थापित करना चाहता है। काली टोपी पहनकर आपराधिक वारदातों को अंजाम देने के लिए किट्टू चर्चित था।

पुलिस लाइन में जब उससे पूछा गया था कि वह काली टोपी पहन कर अपराध क्यों करता है तो उसका कहना था कि काला रंग महादेव का आशीर्वाद है। महादेव ही मेरी रक्षा करते हैं और वही हमें मुन्ना बजरंगी के जैसे बनाएंगे। हालांकि किट्टू का यह सपना पूरा नहीं हो सका।
 
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वाराणसी मुठभेड़: घटनास्थल पर गिरी किट्टू की बाइक - फोटो : अमर उजाला
सराफा कारोबारी से मांगी थी 50 लाख की रंगदारी

किट्टू ने अपने घर के समीप ही रहने वाले बड़ी पियरी निवासी सराफा कारोबारी से बीती 15 नवंबर की रात 50 लाख की रंगदारी मांगी थी। पिस्टल सटा कर काफी देर तक कारोबारी को धमकाने का सीसी फुटेज बुधवार की दोपहर सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। इसे लेकर पुलिस की खासी किरकिरी हुई थी।
 
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वाराणसी मुठभेड़: घटनास्थल पर बिखरे कारतूस के खोखे - फोटो : a
गुरुवार की रात पुलिस मुठभेड़ में किट्टू के मारे जाने के बाद सराफा कारोबारी ने कहा कि पुलिस और प्रदेश सरकार पर उनका भरोसा कायम है। इस घटना से अपराधी डरेंगे और आमजन सुकून से रहेंगे। कारोबारी ने एसएसपी अमित पाठक और उनकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि ऐसी ही पुलिसिंग होनी चाहिए ताकि हर कोई सुकून से रहे।
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