दशाश्वमेध घाट पर आस्थावानों का तांता।
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गन्ने के मंडप के बीच सूप-दउरी में व्यंजनों, फूलों, फलों से डाला सजाए गए। दीपदान के साथ वेदियों पर व्रतियों ने माथे से लेकर नाक तक सिंदूर के लंबे टीके लगाए। राणा महल घाट, अहिल्याबाई घाट, पांडेय घाट, केदार घाट के अलावा मणिकर्णिका घाट, सिंधिया घाट, रामघाट, पंचगंगा घाट, राजघाट पर पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया गया। पतियों और पुत्रों ने अर्घ्य दिलाया।