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कारोबारियों को रास आ रहा वर्चुअल कारपेट एक्सपो, दो दिन में 61 देशों के 466 आयातक, प्रतिनिधियों ने किया विजिट

Mon, 24 Aug 2020 12:54 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भदोही
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।
भदोही के वर्चुअल कारपेट एक्सपो को दुनियाभर के कालीन आयातकों ने हाथों हाथ लिया है। यह पहला वर्चुअल फेयर है और जिस प्रकार से भारतीय कालीनों की ओर लोगों का रुझान देखने को मिला है, उससे यही कहा जा सकता है कि अब इस तरह के एक्सपो के द्वार खुल गए हैं। एक्सपो आयोजक सीईपीसी ने रविवार को जारी विज्ञप्ति में दावा किया कि एक्सपो ने पहले दिन से विशिष्टता  हासिल कर ली है।

एक्सपो में पिछले दो दिन में 61 देशों के 321 आयातक और 145 आयातक प्रतिनिधियों ने विजिट किया। इसे बेहद उत्साहजनक बताया जा रहा है। कालीन प्रदर्शकों के उत्कृष्ट कालीनों और दरियों की शृंखला को बेहद पसंद किया जा रहा है। इसका प्रमाण यह है कि खरीदार कालीनों, डिजाइनों को पसंद कर निर्यातकों से मीटिंग अथवा वार्ता का अनुरोध कर रहे हैं। खास बात यह है कि वर्चुअल एक्सपो का प्लेटफार्म बात करने, वीडियो कांफ्रेंसिंग अथवा चैट करने की सहूलियत देता है।

परिषद के द्वितीय उपाध्यक्ष उमेश कुमार गुप्ता ने बताया कि विजिटर्स में नंबर वन अमरीका के आयातक हैं। इसके बाद यूरोपीय खरीदारों का नंबर है। जापान, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, कनाडा, तुर्की के खरीदार भी रुचि दिखा रहे हैं। परिषद के चेयरमैन सिद्धनाथ सिंह बराबर प्लेटफार्म पर बने हुए हैं।
 
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उन्होंने बताया कि भारत सरकार की मंशानुरूप हस्तनिर्मित कालीन क्षेत्र में उत्पाद विकास के लिए युवाओं और महिला उद्यमियों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। एक्सपो से आयोजकों के साथ प्रतिभागी भी खुश नजर आ रहे हैं। इसे भविष्य में व्यवसाय सृजन के अच्छे अवसर के रूप में देखा जाने लगा है।

फिजिकल एक्सपो से किफायती वर्चुअल फेयर

फिजिकल एक्सपो के मुकाबले वर्चुअल एक्सपो बेहद किफायती साबित हो रहा है। प्रतिभागी नगर के हामिद अंसारी कहते हैं कि इसमें भाग लेने के लिए मुझे केवल 15 हजार रुपये चुकाने पड़े, जबकि फिजिकल एक्सपो में चार दिन भाग लेने में कम से कम दो लाख रुपये खर्च करने पड़ते थे। बताया कि फिजिकल फेयर के मुकाबले वह इसे बेहतर समझते हैं।

वह इसलिए कि तीन दिन में 36 विजिटर हमारे उत्पादों का अवलोकन कर चुके हैं। कई लोगों से वार्ता का भी अवसर मिला है। आयातकों से वार्तानुसार उन्हें सस्ते कालीन चाहिए। ऐसे में हमारे जूट रग्स और वूलेन दरी की पूछ ज्यादा है। उन्होंने कहा कि खरीद हो तभी फेयर को सफल माना जाएगा, ऐसा नहीं है। हमारे स्टाल पर लगातार खरीदार आ रहे हैं और मुझसे वार्ता कर रहे हैं। यही इस फेयर को सफल बना देता है। आने वाले दिनों में इस तरह के फेयर का प्रचलन बढ़ेगा।
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