बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव सारनाथ और डीरेका के सूर्यसरोवर पर कई कार्यक्रम आयोजित हुए। बुद्ध के जीवन परिचय पर आधारित प्रदर्शनी में उनके उपदेशों से सम्बंधित पेंटिंग और संदेश लगाए गए। दीपदान महोत्सव के दीप प्रज्ज्वलित कर सरोवर को प्रकाशमान किया गया। हालांकि तेज हवा के चलते दीपों को जलाने में परेशानी भी हो रही थी। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
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budh purnima
- फोटो : अमर उजाला
धम्म शिक्षण केन्द्र सारनाथ के अध्यक्ष भिक्षु चन्दिमा के नेतृत्व में बौद्ध अनुयायियों को भोजन दान किया गया। इसके साथ ही नि:शुल्क स्वास्थ्य चिकित्सा कैम्प लगाया गया था। जिसमें सैकडों लोंगो अपने स्वास्थ्य की जांच करायी। इससे पूर्व धर्मचक्र विद्या विहार बौद्ध संगठन के तत्वावधान में सैकड़ों की संख्या में बौद्ध भिक्षु, स्कूल के छात्र-छात्राए, बौद्ध उपासक हाथों धम्म झंडा के साथ विशाल धम्म यात्रा निकाली।
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उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की तरफ से सबको मिष्ठान वितरण किया गया। शाम को पयर्टन विभाग व बौद्ध संगठनों की तरफ से पूरे बुद्ध स्थली सारनाथ में हजारों दीप प्रज्ज्वलित किए गए। इस दौरान पूरे सारनाथ को फूल मालाओं से सजाया गया था। वहीं शाम को कचहरी से बौद्ध धम्म यात्रा विभिन्न बौद्ध संगठनों की तरफ से निकाली गयी। जो विभिन्न मार्गो से होते हुए सारनाथ स्थित मूलगंध कुटी बिहार पहुंच कर समाप्त हुई।
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प्रो. संघसेन सिंह ने कहा कि आज देश में हो रहे खून-खराबे का कारण बुद्ध की शिक्षाओं के पालन नहीं करना है। सभी को इस पर आज गहन चिन्तन करना चाहिए। बुद्ध को मानने वाले बुद्ध अनुयायी विशेष कर भिक्षु सन्यासी अपनी उस परम्परा का निर्वाह नहीं कर पा रहे हैं जिसे बुद्ध चाहते थे और सामाजिक विघटन उसका परिणाम है।
केन्द्रीय तिब्बती उच्च शिक्षा संस्थान के पूर्व कुलपति प्रो. एल एन शास्त्री ने कहा कि भगवान बुद्ध का प्रतीत समुत्पाद आज समाज के लिए बहुत उपयोगी हैं। कार्यरूप में दिख रहा यह संसार व संसार के प्राणी प्रतीतसमुत्पाद के परिणाम स्वरूप है।