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Buddha Purnima 2026: एक किमी कतार, पांच घंटे में दो लाख अनुयायियों ने किए बुद्ध के अस्थि दर्शन

Fri, 01 May 2026 05:08 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: बुद्ध पूर्णिमा पर सारनाथ में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। यहां देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने बुद्ध अस्थि अवशेष के दर्शन किए। इस दौरान सारनाथ में बुद्ध का शांति संदेश गूंजा। 
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Buddha Purnima 2026 - फोटो : अमर उजाला
बुद्ध पूर्णिमा पर भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ में दो लाख से अधिक अनुयायियों ने पांच घंटे तक बुद्ध के अस्थि अवशेष का दर्शन किया। भोर से ही सारनाथ मुख्य चौराहे से मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर तक लंबी कतार लगी रही। 12 देशों और आठ राज्यों से आए अनुयायी सुबह से रात तक भगवान बुद्ध के दर्शन-पूजन और उनके शांति संदेशों को सुनने-गुनने में लगे रहे। धम्म यात्रा निकाली गई। रंग-बिरंगे झालरों और विभिन्न देशों के पंचशील के झंडे लहराए। “बुद्धं शरणं गच्छामि” की ध्वनि गूंजती रही।
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Buddha Purnima 2026 - फोटो : अमर उजाला
भगवान बुद्ध के 2570वें जन्मोत्सव पर अस्थि अवशेष के दर्शन और पूजन के लिए मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर में सुबह से भीड़ रही। सुबह छह बजे से दर्शन शुरू हो गए। अनुयायियों की लंबी लाइन लगी रही, जो सुबह 11 बजे तक जारी रही। थाई, कंबोडिया, चाइनीज, तिब्बती, म्यांमार और भूटानी बौद्ध मंदिरों के विहाराधिपतियों ने अस्थि अवशेष को तिब्बती पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ स्थापित किया। भंते सुमितानंद थेरो, चंदिमा थेरो, भिक्षु पंचशील, भिक्षु नागवंश, भिक्षु मांगलिको ने विधिवत पूजा की।
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Buddha Purnima 2026 - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद धम्मदेशना के माध्यम से विदेशों से आए भिक्षुओं ने बौद्ध दर्शन से सभी को परिचित कराया। धम्मसभा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं। बाहर से आए अनुयायियों ने कहा कि यहां आकर उन्हें बुद्ध की चेतना और उपस्थिति का अनुभव होता है। भंते चंदिमा महाथेरो के नेतृत्व में सभी ने गौतम बुद्ध की शिक्षा और अहिंसा के सिद्धांतों पर चलने का संकल्प लिया। भंते चंदिमा महाथेरो ने कहा कि ईरान-इजराइल सहित विश्व युद्ध की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में दुनिया को युद्ध की नहीं, बुद्ध की जरूरत है।

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Buddha Purnima 2026 - फोटो : अमर उजाला
बुद्ध के जन्म, ज्ञान और महापरिनिर्वाण से बनी त्रिविध पावनी पूर्णिमा
भंते चंदिमा महाथेरो ने बताया कि गौतम बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण तीनों वैशाख पूर्णिमा को ही हुआ था। इस कारण इसे त्रिविध पावनी पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन बौद्ध अनुयायी बुद्ध की शिक्षाओं पर चलने का संकल्प लेते हैं। अनुयायियों और भिक्षुओं ने दर्शन के साथ महाप्रसाद ग्रहण किया। इसमें पूड़ी-सब्जी, देसी घी का हलवा और तहरी शामिल रही। स्वास्थ्य शिविर में जांच और दवा वितरण भी किया गया।
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Buddha Purnima 2026 - फोटो : अमर उजाला
धम्म यात्रा निकाली गई
वैशाख पूर्णिमा पर कचहरी स्थित अंबेडकर पार्क से धम्म यात्रा निकाली गई। बुद्धं शरणं गच्छामि के जयघोष के साथ यात्रा गोलघर, पांडेयपुर, पहाड़िया होते हुए सारनाथ पहुंची। मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर परिसर पांच हजार से अधिक दीपों और बिजली झालरों से जगमगा उठा।
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Buddha Purnima 2026 - फोटो : अमर उजाला
विहाराधिपति भिक्षु आर. सुमितानंद थेरो ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। धम्मसभा में प्रो. राममोहन पाठक ने कहा कि बुद्ध विश्व के वास्तविक गुरु हैं। उनके उपदेश आज भी पूरी दुनिया में प्रासंगिक हैं। 

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