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बड़ा खुलासा : जानिये कितने साल पुरानी है भगवान भोलेनाथ की नगरी काशी

Fri, 28 Apr 2017 10:39 AM IST
amarujala.com, presented by शैलेश कुमार शुक्ल
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amarujala - फोटो : amarujala
पौराणिक मान्यता है कि काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर बसी है। यह अनंत काल से है। लेकिन अब कोई भी इस बात का सटीक अनुमान नहीं लगा पाया है कि यह शहर कितना प्राचीन है। लेकिन अब काशी की प्राचीनता को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। यह खुलासा किया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने। आगे की स्लाइड में जाने आखिर कितने साल पुरानी है...
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varanasi ghat - फोटो : अमर उजाला
मुंबई मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक माना जाता था कि काशी आठ सौ ईसा पूर्व पुरानी है लेकिन नवीनतम साक्ष्यों के मुता‌बिक यह आठ सौ नहीं बल्कि 1600 साल ईसा पूर्व से विद्यमान है। इस प्रकार काशी करीब 3617 साल पुरानी है। आगे की स्लाइड में जानें की कैसे पता चली यह तिथि...
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रीवा घाट पर आज से घाट संध्या का आयोजन - फोटो : फाइल फोटो
वाराणसी में खुदाई करने वाले दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय के महानिदेशक बीआर मणि ने बताया कि अब तक जो पुरातात्विक साक्ष्य वाराणसी से पाए गए थे वे 800 ईसवी पूर्व के थे । उन्होंने बताया कि हाल ही में जो कार्बन डेटिंग हमने पाई है, उसके मुताबिक यह शहर 1600 ईसा पूर्व से विद्यमान है।

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varanasi ghat - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि इस खोज में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस खुलासे ने भारत में अंधकार युग के मिथक को तोड़ दिया। मणि ने कहा कि भारतीय ‌इ‌तिहास में हड़प्पा सभ्यता के पतन के बाद 600 ईस्वी पूर्व के बीच के काल को अंध युग कहा जाता था। कई विद्वानों का मानना है कि इस काल के दौरान किसी बड़ी सभ्यता का अस्तित्व नहीं था।
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varanasi ghat - फोटो : अमर उजाला
मणि ने बताया कि काशी पहली बार उत्‍खनन 1940 के दशक में हुआ था। इस दौरान मिले पुरावशेषों से पता चला कि काशी 800 ईसवी पूर्व से विद्यमान है। इसके बाद बीएचयू ने व्यापक उत्‍खनन कराया। उन्होंने बताया कि कार्बन डेटिंग के आधार पर कोई डाटा उपलब्‍ध नहीं था। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2013-14 में दो सत्रों में उत्‍खनन कराया।
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दशाश्वमेध घाट
उन्होंने बताया कि भारत में कार्बन डेटिंग केवल लखनऊ स्थित बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट करता है। उसके पास काफी काम होने की वजह से हाल ही में टेस्ट का परिणाम सामने आया है। मणि ने बताया कि हड़प्पा काल में भी काशी में लोग रहते थे लेकिन यह हड़प्पा सभ्यता का विस्तार नहीं था। इस प्रकार काशी की सभ्यता से हड़प्पा सभ्यता का कोई संबंध नहीं था। ​​
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