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बीएचयू दीक्षांत: मुख्य मंच से 20 छात्राओं...9 छात्रों को मिले गोल्ड मेडल, चहर उठे स्टूडेंट्स; देखें तस्वीरें

Sat, 13 Dec 2025 02:40 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

BHU Convocation 2025: मुख्य अतिथि डॉ. वीके सारस्वत ने कहा कि अपने आइडिया को इंटरप्राइजेज बनाइए। लैब को बाजार में तब्दील करने की नियत से काम करिए। बौद्धिक संपदा, प्रोटोटाइप, पेटेंट, वेंचर्स लॉन्चिंग, अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा और प्रॉब्लम सॉल्विंग होना होगा।  
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स्वतंत्रता भवन में 105वें दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र। - फोटो : रोहित सोनकर (संवाद)
Varanasi News: बीएचयू के 105वें दीक्षांत समारोह में 29 मेधावियों को बीएचयू गोल्ड मेडल से नवाजा गया। इसमें 20 छात्राएं और नौ छात्र हैं। मेडिसिन से लेकर शास्त्रों की पढ़ाई के मेधावी इसमें शामिल हैं। एमए (संस्कृत) की टॉपर अनुराधा द्विवेदी और बीपीए के टॉपर तुहीन पार को चांसलर, महाराजा विभूति नारायण और बीएचयू मेडल से नवाजा गया। 

नीति आयोग के सदस्य और डीआरडीओ के पूर्व सचिव मुख्य अतिथि डॉ. विजय कुमार सारस्वत, कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, रेक्टर प्रो. संजय कुमार और कुलसचिव प्रो. अरुण कुमार सिंह ने स्वतंत्रता भवन सभागार के मंच से मेधावियों को मेडल पहनाकर स्नातक, परा स्नातक और पीएचडी की उपाधियों से सम्मानित किया। 
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छात्राओं ने ली सेल्फी। - फोटो : संवाद
अपने दीक्षांत भाषण में मुख्य अतिथि डॉ. वीके सारस्वत ने कहा कि हमने रिसर्च प्रकाशित कर लिया और खुश हो लिए, ऐसा न हो। उस रिसर्च को उत्पाद में बदलकर बाजार तक पहुंचा दें तो ही रिसर्च पूरा होगा। हमारे विश्वविद्यालयों के लोग बाहर से तकनीक लाते हैं और रिसर्च करते हैं। लेकिन, स्वदेशी सोच के साथ बहुत कम काम हुआ है। 
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छात्राओं को उपाधिक देते गुरुजन। - फोटो : संवाद
दशकों से हम औद्योगिक क्षमता, रिसर्च आउटपुट और वैश्विक प्रभाव में पिछड़ेपन की भरपाई करते रहे हैं, लेकिन वह युग अब बीत चुका है। अब 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करना है। अब हम वैश्विक एजेंडा सेट करेंगे। हमें जो विकास करना है वो समावेशी हो। 

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डाॅ. विजय सारस्वत और प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी। - फोटो : संवाद
इनोवेटर्स से आंत्रप्रेन्योर बनें, आइडिया को इंटरप्राइजेज बनाएं: डॉ. सारस्वत ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आप आज सिर्फ डिग्री नहीं हासिल कर रहे, बल्कि बहुत बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत कर रहे हैं। आप देश के आर्किटेक्ट बनेंगे। नवाचार के पीछे सिर्फ तकनीक ही नहीं होती बल्कि ये दुनिया को अलग नजरिये से देखने का जज्बा होता है। डिजाइन थिंकिंग समाज को नजदीक से समझने के लिए प्रेरित करती है। आप इनोवेटर्स से आंत्रप्रेन्योर बनिए। 
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मेडल और उपाधि पाकर चहर उठे छात्र-छात्राएं। - फोटो : संवाद
डॉ. सारस्वत ने बताए अच्छे नेतृत्वकर्ता के पांच गुण: डॉ. सारस्वत ने कहा कि अच्छा नेतृत्वकर्ता वही है जिसमें अखंडता, समानुभूति, अनुशासन, आजीवन सीखने की ललक और सहयोगी की भावना होगी। 

बीएचयू में एक साल में 4,980 शोध पत्र प्रकाशित, 115 नए प्रोफेसरों ने किया जाॅइन : कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने बीएचयू की एक साल की उपलब्धियां गिनाईं। कहा कि एक साल में 4,980 से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। बीएचयू का साइटेशन एक लाख हो चुका है। 
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दीक्षांत समारोह में मेडल और उपाधि पाने वाले छात्र-छात्राएं। - फोटो : संवाद
साइटेशन दुनिया भर में हुए रिसर्च में बीएचयू के प्रोफेसरों के योगदान को दिखाता है। इस साल 115 नए प्रोफेसरों ने बीएचयू ज्वाइन किया। विश्वविद्यालय का एच-इंडेक्स 268 है। कुल 172 नए प्रोजेक्ट आए। 192 करोड़ के 613 प्रोजेक्ट संचालित हो रहे हैं। बीएचयू के 386 शिक्षकों ने देश और विदेश में एकेडमिक इवेंट्स कराए। 33 नए पेटेंट दाखिल किए गए और 18 पेटेंट प्राप्त हुए। 
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समारोह के दाैरान दर्शक दीर्घा में बैठे छात्र। - फोटो : संवाद
दिल्ली की सुरक्षा के लिए एयर डिफेंस सिस्टम तैनात
बीएचयू के दीक्षांत समारोह में पहुंचे नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके सारस्वत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि दिल्ली की रक्षा के लिए एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर दिया है। हम रूस या किसी देश से रक्षा क्षेत्र में सहायता ले रहे हैं तो ये कॉम्प्लीमेंट्री है। इसका अर्थ ये नहीं है कि हमारे देश में अपनी क्षमता नहीं है। 

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छात्रा को उपाधि देते गुरुजन। - फोटो : संवाद
हमारे पास वो सभी एयर डिफेंस सिस्टम है जो हमें सक्षम बनाते हैं। एयर डिफेंस सिस्टम हम बना रहे हैं और आगे भी बनाएंगे। सिर्फ रूस से ही नहीं खरीद रहे। पिछले 10 साल में हमने मीडियम रेंज के मिसाइल बनाए, क्योंकि अब टैक्टिकल वार हो रहे हैं।

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बीएचयू कुलगीत का गायन करतीं छात्राएं। - फोटो : संवाद
भारत में जरूरत के अनुसार ही हथियारों का आविष्कार और निर्माण किया जा रहा है। हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर हुआ जिसमें ब्रह्मोस का इस्तेमाल किया। ये प्रलय और प्रहार जैसे हथियारों ने ही काम कर दिखाया है जबकि ये कम दूरी के हैं। आकाश, ब्रह्मोस, एंटी ड्रोन सिस्टम और आर्टरी हमारी हैं। आज हमारी किसी पर भी निर्भरता नहीं है। हम सक्षम हैं। हमारे पास वे सभी अस्त्र-शस्त्र मौजूद हैं, जिससे हम कोई भी टेक्टिकल वार लड़ सकते हैं। 

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एसबीआई के पूर्व जनरल मैनेजर शेखर श्रीवास्तव को भी मिली उपाधि। - फोटो : संवाद
15 हजार छात्रों ने लाइव देखा दीक्षांत समारोह
बीएचयू के दीक्षांत समारोह में पहली बार स्वतंत्रता भवन हाउसफुल दिखा। यहां 1500 आम छात्रों को भी मुख्य दीक्षांत में शामिल होने का मौका मिला। जबकि 15 हजार से ज्यादा लोगों ने दीक्षांत समारोह को ऑनलाइन देखा। 

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चंदना, तृप्ति, प्रभजोत और सिद्धांती ने पाया मेडल। - फोटो : संवाद
12 संकायों में दी गईं उपाधियां और मेडल
बीएचयू के 12 संकायों में दीक्षांत समारोह के मेडल और उपाधियां दी गईं। दृश्य कला संकाय, केएन उडुप्पा सभागार में मेडिसिन, नर्सिंग कॉलेज, दंत चिकित्सा विज्ञान और आयुर्वेद संकाय, स्वतंत्रता भवन में विज्ञान संस्थान, संबोधि सभागार में सामाजिक विज्ञान संकाय, महामना सभागार में विधि संकाय, प्रबंध भवन में प्रबंध शास्त्र संस्थान, पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान, शताब्दी कृषि प्रेक्षागृह में कृषि विज्ञान संस्थान, पंडित ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में संगीत एवं मंच कला संकाय, चाणक्य सभागार, शिक्षा संकाय में उपाधि वितरण समारोह हुआ। उधर, शनिवार को सुबह 9 बजे स्वतंत्रता भवन में कला संकाय के कुल 3941 उपाधियां और 115 मेडल दिए जाएंगे। सुबह 10:30 बजे वाणिज्य संकाय के सभागार में 1281 उपाधियां दी जाएंगी। दोपहर 12 बजे संबोधि सभागार में सामाजिक विज्ञान संकाय की बची हुईं उपाधियां वितरित की जाएंगी। 

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गुरुजनों ने छात्राओं को दी उपाधि। - फोटो : संवाद
परीक्षा से ठीक पहले गुजर गए थे पिता, मेडल पाकर भावुक हुईं प्रभजोत
बैचलर ऑफ वेटेरिनरी साइंस एंड एनिमल हसबैंड्री में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर स्वर्ण पदक पाने वाली प्रभजोत कौर जैसे ही मंच पर मेडल लेने पहुंची, वह भावुक हो गईं। अमर उजाला से बातचीत में प्रभजोत ने बताया कि परीक्षा से लगभग एक माह पहले ही उनके पिता जसपाल सिंह का देहांत हो गया था। उन्हें लगा था कि बीएचयू में पदक पाने का पापा का सपना शायद अधूरा रह जाएगा लेकिन मां कवलजीत कौर और दो भाइयों के सहयोग ने उन्हें संभाला। पिताजी की तेरहवीं के बाद वह विश्वविद्यालय लौटीं, धैर्य के साथ परीक्षा दी और मेडल पाकर पिता का सपना पूरा किया। अलीगढ़ की मूल निवासी प्रभजोत कौर ने बीएचयू के पशु चिकित्सा विज्ञान संकाय से 82.3 प्रतिशत अंक के साथ संकाय स्तर पर सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। 

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उपाधि पाकर खिल उठे चेहरे। - फोटो : संवाद
मेहंदी लगाकर चलाया खर्च, मेडल मिला तो झूम उठीं चंदना 
दृश्य कला संकाय से मास्टर ऑफ फाइन आर्ट्स (एमएफए) में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर स्वर्ण पदक पाने वाली चंदना सिंह पढ़ाई के साथ-साथ कैंपस की छात्राओं और बाहर की महिलाओं को मेहंदी लगाकर अपना खर्च वहन करती हैं। स्वतंत्रता भवन में पदक मिलने पर वह खुशी से झूम उठीं। मूल रूप से कुशीनगर जिले के पडरौना निवासी चंदना के पिता उमेश सिंह किसान हैं और माता गौतम देवी गृहणी हैं। चंदना ने बताया कि पढ़ाई के बाद जो समय बचता है, उसमें वह छात्राओं को मेहंदी लगाकर अपनी आर्थिक जरूरतें पूरी करती हैं।

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बीएचयू का दीक्षांत समारोह। - फोटो : अमर उजाला
मैथ्स की टॉपर अलजेब्रा में रचेंगी नए सूत्र
बीएचयू से गणित में टॉप कर स्वर्ण पदक पाने वाली तृप्ति मिश्रा वर्तमान में जेएनयू, नई दिल्ली में गणित से एमएससी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि आगे अलजेब्रा के सूत्रों पर शोध कर कुछ नया करना चाहती हैं और भविष्य में प्रोफेसर व वैज्ञानिक बनने का लक्ष्य रखती हैं। तृप्ति प्रसिद्ध गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन से विशेष रूप से प्रभावित हैं। उनके पिता सुनील कुमार मिश्रा की जौनपुर में बिल्डिंग मटेरियल की दुकान है और माता सुनीता मिश्रा शिक्षिका हैं। तृप्ति ने बताया कि उनका भाई रूस से एमबीबीएस कर रहा है।

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बीएचयू के दीक्षांत समारोह में शामिल छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला
छात्राओं को तबला वादन सिखाना चाहती हैं सिद्धांती
संगीत एवं मंचकला संकाय में मास्टर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स (तबला वादन) में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर गोल्ड मेडल पाने वाली सिद्धांती मणि बेहद उत्साहित हैं। वह आगे चलकर छात्राओं को तबला वादन सिखाना चाहती हैं। आमतौर पर तबला वादन में पुरुषों की भागीदारी अधिक देखने को मिलती है, लेकिन सिद्धांती की उपलब्धि को लेकर संकाय के शिक्षक भी इसे गर्व का क्षण बता रहे हैं।संगीत एवं मंचकला संकाय की प्रमुख प्रो. संगीता पंडित ने सिद्धांती को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
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अपने परिवार के साथ अनुराधा। - फोटो : संवाद
65 वर्ष की उम्र में एसबीआई के पूर्व जीएम को मिली पीएचडी
पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नहीं होती, इसे साकार किया है एसबीआई के पूर्व जनरल मैनेजर शेखर श्रीवास्तव ने। उन्होंने 65 वर्ष की उम्र में प्रबंध अध्ययन संस्थान से पीएचडी डिग्री हासिल की। विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उन्हें पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। शेखर की पत्नी, वसंत कन्या महाविद्यालय कमच्छा की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव भी इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं। शेखर ने बताया कि एसबीआई से सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने सीखने की ललक बनाए रखी।
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