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PHOTOS: बीएचयू में 41 कलाकारों ने 75 मिनट तक माता अहिल्या महानाट्य का किया मंचन, तस्वीरों में देखें- झलकियां

Wed, 21 Jan 2026 06:08 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: बीएचयू में 41 कलाकारों ने 75 मिनट तक माता अहिल्या महानाट्य का मंचन किया। इस दौरान पति खांडे राव युद्ध में मारे गए तो अहिल्याबाई ने तलवार उठाई। हजारों बाधाएं पार कर काशी पहुंचीं। 
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बीएचयू में माता अहिल्या महानाट्य का मंचन - फोटो : बीएचयू
बीएचयू में 75 मिनट तक चले 41 कलाकारों के महानाट्य मंचन में बाबा विश्वनाथ और लोकमाता अहिल्या बाई होलकर के बीच भक्त-भगवान का अटूट संबंध देखने को मिला। बीएचयू के कृषि शताब्दी सभागार में मंगलवार को कर्मयोगिनी माता अहिल्या नाटक का मंचन किया गया। मंच पर बचपन से ही मस्तमौला, निर्भीक और विवेकशील अहिल्या का अक्स दिखा।
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बीएचयू में माता अहिल्या महानाट्य का मंचन - फोटो : बीएचयू
अहिल्याबाई की 300वीं जयंती वर्ष के मौके पर हुए इस मंचन में पुत्री, पत्नी, माता, शासिका का जीवन जीने के बाद विश्वनाथ भक्त के रूप में आकर अहिल्याबाई ने दर्शकों का मन मोह लिया। उनका रुदन तब चरम पर पहुंच गया जब पति खंडे राव के युद्ध में मारे जाने के बाद अहिल्याबाई बाबा विश्वनाथ से कहती हैं, जो चला गया वो भी आपका और जो बचा है वो भी आपका। इसके बाद उन्होंने आपने आप को बाबा विश्वनाथ के प्रति समर्पित कर दिया। इसके बाद वह लोकमाता हुईं। 300 साल पहले होलकर वंश में महिला शक्ति स्वरूपा और काशी विश्वनाथ की अनन्य भक्त भी कहलाईं। नाटक के 55वें मिनट में माता अहिल्याबाई को गंगा किनारे भगवान विश्वनाथ को जल चढ़ाकर पूजा अर्चना करते दिखाया गया। 
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बीएचयू में माता अहिल्या महानाट्य का मंचन - फोटो : बीएचयू
विवाह के बाद ससुर ने पहचानी प्रतिभा
कहानी पिता मनकोजी शिंदे और माता सुशीला शिंदे से शुरू होती है। माता-पिता ने अहिल्याबाई का विवाह मालवा के राजा के पुत्र खांडे राव से किया। ससुर मल्हार राव ने अहिल्या की प्रतिभा को पहचान लिया और उन्हें राज्य की जिम्मेदारियों में सहभागी बना दिया। प्रजा ने इसकी खूब प्रशंसा की। मंच पर अहिल्या की दूरदृष्टि, बुद्धि और कौशल से राजा मल्हार राव मोहित और राज्य की सुरक्षा और व्यवस्था के प्रति निश्चिंत नजर आने लगे। 
 

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बीएचयू में माता अहिल्या महानाट्य का मंचन - फोटो : बीएचयू
प्रेम कोई मुकुट नहीं जो आप पहनते हैं
मंच पर खांडे राव युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। मंचन में इस क्षण के बाद अहिल्याबाई का अभिनय नए कलेवर में खिलकर दर्शकों के सामने आया। अहिल्याबाई बोलती हैं प्रेम कोई मुकुट नहीं जो आप पहनते हैं। यह एक युद्ध है जिसे आप चुनते हैं और ऐसा नहीं है कि हर युद्ध तलवार से ही लड़ा जाए, बल्कि बुद्धि से भी लड़ा जाता है। इस कठिन समय में ससुर मल्हार राव की प्रेरणा से अहिल्या ने राज्य सिंहासन स्वीकारा और संभाल लिया। एक सच्ची कर्मयोगिनी बनकर न्यायपूर्ण और लोककल्याणकारी शासन का सूत्रपात कर दिया। हजारों चुनौतियों और बाधाओं को पार कर काशी पहुंची और मंदिरों, घाटों, धर्मशालाओं, सरायों आदि को बनवाना और जीर्णोद्धार शुरू कर दिया। कई जनहितकारी निर्माण कार्यों को भी आगे बढ़ाया।
 
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बीएचयू में माता अहिल्या महानाट्य का मंचन - फोटो : बीएचयू
बाल्यकाल से शासनकाल तक की यात्रा दिखी।
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के संगठन सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र की ओर से कराए गए इस मंचन में अहिल्याबाई होल्कर के बाल्यकाल से लेकर उनके पूरे शासनकाल तक की यात्रा को रंगमंच पर कलाकारों ने उतार दिया। मंचन के बाद कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने सीसीआरटी के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदुरकर के सामने यह प्रस्ताव रखा कि विश्वविद्यालय के थियेटर सेल के साथ साझेदारी करें और मंचन के लिए आवश्यक सुझाव भी दें।
 
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बीएचयू में माता अहिल्या महानाट्य का मंचन - फोटो : बीएचयू
प्रियंका और सारा बनीं अहिल्याबाई
मंचन में प्रमुख रूप से प्रियंका वर्मा ने अहिल्याबाई के बचपन और सारा शर्मा ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की भूमिका अदा की। कनक वर्मा ने अहिल्याबाई की सास गौतम बाई होल्कर, आदित्य वर्मा ने पुत्र माले राव होल्कर, सिद्धार्थ ने ससुर मल्हार राव होल्कर, पीयूष गंभीर ने पति खांडेराव होल्कर की भूमिका के साथ 41 कलाकारों ने जीवंत प्रस्तुति दी।
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