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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने दी नसीहत, कहा-भगवान श्रीराम के मंदिर से कोई आपत्ति नहीं, अशास्त्रीय रीति से न हो शिलान्यास

Wed, 29 Jul 2020 12:19 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का नया लोगो। - फोटो : अमर उजाला
ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारिका शारदापीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने नसीहत दी है कि राजधर्म निभाएं और सबसे पहले कोरोना से मुक्ति दिलवाएं। कहा कि भगवान श्रीराम का मंदिर बनाए जाने से हमें कोई आपत्ति नहीं है परंतु भगवान की जन्मस्थली में गर्भगृह के आग्नेय कोण में भगवान के  बालरूप की स्थापना की जानी चाहिए। शास्त्रोक्त विधि-विधान से इसका निर्माण होना चाहिए। तो ऐसे में सरकार असली समस्या से लोगों का ध्यान भटकाते हुए अशास्त्रीय रीति से शिलान्यास करने जा रही है। यह कार्य तो देवोत्थान एकादशी के उपरांत उचित मुहूर्त देखकर भी हो सकता है।

कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक तो देवशयन के समय में बिना मुहूर्त के ही मंदिर का निर्माण आरंभ करा रहा और दूसरी ओर कोरोना महामारी से पीडि़त देश से हर्ष प्रदर्शित करने के लिए दीपोत्सव मनाने का सरकार भी आदेश जारी कर रही।
 
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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती
वर्तमान समय में कोरोना का संक्रमण पूरे देश पर हावी है। लोग विपत्ति में हैं। जब प्रतिदिन पीड़ितों के आंकड़ों में वृद्धि हो रही है तो बजाय स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने के लोगों से उत्सव मनाने की अपील करना उचित नहीं है। साथ ही कहा कि जिस घर में कोरोना से कोई भी व्यक्ति संक्रमित होगा या मरा होगा वह कैसे दीप जलाकर हर्ष मनाएगा।
 
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राम मंदिर का प्रस्तावित मॉडल - फोटो : अमर उजाला
अत: सबसे पहले कोरोना भगाएं, फिर शुभ मुहूर्त में मंदिर बनवाएं तो उसके बाद पूरा देश दीप भीजलाएगा और हर्ष भी मनाएगा। मध्य प्रदेश के परमहंगी गंगा आश्रम मेंं चातुर्मास्य स्थल से बयान जारी करते हुए  उन्होंने कहा कि ऐसी क्या मुसीबत आ गई कि जब पूरा देश कोरोना संक्रमण से जूझ रहा है, लोग मरते जा रहे हैं और धार्मिक दृष्टि से भी देवशयन होने से कोई शुभ मुहूर्त नहीं है। 

 

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राम मंदिर - फोटो : अमर उजाला
जिनको जन्म स्थल तक का पता नहीं वह कर रहे बड़ी-बड़ी बातें शंकराचार्य ने कहा कि जिन्हें जन्म स्थल तक का पता नहीं वे आज बड़ीबड़ी बातें कर रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के समय की घटना का स्मरण कराते हुए कहा कि न्यायालय में सुनवाई के दौरान जब सभी न्यायाधीशों द्वारा एक स्वर में यह पूछा गया कि श्रीराम का जन्मस्थल कहां है तब भारतीय जनता पार्टी या उसके अनुषांगिक संगठन और समर्थक अधिवक्ता आदि जन्मभूमि का सटीक स्थल नहीं बता पाए थे।
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पोर्टेबल राम मंदिर बनाने का नक्शा - फोटो : अमर उजाला
ऐसे समय में श्रीराम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की ओर से पक्षकार होने के नाते अपने अधिवक्ता परमेश्वरनाथ मिश्र एवं रंजना अग्निहोत्री के माध्यम से न्यायालय को 300 से अधिक प्रमाणों के साथ यह जानकारी दी थी कि श्रीराम की जन्मभूमि इसी स्थल पर है।
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