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बनारस का ये घाट रहता है सदाबहार, युवा हर मौसम का यहां लेते हैं आनंद

Thu, 19 Dec 2019 12:05 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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अस्सी घाट। - फोटो : अमर उजाला
बनारस को धर्मनगरी कहा जाता है। यह एक पौराणिक शहर है। जिसे सबसे पुराने नगरों में कहा जाता है। इस शहर के लिए हर वर्ग के लोगों में एक खास तरह की आस्था रहती है। बच्चों से लेकर युवा, बुजुर्गों के लिए कुछ न कुछ है। मंदिर, गंगा नदी, घाट, महल, संस्कृति और खान-पान इसका आप आनंद ले सकते हैं। लेकिन बनारस का अस्सी घाट सबसे ज्यादा युवाओं में मशहूर हैं।
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गर्मी, बारिश, सर्दी कोई भी मौसम हो यहां अक्सर युवाओं का जमावड़ा लग रहता है। युवा यहां पर बोटिंग का आनंद लेते हैं। साथ ही घाट की सीढ़ियों पर युवा अपने दोस्तों के साथ मस्ती करते नजर आते हैं। पिछले दिनों से पड़ रही सर्दी में भी युवा यहां मौज-मस्ती करते नजर आ रहे हैं।
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दोपहर के समय में लोग बोट पर बैठ कर गंगा के उस पार जाते हैं और वहां ठंडी रेत पर घूमते हैं। साथ ही अस्सी घाट पर रात को गंगा आरती होती है जहां बड़ी संख्या में लोग आरती देखने आते हैं। लेकिन आपको बता दें कि दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती सबसे बड़ी होती है जहां पर हजारों की तादाद में लोग आरती देखने आते हैं।

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winter varanasi rain - फोटो : winter varanasi rain
गर्मी के मौसम में लोग घाट पर गंगा में पैर डुबोकर बैठते हैं, जो उन्हें अलग ही अहसास कराता है। बारिश में भी युवाओं की यहां भीड़ लगती है। सबसे ज्यादा यहां पर युवाओं का क्रेज जन्मदिन या कोई सेलिब्रेशन करने को लेकर दिखता है। युवा इसी घाट पर आकर अपने दोस्तों का जन्मदिन भी मनाते हैं।
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महत्व

अस्सी घाट काशी के दक्षिण की ओर अंतिम घाट है। यह गंगा के बायें तट पर है। इसके पास कई मंदिर ओर अखाड़े हैं। अस्सी घाट के दक्षिण में जगन्नाथ मंदिर है जहां, हर साल मेला लगता है।
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इसका नाम असि नामक प्राचीन नदी के गंगा के साथ संगम के स्थल होने के कारण हुआ है। पौराणिक कथा में कहा गया है कि युद्ध में विजय प्राप्त करने के बाद दुर्गा माता ने दुर्गाकुंड के तट पर विश्राम किया था और यहीं अपनी असि (तलवार) छोड़ दी थी। इसके गिरने से असि नदी उत्पन्न हुई। असि और गंगा का संगम विशेष रूप से पवित्र माना जाता है। अस्सी घाट काशी के पांच तीर्थों में से यह एक है।
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