वाराणसी में रुद्राक्ष के प्रांगण में हमारे राम का मंचन देखने के लिए काशी की जनता उमड़ पड़ी। तीन घंटे के नाट्य मंचन के दौरान दर्शकों ने त्रेतायुग की संपूर्ण यात्रा की।
जटाओं से है जिनके जलप्रवाह माते गंग का, गले में जिनके सज रहा है हार विष भुजंग का... के पाठ से लंकापति रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया। प्रसन्न होकर भगवान शिव ने रावण को चंद्रहास प्रदान किया तो पूरा रुद्राक्ष का प्रांगण हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा।
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हमारे राम का मंचन
- फोटो : रोहित सोनकर
सर्द शाम को अंतरराष्ट्रीय रामायण कॉन्क्लेव के तहत पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित हमारे राम का मंचन देखने के लिए काशी की जनता उमड़ पड़ी। तीन घंटे के नाट्य मंचन के दौरान दर्शकों ने त्रेतायुग की संपूर्ण यात्रा की। नाटक की शुरुआत भगवान राम के दरबार में लव-कुश के संवाद और माता सीता के धरती में समाहित होने से हुई।
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हमारे राम का मंचन
- फोटो : रोहित सोनकर
इसके बाद लव और कुश भगवान के मर्यादा पुरुषोत्तम होने पर सवाल उठाते हैं। इसका जवाब देने के लिए लक्ष्मण भगवान सूर्य का आह्वान करते हैं और मंच पर रावण के रूप में आशुतोष राणा की एंट्री होती है। रावण भगवान शिव की पूजा करता है। अंतिम आहुति में जब उसे नारियल नहीं मिलता है तो वह कहता है कि मेरे स्वामी के पूजन का अभियान नहीं रुक पाएगा, नारियल के बदले में रावण अपना यह शीश चढ़ाएगा...।
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हमारे राम का मंचन
- फोटो : रोहित सोनकर
रावण जब अपना शीश अर्पित कर देता है तो भोलेनाथ प्रकट होकर उसे दस शीश और बीस हाथ का वरदान देते हैं। मुख्य अतिथि राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार रवींद्र जायसवाल रहे। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह की प्रेरणा और प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन मुकेश मेश्राम के निर्देशन में अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के निदेशक संतोष कुमार शर्मा और सलाहकार आशुतोष द्विवेदी के संयोजन में महानाट्य का आयोजन हुआ।
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- फोटो : रोहित सोनकर
किरदारों ने किया सीधा संवाद
रुद्राक्ष के मंच पर पहली बार हमारे राम के मंचन ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। स्पॉट लाइटों में दर्शकों के बीच से ही लब और कुश की एंट्री होती है। इसके बाद सीता का भी प्रवेश दर्शकों के बीच से होता है। अगले ही दृश्य में कैलाश खेर के गीत दशानन... पर रावण की भव्य एंट्री ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
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हमारे राम का मंचन
- फोटो : रोहित सोनकर
मंच से संवाद अदायगी के दौरान रावण वने आशुतोष राणा सीधे दर्शकों से भी संवाद करते हैं। राम की भूमिका निभा रहे राहल भुचर वनवास के दौरान सीता से संवाद करते हैं और इसी दौरान वह अंत में दर्शकों से भी पूछते हैं कि आप ही बताइए क्या जीत सका है कोई अपनी पत्नी से... तो पूरा हाल ठहाकों से गूंज उठा। नाटक के दौरान किरदारों के पीछे स्क्रीन पर आते जाते दृश्य उस कालखंड का अहसास करा रहे थे। दर्शकों को ऐसा लगा कि मानों वह कोई भव्य नाटक देख रहे हो।
इन्होंने निभाए किरदार
रावण की भूमिका में आशुतोष राणा, राम की भूमिका में राहुल आर भुचर, दानिश अख्तर ने हनुमान, तरुण खन्ना ने भगवान शिव, हरलीन कौर रेखी ने माता सीता की और करण शर्मा ने सूर्य देव की भूमिका निभाई।