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बाबा संकटमोचन ने बचाई मेरी और बेटी की जान, प्रशासनिक अधिकारी ने बयां की आंखों देखी

Thu, 17 May 2018 08:07 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
मेरी और मेरी बेटी की जान बाबा संकटमोचन ने बचा ली। फ्लाईओवर की चपेट में आने से बाल-बाल बचे बरेली में तैनात कारागार प्रशासन के अधिकारी विजय राय ने ‘अमर उजाला’ को फोन कर आपबीती सुनाई। कहा, अगर उनकी कार को महानगर बस ने ओवरटेक न किया होता तो बीम सीधे उनकी कार पर गिरती और वह और उनकी बेटी बच नहीं पाती।
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
राय ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट से बेटी के साथ कार से वापस लौट रहे थे। हादसे के चंद सेकेंड पहले उनकी कार को महानगर बस के ड्राइवर ने ओवरटेक किया। यह देख उन्होंने कार की गति धीमी कर दी और देखते ही देखते दो बीम एक-एक कर तेज धमाके के साथ जमीन पर गिर पड़े। 
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
राय ने बताया कि पल भर के लिए उनकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया था। वहीं, फ्लाईओवर पर काम कर रहे मजदूर बीम गिरते ही भाग निकले। थोड़ी देर के लिए कोई भी कुछ समझ और कर पाने की स्थिति में ही नहीं था। धूल का गुबार थमा तो चीख-पुकार मच गई और लोग मदद के लिए दौड़ पड़े।

लगा जैसा बम का धमाका हुआ हो

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हादसा - फोटो : amar ujala
लहरतारा से कैंट जा रहे माला बेचने वाले बाइक सवार नक्खीघाट निवासी नसीरुद्दीन मंडलीय अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। बताया, हादसे में वह बाल-बाल बच गया। बीम के गिरते ही ऐसा लगा जैसा बम का धमाका हुआ हो। हादसे में नसीरुद्दीन की बाइक दब गई और उसके सिर पर चोट आई।
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लगा था जाम और फिर मची भगदड़

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varanasi - फोटो : अमर उजाला
दुर्घटनास्थल के समीप कपड़ा प्रेस करने वाले बद्री प्रसाद ने बताया कि जब दोनों बीम गिरीं, उस समय जाम लगा हुआ था। किनारे चल रहे बाइक सवार तो कूदकर बच गए पर लेकिन बीम के नीचे वाहनों में फंसे लोगों की सिर्फ चीख-पुकार ही सुनाई दे रही थी। कुछ देर के लिए धूल के गुबार के चलते कुछ भी दिखाई ही नहीं दिया। राहत और बचाव के कार्य में बहुत देर हुई।
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लगा जैसे भूकंप आ गया

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varanasi - फोटो : अमर उजाला
एईएन कॉलोनी की आशा सिंह ने बताया कि जब बीम गिरी तो घर की दीवारें हिल गईं। अचानक लगा जैसे भूकंप आ गया हो। जब बाहर निकल कर देखा तो धूल का गुबार छाया हुआ था और सिर्फ चीख-पुकार सुनाई दे रही थी।

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