पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर को दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा होने के बाद राजनीतिक विरासत को सहेजने की जिम्मेदारी उनकी पत्नी संगीता सेंगर पर आ गई। जिला पंचायत अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने जिले की राजनीति में इसे कायम भी रखा। अब इसे आगे बढ़ाना है। वहीं इस मामले में सपा नेता सुनील सिंह यादव ने ट्वीट कर भाजपा पर हमला बोला है।
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संगीता सेंगर।
- फोटो : amar ujala
इस बार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में संगीता सेंगर एक बार फिर भाजपा के समर्थन से फतेहपुर चौरासी तृतीय से चुनाव मैदान में हैं। वह चुनावी सफलता हासिल कर पाती हैं या नहीं, भाजपा उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष का प्रत्याशी बनाती है या नहीं इसका जवाब तो भविष्य के गर्त में छिपा है लेकिन भाजपा की समर्थित उम्मीदवारों की सूची में संगीता का नाम होने से चुनावी हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
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कुलदीप सेंगर, पत्नी संगीता सेंगर
- फोटो : amar ujala
कुलदीप सेंगर का कभी सूबे की राजनीति में बड़ा नाम रहा। सभी दलों में अच्छी पैठ का ही नतीजा रहा कि वर्ष 2015 में सपा से विधायक रहते हुए उन्होंने पार्टी से बगावत कर अपनी पत्नी संगीता सेंगर को जिला पंचायत चुनाव में सपा की प्रत्याशी व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योति रावत के सामने उतार दिया था।
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पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर
- फोटो : PTI
राजनीतिक रसूख ही था कि उन्होंने अपनी सत्तासीन पार्टी के खिलाफ पत्नी को जिताया। हालांकि 2017 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने सियासी हवा को भांपते हुए भाजपा का दामन थामा और बांगरमऊ से विधायक बने। वर्तमान में किशोरी से दुष्कर्म के दोषी कुलदीप सेंगर दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
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कुलदीप सिंह सेंगर
उनके छोटे भाई मनोज सेंगर की 2019 में मौत हो चुकी है। जबकि सबसे छोटा भाई अतुल सेंगर उर्फ जयदीप, दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हत्या में सजा होने से तिहाड़ जेल में हैं। इस कारण सेंगर परिवार की राजनीतिक विरासत सहेजने की जिम्मेदारी अब संगीता सेंगर के कं धों पर है। भाजपा ने उन्हें फतेहपुर चौरासी तृतीय से समर्थन देकर चुनावी मैदान में उतारा है। जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित होने के बाद पार्टी उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए टिकट देती है या नहीं यह 2 मई को चुनाव नतीजे आने के बाद ही साफ हो पाएगा।
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कुलदीप सेंगर व अतुल सिंह सेंगर की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
सेंगर ने सूबे की सियासत में बनाई थी गहरी पैठ
गांव की राजनीति (ग्राम पंचायत) से राजनीति के रास्ते पर कदम रखने वाले कुलदीप सेंगर ग्राम प्रधान भी रहे थे। बाद में युवक कांग्रेस से सक्रिय राजनीति में कदम रखा था। वर्ष 2002 में बसपा से उन्नाव सदर, 2007 में सपा का दामन थामा और बांगरमऊ से विधायक चुने गए। 2012 में सपा के टिकट पर भगवंतनगर से विधायक बने। वर्ष 2017 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया और बांगरमऊ से जीतकर लगातार चौथी बार विधायक बने थे।
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कुलदीप सिंह सेंगर
काफी रोमांचक रहा था संगीता का मुकाबला
जिला पंचायत के पिछले चुनाव में जिला पंचायत सदस्यों की संख्या 53 थी। सभी सदस्यों ने मतदान में भाग लिया था। तब निर्दलीय प्रत्याशी रहीं संगीता सेंगर और सपा प्रत्याशी ज्योति रावत के बीच मुकाबला हुआ था। संगीता सेंगर के पक्ष में 27 मत पड़े थे। हालांकि मतों की गिनती के दौरान एक मतपत्र में बिंदी लगी पाए जाने पर उसे अवैध घोषित कर दिया गया था।
दोनों प्रत्याशियों को 26-26 वोट मिले। इसपर प्रशासन ने लॉटरी प्रक्रिया अपनानी पड़ी थी। एक डिब्बे में ज्योति रावत व संगीता सेंगर के नाम की पर्ची डाली गई थी। तत्कालीन डीएम सौम्या अग्रवाल ने पर्ची निकाली। इस पर्ची में ज्योति रावत का नाम लिखा था। जबकि संगीता सेंगर के नाम की पर्ची डिब्बे में रही। पंचायतीराज व्यवस्था के तहते संगीता सेंगर को विजेता घोषित किया गया था।