कशिश वर्मा।
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घर की आर्थिक स्थिति कमजोर, मां की खराब तबीयत और सीमित संसाधनों के बावजूद कशिश ने हार नहीं मानी। वह बताती हैं कि उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा उनकी मां हैं। उनकी बीमारी ने उन्हें और मजबूत बनाया। पिता खेती करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं, ऐसे में उन्होंने पढ़ाई को ही अपने सपनों का रास्ता बनाया।
कशिश का सपना शिक्षक बनकर समाज को नई दिशा देना है। वह मानती हैं कि शिक्षा ही वह ताकत है, जो हर मुश्किल को आसान बना सकती है। उनकी यह सफलता उन तमाम बेटियों के लिए उम्मीद की किरण है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को जिंदा रखती हैं।