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दरभंगा ब्लास्ट: पाकिस्तान से रची गई थी बहुत बड़ी साजिश, सलीम ने पूछताछ में खोले खौफनाक राज

Fri, 02 Jul 2021 10:16 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
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दरभंगा ब्लास्ट मामले में शामली से दो आरोपी गिरफ्तार। - फोटो : amar ujala
सिकंदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस में पार्सल बुक कर उसमें ब्लास्ट कर बर्निंग ट्रेन बनाने की साजिश पाकिस्तान से रची गई थी। पाकिस्तान में बैठे आईएसआई के हैंडलर इकबाल काना ने कैराना के हाजी सलीम उर्फ सलीम अहमद को यह जिम्मेदारी सौंपी थी। सलीम ने कफील और हैदराबाद में बैठे नासिर और इमरान खान को अपने साथ लिया। गनीमत रही कि चलती ट्रेन के बजाए पार्सल में उतारते समय विस्फोट हुआ। 

कैराना के मोहल्ला आलखुर्द निवासी हाजी सलीम और कफील से एनआईए ने लंबी पूछताछ की है। सूत्रों का कहना है कि हाजी सलीम के संबंध पाकिस्तान में आईएसआई के लिए काम कर रहे इकबाल काना से थे। उसके इशारे पर ही सलीम ने सिकंदराबाद से दरभंगा जाने वाली ट्रेन में पार्सल में विस्फोटक (लिक्विड आईईडी) रखने की जिम्मेदारी ली थी। उसे हिदायत मिली थी कि वह इस काम में हैदराबाद में रह रहे कैराना के दो भाइयों नासिर और इमरान खान का भी सहयोग ले। सलीम ने कफील के साथ ही नासिर और इमरान खान को अपने साथ मिलाया। 
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शामली: रिटायर फौजी मूसा खान और उनके बेटे नासिर और इमरान। - फोटो : amar ujala
सूत्रों का कहना है कि नासिर ने लेडीज सूट के पार्सल में विस्फोटक रखकर नासिर और इमरान की सहायता से ट्रेन में रखवा दिया। बम कम ताकत था। उसे केवल पार्सल में आग लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाना था। इससे पार्सल की बोगी में आग लग जाती और तेज रफ्तार से चल रही पूरी ट्रेन में फैल जाती। सिकंदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस को बर्निंग ट्रेन बनाकर हजारों यात्रियों की जान लेने की यह पूरी साजिश थी। गनीमत रही कि पार्सल में ब्लास्ट ट्रेन में न होकर स्टेशन पर उतारते समय हुआ। 
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नासिर और इमरान का घर व इमरान का फाइल फोटो। - फोटो : amar ujala
1995 में पाकिस्तान भाग गया था इकबाल काना
कैराना के मूल निवासी इकबाल काना ने पाकिस्तान में अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया है। वह शुरुआत में सोने की तस्करी और बाद में नकली नोटों और असलहा का कारोबार करता था। 1995 में पुलिस का दबाव बढ़ने व इकबाल अपने परिवार के साथ पाकिस्तान भाग गया था। वह पाकिस्तान में अपनी रिश्तेदारी में जाने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों से संपर्क करता रहा है। सलीम भी इकबाल के संपर्क में था। 

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कफील का फाइल फोटो। - फोटो : amar ujala
पार्सल पर लिखा गया था सलीम का नंबर 
दरभंगा एक्सप्रेस ट्रेन में रखे गए पार्सल पर सलीम का नंबर लिखा गया था। शामली जिले का नंबर मिलने के बाद जांच एजेंसियां जिले में सक्रिय हो गईं थीं। सूत्रों का कहना है कि सलीम और कफील को जांच एजेंसियों ने कई दिन पहले हिरासत में ले लिया था। कफील के पिता शकील ने बताया था कि उसके बेटे को 23 जून को पुलिस ने झिंझाना से उठाया था। चर्चा है कि इससे पहले हाजी सलीम को हिरासत में लिया गया था। जांच एजेंसियां दोनों से गोपनीय स्थान पर पूछताछ कर रहीं थी। पूछताछ में कड़ियां जुड़ती गईं और हैदराबाद से नासिर और इमरान की गिरफ्तारी के बाद एनआईए ने सलीम और कफील की गिरफ्तारी को भी उजागर किया। 
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शामली: कफील के पिता शकील। - फोटो : amar ujala
सीसीटीवी फुटेज से हुई थी पहचान 
ट्रेन में पार्सल रखने की जिम्मेदारी नासिर और इमरान को दी गई थी। दोनों के चेहरे पार्सल बुकिंग को जाते समय सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गए थे। एनआईए ने दोनों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया। 
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शामली में कफील का घर। - फोटो : amar ujala
जांच एजेंसी की सूची में कैराना के और भी नाम 
दरभंगा पार्सल ब्लास्ट मामले में कैराना के चार लोगों की गिरफ्तारी के बाद एनआईए की सूची में कैराना के कई और नाम हैं। एनआईए के पहुंचाने के साथ ही शामली क्राइम ब्रांच भी कैराना आ गई थी। टीम ने कैराना के तीन-चार युवकों को कोतवाली बुलाकर उनसे भी लंबी पूछताछ की। बाद में सभी को छोड़ दिया गया। सूत्रों का कहना है कि एनआईए ने स्थानीय पुलिस और क्राइम ब्रांच को कैराना के कुछ युवकों पर नजर रखने को कहा।
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