दो साधुओं का कत्ल: मारने से पहले साथ सोया, रॉड से किया हमला; शवों पर घी डाल लगा दी आग; ये था हत्यारे का मकसद
Thu, 01 Oct 2026 09:24 PM IST
विकास कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, खुदागंज (शाहजहांपुर)
सार
हत्यारोपी सुमित रात 12 बजे मंदिर पहुंचा और तख्त पर सो रहे गोपालदास पर ताबड़तोड़ वार किए। उनकी मौत के बाद पास में सो रहे बिहारीदास की भी हत्या कर दी। मंदिर में रखे घी-तेल आदि को डालकर दोनों के शव जला दिए। इसके बाद सुमित घर जाकर सो गया।
यूपी के शाहजहांपुर स्थित सूथा गांव के पुराने शिव मंदिर परिसर में बुधवार रात दो साधुओं की लोहे की रॉड से पीटकर हत्या कर दी गई। उनके शव जला दिए। पुलिस ने गांव निवासी आरोपी सुमित सिंह (35) को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि आरोपी मंदिर पर कब्जा करना चाहता था। वह कई दिनों से दोनों साधुओं को मंदिर छोड़कर जाने के लिए कह रहा था।
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मृतक गोपालदास और बिहारीदास
- फोटो : अमर उजाला
40 साल से कर रहे थे मंदिर की सेवा
एसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि गोपालदास (75) करीब 40 वर्षों से मंदिर में रहकर सेवा कर रहे थे। उनके शिष्य बिहारी दास (60) भी सेवा करते थे। सुमित सिंह कई दिनों से दोनों साधुओं के पास जाकर बैठता था और उन्हें मंदिर छोड़कर जाने के लिए कहता था। साधुओं ने उसकी बात नहीं मानी तो बुधवार रात दस बजे वह घर से लोहे की रॉड लेकर निकल गया।
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जले हुए शव
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर में रखे घी से लगा दी आग
एसपी के मुताबिक, रात 12 बजे वह मंदिर पहुंचा और तख्त पर सो रहे गोपालदास पर ताबड़तोड़ वार किए। उनकी मौत के बाद पास में सो रहे बिहारीदास की भी हत्या कर दी। मंदिर में रखे घी-तेल आदि को डालकर दोनों के शव जला दिए। इसके बाद सुमित घर जाकर सो गया। सुबह छह बजे वहां से गुजर रहे ग्रामीणों ने अंदर से धुआं उठते देखा तो मंदिर के सर्वेसर्वा शिवकुमार सिंह को कॉल की।
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हत्यारोपी सुमित
- फोटो : अमर उजाला
आरोपी पर दर्ज हैं सात मामले, पिता पर भी कर चुका है हमला
सुमित पर मारपीट, वाहन में आग लगाने और पशुओं की हत्या समेत सात मामले दर्ज हैं। दिसंबर 2025 में आर्म्स एक्ट के मामले में जेल गया था और अगस्त में हरियाली तीज के दौरान पिता उसकी जमानत कराकर घर लाए थे। उस पर अपने पिता पर चाकू से हमला करने का भी आरोप है।
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इसी मंदिर में सुमित ने की साधुयों की हत्या
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर और उससे जुड़ी तीन बीघा जमीन पर थी सुमित की नजर
आरोपी सुमित की नजर मंदिर और उससे जुड़ी तीन बीघा जमीन पर थी। ग्रामीणों का कहना है कि वह आए दिन मंदिर पहुंचकर बिहारीदास को वहां से चले जाने के लिए धमकाता था। बुधवार शाम को भी उसके मंदिर पहुंचने और वहां मौजूद लोगों को धमकाने की बात सामने आई है। घर से निकलने से पहले उसने परिजनों से भी मारपीट की थी। इसके बाद वे घर छोड़कर गांव में ही परिचितों के यहां चले गए थे।
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सुमित के बारे में जानकारी देते ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
सुमित को है आगजनी और तोड़फोड़ की आदत
ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि तोड़फोड़ और आगजनी करना सुमित की आदत है। आरोप है कि पिछले साल उसने शिक्षामित्र कौशलेंद्र की कार और एक बाइक में आग लगा दी थी, लेकिन इसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई थी। वह कई बार लोगों के दरवाजे और चौखट तोड़ चुका है। उस पर जानवरों के साथ क्रूरता के भी आरोप हैं। पिछले साल उसने एक बकरे के कई टुकड़े कर दिए थे। वर्ष 2020 में एक पड्डे को मारने और दूसरे की आंख फोड़ने का भी आरोप लगा था। पड्डे की मौत के मामले में रिपोर्ट दर्ज होने की बात सामने आई है।
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गमगीन परिजन
- फोटो : अमर उजाला
गांव के बुजुर्गों की कर देता था पिटाई
ग्रामीणों का कहना है कि सुमित अक्सर बुजुर्गों से मारपीट करता और उन्हें धमकाता था। उसके व्यवहार से लोग भयभीत रहते थे, इसलिए कई घटनाओं में शिकायत नहीं की गई। पुलिस की जांच में आरोपी के जेल में भी अन्य बंदियों से विवाद करने की बात सामने आई है। तब बंदियों ने उसे पीटा भी था।
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साधुओं के जले शव
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे की वारदात
जेल से बाहर आने के बाद सुमित अक्सर मंदिर में साधुओं के साथ बैठने लगा था। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह मंदिर में खुद रहने और वहां अपना प्रभाव कायम करने की योजना बना रहा था। बुधवार रात वह लोहे की रॉड लेकर मंदिर पहुंचा। वहां उसने पहले दोनों साधुओं का भरोसा जीतने के लिए उनके पास 30 से 40 मिनट तक सोने का नाटक किया।
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हत्यारोपी सुमित और गमगीन परिजन
- फोटो : अमर उजाला
हत्या कर गया घर
दोनों के गहरी नींद में सो जाने के बाद उसने पहले बाबा गोपालदास और फिर दिव्यांग बाबा बिहारीदास की हत्या कर दी। पूजा सामग्री में मौजूद घी और कपूर आदि की मदद से दोनों शवों को आग लगा दी। पुलिस के अनुसार, वह शवों के जलने तक वहां मौजूद रहा। जब उसे यकीन हो गया कि दोनों की मौत हो गई है तो घर लौटकर सो गया।
पहले लगा पेट्रोल से लगाई आग
पहले पुलिस को लगा था कि आग गोपालदास की बाइक से पेट्रोल निकालकर लगाई गई है। जांच करने पर बाइक में पेट्रोल पूरा मिला। इसके बाद सामान जांचा तो घी-तेल वगैरह न मिलने पर उसी से आग लगाने की बात सामने आई। उसने लोहे की रॉड घर के पास घूरे में फेंक दी थी, जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया है।
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पूछताछ करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
सीताराम का जवाब नहीं मिलने पर सशंकित हुए ग्रामीण
मंदिर से गुजरने वाले लोग दोनों साधुओं से सीताराम-सीताराम कहते हुए आगे बढ़ते थे। गुरुवार सुबह छह बजे जब ग्रामीण वहां से गुजरे और सीताराम कहा तो अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। इस पर ग्रामीणों को आशंका हुई तो वे अंदर गए। वहां साधुओं को नहीं मिलने और धुआं उठते देखकर लोग वापस आए और अन्य लोगों को इसके बारे में बताया। इसी बीच गांव निवासी दृगपाल सफाई करने पहुंचा तो वहां का नजारा देखकर स्तब्ध रह गया। ग्रामीणों के अनुसार, दोनों तख्त करीब दो मीटर की दूरी पर पड़े थे और आग से जल चुके थे।
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घटना स्थल की ओर जाती महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
40 वर्ष से सेवा कर रहे बाबा गोपालदास
ग्रामीणों के अनुसार, बाबा गोपालदास करीब 40 साल पहले सूथा गांव आए थे। वह कथावाचक भी थे और आसपास के गांवों में कथा सुनाने जाते थे। गोपालदास मूल रूप से अजीजगंज क्षेत्र के रहने वाले थे। उनकी पत्नी लज्जावती का 20-25 साल पहले निधन हो चुका था। उनकी एक बेटी सरस्वती है, जिसकी शादी हो चुकी है। उनके भाई राम दुलारे, रामकिशोर और रामनिवास हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गोपालदास के पास अक्सर रुपये रहते थे और वह अंगूठियां भी पहनते थे। वहीं, बाबा बिहारीदास गांव के ही रहने वाले थे और गोपालदास के शिष्य थे। 10 साल से वह संन्यासी हो गए थे। उन्हें पैरालिसिस हो गया था, जिसकी वजह से वह डंडे के सहारे चलते थे। वह कुछ दूरी पर यज्ञशाला में बने मंदिर में रहते थे। बुधवार शाम करीब साढ़े छह बजे वह खाना लेकर गोपालदास के पास सोने गए थे। बिहारीदास पांच भाई थे। उनके भाई श्रीकृष्ण और राजवीर गांव में रहते हैं, जबकि ओमवीर और बुधपाल बाहर रहकर कामकाज करते हैं। हत्याकांड की सूचना मिलने पर उनकी बहनें उर्मिला देवी और सुशीला भी पहुंच गईं।
पत्नी बोली : जैसा किया, वैसा भरेगा
वारदात के बाद गांव में सुमित के परिवार के लोग इधर-उधर चले गए थे। घर में केवल उसकी पत्नी और दो छोटे बच्चे थे। पत्नी नीलम ने कुछ भी कहने से मना कर दिया। वह केवल इतना बोली कि जो जैसा करेगा, उसे वैसा ही भरना पड़ेगा।
आस्था का केंद्र है मंदिर, शिवतेरस पर लगता है मेला
सूथा गांव स्थित मंदिर आसपास के ग्रामीणों की आस्था का केंद्र है। यहां शिवतेरस पर मेला भी लगता है। इसके अलावा भी वर्षभर तमाम धार्मिक आयोजन होते रहते हैं।
रोटी खा लेता तो शायद नहीं होती वारदात
आरोपी की पत्नी नीलम के अनुसार उसका बरेली के डॉ. वीके श्रीवास्तव के यहां से मानसिक उपचार चल रहा था। रात में उसे दवा खाने में मिलाकर दी जाती थी। पत्नी का कहना है कि घटना वाली रात सुमित ने खाना नहीं खाया था। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई और उसने घर की चौखट तोड़ दी थी। उसका कहना है कि अगर वह रोटी खा लेता तो शायद यह वारदात नहीं होती।