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शाहजहांपुर हत्याकांड: जिंदा होते बच्चे अगर मान ली होती बेटी ने मां की बात, कीर्ति की जिद के आगे झुकी कौशल्या

Thu, 27 Mar 2025 08:57 PM IST
विकास कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर।

सार

- पति के पीटने के बाद बेटी को लेने स्कूल पहुंची थीं कौशल्या, बेटी ने परीक्षाएं होने की बात कहकर जाने से मना कर दिया।
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शाहजहांपुर हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
मम्मी, पापा आपको पीट रहे हैं तो आप रातभर के लिए कहीं चली जाओ। पापा हम लोगों को थोड़े न मार देंगे। यह कहना था कौशल्या की बेटी कीर्ति का जब वह उसे लेने के लिए स्कूल पहुंची थी। बेटी की बात का भरोसा कर कौशल्या बच्चों को छोड़कर मायके चली गई और रात में पति ने सबकी गला रेतकर हत्या कर दी।
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Shahjahanpur Murder Case - फोटो : अमर उजाला
कौशल्या की चीखों से सबकी आंखें नम
चंद घंटे पहले भरे-पूरे परिवार को खो देने वाली कौशल्या सुध-बुध खो बैठी है। पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंची कौशल्या को परिवार वाले दिलासा देने का प्रयास करते हुए खुद फूट-फूटकर रो रहे थे। कौशल्या की चीखें सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
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बेटा ऋषभ - फोटो : अमर उजाला
पति ने ही बुझा दिया चिराग
अपने लला को पुकारकर बिलखती हुई कौशल्या बोलीं कि बच्चों को पालने में खुद कभी चप्पल तक नहीं पहन सकी। बेटा जब तक कोख में रहा, दवाई खाती रही। सोचा था बेटा वंश आगे बढ़ाएगा। मेरे पति ने ही चिराग बुझा दिया। बेटियों को याद कर कौशल्या रह-रहकर बिलखती रहीं।

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हत्यारा पति राजीव - फोटो : अमर उजाला
राजीव के घूंसे से हो गई थी बेहोश
बताया कि दोपहर में उसने दाल-चावल बनाया था। राजीव ने उसे बिना वजह पीटना शुरू कर दिया। उसे घूंसा मारा तो वह बेहोश होकर गिर गई। उसे मारपीट कर घर से भगा दिया था तो वह बेटी के स्कूल पहुंची। बेटी कीर्ति ने कहा कि मम्मी, पापा आपको पीट रहे हैं तो आप रातभर के लिए कहीं चली जाओ। मेरी परीक्षाएं चल रहीं हैं। पापा ने इतनी मुसीबतों के बीच हमें पाला है... हमें थोड़े न मार डालेंगे। छोटे भइया को हम संभाल लेंगे। कीर्ति को यादकर बिलखते हुए कौशल्या बोली कि उसका बच्चों को छोड़कर जाने का मन नहीं था। फिर लगा कि उसके सामने रहने पर पति और गुस्सा करेगा। इस वजह से मायके चली गई। अपने बच्चों को छोड़कर जाने के लिए कौशल्या खुद को दोषी मानती रही।
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राजीव के पिता पृथ्वीराज - फोटो : अमर उजाला
ससुर को कहा था- बच्चों को देखते रहना
बच्चों की याद में रातभर नहीं सो पाई कौशल्या ने बताया कि बच्चों के घर में रहने के कारण उसका मायके में मन नहीं लग रहा था। रातभर रह-रहकर हूक उठती रही। बच्चों की याद में नींद नहीं आ रही थी तो करवटें बदलती रही। उसने ससुर को कॉल करके कहा था कि बच्चों को देखते रहना। पति का दिमाग ठीक नहीं रहता है। पोस्टमॉर्टम हाउस पर ससुर के सामने बिलखते हुए कौशल्या ने कहा कि बार-बार देखते रहने को कहा था फिर भी बच्चों को बचा क्यों नहीं पाए? इस पर ससुर पृथ्वीराज बोले कि दिनभर मजदूरी करने के बाद घर आए थे। रात 12 बजे तक कई बार घर में झांककर देखा था। रात 12 बजे बच्चों और राजीव को सोता हुआ देखा तो अपनी झोंपड़ी में जाकर सो गया। सुबह जाकर देखा तो सबकुछ खत्म हो गया था।
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Shahjahanpur Murder Case - फोटो : अमर उजाला
कहता था राजीव... सबको मारकर मर जाऊंगा
हादसे से पहले 14 साल तक राजीव पत्नी और बच्चों के साथ गरीबी के बावजूद हंसी-खुशी बसर करता था। कौशल्या के मुताबिक, पहले कभी कोई विवाद नहीं हुआ। पति बच्चों को बहुत चाहता था। हादसे के बाद उसका खुद पर नियंत्रण नहीं रह गया था। राजीव का व्यवहार अचानक से बदल जाता था। कौशल्या ने बताया कि वह अक्सर कहता था कि सबको मारकर वो खुद मर जाएगा। इस वजह से मन सशंकित रहता था लेकिन वह ऐसा कर ही देगा, इसका बिल्कुल यकीन नहीं था। कौशल्या ने बताया कि पति उससे सामान्य तौर पर झगड़ा नहीं करता था। कभी-कभी अचानक से झगड़ने लगता। इस पर कई बार पुलिस भी बुलानी पड़ जाती थी। पारिवारिक विवाद और राजीव की मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण पुलिस समझा-बुझाकर लौट जाती थी।
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Shahjahanpur Murder Case - फोटो : अमर उजाला
मुझे भी मार दो... इसी चीरघर में आएगी मेरी लाश
पोस्टमॉर्टम हाउस पर बच्चों और पति को याद कर कौशल्या बोली कि हमें भी मार दो। नहीं मारोगे तो फंदे से लटककर जान दे देंगे। इसी चीरघर में मेरी भी लाश आएगी। अब हम जिंदा रहकर क्या करेंगे, जिनके लिए इतने कष्ट सहकर जी रहे थे वो तो सब एक झटके में चले गए। अब जिंदा नहीं रह सकते। परिवार वाले उसे संभालने का प्रयास कर रहे थे। महिला पुलिसकर्मियों ने भी उसे सांत्वना देने की कोशिश की।
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इसी घर में हुई वारदात - फोटो : अमर उजाला
बेटे को छीन लिया... बोला अकेली जाओ
कौशल्या से जब राजीव झगड़ा करने लगा तो उसने बेटे ऋषभ को साथ ले जाने की कोशिश की। इस पर वह भड़क गया। उसने कहा कि बेटे को यहीं छोड़कर अकेली जाओ। राजीव ने बेटे को 20 रुपये का नोट दिया और खिलौना देकर पुचकारने लगा। पिता की गोद में बेटा शांत होकर खेलने लगा। तब कौशल्या को लगा कि शायद वो बच्चों को नुकसान न पहुंचाए।

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