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मौत का शॉर्टकट: एक किमी का फेर बचाने में चली गई पांच लोगों की जान, दिल झकझोर देगी शाहजहांपुर हादसे की कहानी

Thu, 25 Dec 2025 01:22 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर

सार

शाहजहांपुर के रोजा में बुधवार शाम एक झटके में पांच लोगों की जान चली गई। हादसे का कारण बना शॉर्टकट रास्ता, जहां से गुजरते समय बाइक सवार सभी लोग ट्रेन की चपेट में आ गए। ट्रेन से कटकर पांचों की मौत हो गई। इस हादसे ने लोगों का दिल झकझोर दिया। 
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घटनास्थल पर पुलिस ने सील किए पांचों शव - फोटो : संवाद
शाहजहांपुर में एक किलोमीटर का फेर बचाने के प्रयास में रोजा रेलवे स्टेशन पर पावर केबिन के सामने रेलवे कर्मियों की सुविधा के लिए बनी क्रॉसिंग से गुजरते समय बाइक सवार पांच लोगों की जान चली गई। 110 प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही रन-थ्रू गरीब रथ एक्सप्रेस के इंजन की टक्कर लगने से बाइक के परखचे उड़ गए। पांचों लोगों के शव बुरी तरह क्षतविक्षत अवस्था में मिले। 

हादसा बुधवार शाम करीब 6:10 बजे उस समय हुआ, जब बरेली से लखनऊ की ओर जाती सहरसा-अमृतसर गरीब रथ ट्रेन रोजा स्टेशन के आउटर पर पहुंच रही थी। तभी लखीमपुर खीरी जिले के थाना उचौलिया क्षेत्र के गांव बनका निवासी हरिओम (26) शाहजहांपुर के निगोही इलाके के विक्रमपुर चकौरा उर्फ बिकन्नापुर निवासी अपने साढ़ू सेठपाल (32), उनकी पत्नी पूजा (26) और उनके दो बच्चों चार वर्षीय निधि व डेढ़ वर्षीय सूर्या के साथ एक ही बाइक से रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे। ये सभी ट्रेन की चपेट में आ गए। टक्कर इतना तेज लगी कि पांचों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
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रोजा जंक्शन की क्राॅसिंग यहीं पर हुआ हादसा - फोटो : संवाद
रेलवे स्टेशन के पास ही गेट संख्या 317 को रेलवे कर्मचारियों की आवाजाही के लिए बनाया गया है। गेट पर अप और डाउन की पटरी के साथ लूप लाइनें भी हैं। सामान्य तौर पर इस गेट से आमजन को आने-जाने पर रोक होनी चाहिए, लेकिन रेलवे अफसरों की लापरवाही के कारण लोग इसे शॉर्टकट के तौर पर अपनाते हैं।
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प्लेटफॉर्म पर पड़ा बाइक की पहिया - फोटो : संवाद
बाइक के उड़े परखच्चे
रोजा ओवरब्रिज से होकर गुजरने में लगभग एक किमी का फेर पड़ जाता है। बुधवार की शाम को हरिओम, सेठपाल, पूजा व उनके दो बच्चे बाइक से रवाना हुए तो रोजा बस अड्डे से रैक प्वाइंट की ओर जाने के लिए एक किमी का फेर बचाने के लिए रोजा में मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पटरी पर पहुंचने पर हरिओम व सेठपाल को दूर से रन-थ्रू ट्रेन आती दिख गई, लेकिन बाइक सवार समझ नहीं पाए कि गाड़ी कौन-सी लाइन पर आएगी। इस बीच तेज गति से आई ट्रेन के इंजन से बाइक में जोरदार टक्कर लगी और बाइक के परखच्चे उड़ गए।

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हरिओम का फाइल फोटो - फोटो : संवाद
बच्चों को लेकर हरिओम की गर्भवती पत्नी का हाल जानने जा रहे थे सेठपाल व पूजा
गांव बनके निवासी हरिओम सैनी के पिता लालाराम व मां माया देवी रोजा की मठिया कॉलोनी में किराये के मकान में रहते हैं। हरिओम की पत्नी आरती गर्भवती है। बुधवार की शाम को हरिओम अपने माता-पिता से मिलने के लिए आया था। उसने सेठपाल को कॉल की तो पता चला कि साढू व साली पूजा बुध बाजार में खरीदारी करने आए हुए हैं। वह बाइक से शहर आया और दोनों को पिता के घर ले आया। यहां आरती के गर्भवती व बीमार होने की जानकारी होने पर सेठपाल व पूजा उसे देखने जाने के लिए तैयार हो गए। 
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हादसे के बाद घटनास्थल पर खड़े लोग - फोटो : संवाद
दो बच्चों समेत पांचों लोग बाइक पर सवार होकर घर से करीब पांच सौ मीटर दूर ही चले होंगे तभी रेलवे क्रॉसिंग पर हादसा हो गया। किसी ने लालाराम को रेलवे फाटक पर हादसा होने की सूचना दी तो वह घबरा गए। आशंकित लालाराम जब मौके पर पहुंचे तो शव यहां-वहां पड़े देखकर बदहवास हो गए। बेटे हरिओम को सर्दी से बचाव के लिए ओढ़ने के लिए दी अपनी शॉल देखकर बिलख पड़े। उन्होंने ही क्षतविक्षत शवों की पहचान की। हादसे के बाद लालाराम के परिवार के अन्य सदस्य भी मौके पर पहुंच गए। पूरे प्लेटफॉर्म पर चीख-पुकार मच गई। 
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हादसे के बाद रोती-बिलखती महिला - फोटो : संवाद
हरिओम की मां बोलीं- एक बार तो आंखें खोलकर देख लो 
हादसे के बाद हरिओम की मां माया देवी और उनकी बहनें रेलवे स्टेशन पर पहुंचीं तो शवों को देखकर बिलख पड़ीं। माया देवी बार-बार बोलती रहीं कि एक बार तो आंखें खोल लो। हरिओम की आरती देवी से करीब तीन साल पहले शादी हुई थी। उनका एक बेटा भी है। उनकी तीन बहनों में अन्नपूर्णा का करीब डेढ़ साल पहले विवाह हुआ था। दीपिका व शालू अभी अविवाहित हैं। 
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घटना के बाद शवों को सील करती पुलिस - फोटो : संवाद
लालाराम और उनकी पत्नी माया देवी यहां रोजा में किराये के मकान में रहते थे। लालाराम मजदूरी करते हैं, जबकि माया देवी नमकीन फैक्टरी में काम करती हैं। वह काम कर बेटियों की शादी के लिए तैयारी कर रहीं थीं। परिजनों के अनुसार, वर्ष 2009 में हरिओम के भाई दीपक की रोजा के चकभिटारा के पास हादसे में जान चली गई थी।

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सेठपाल की मासूम बेटी - फोटो : संवाद
पापा ने कहा था, चीज लेकर आएंगे 
मजदूरी करने वाले सेठपाल के परिवार में केवल आठ वर्षीय बड़ी बेटी परी बची है। बुधवार को शहर की बुध बाजार में खरीदारी करने गए सेठपाल बेटी परी को पिता बाबूराम के पास छोड़कर आए थे। उसके साथ नहीं होने के चलते उसकी जान बच गई। घर में मौजूद अबोध परी को इतना तो समझ आ रहा था कि उसके मम्मी-पापा और भाई-बहन के साथ कुछ गलत हो गया है लेकिन वह यह नहीं समझ पा रही थी कि वे अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। सिसक रही परी बोली कि उसने पापा से साथ ले चलने के लिए कहा था मगर उन्होंने मना कर दिया। कहा कि उसके लिए चीज लेकर लौटेंगे। उसकी बातें सुनकर लोगों की आंखें छलक आईं।  

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शाहजहांपुर हादसा: मृतकों के फाइल फोटो, घटनास्थल पर रोती परिवार की महिला - फोटो : अमर उजाला
बाबूराम के बेटे शेर बहादुर, सेठपाल, ब्रह्मपाल, सुमित हैं और दो बेटियां सुनीता और पिंकी है। शेर बहादुर, सेठपाल व सुनीता का विवाह हो चुका है। भाई ब्रह्मपाल ने बताया कि बुधवार को सेठपाल, पत्नी व दो बच्चों के साथ खरीदारी करने के लिए आए थे। साढू के घर जाते समय उनकी मौत हो गई। अब उनके परिवार में एक मात्र बेटी परी बची है। 
 

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अपनों के शवों को देख बिलख पड़े परिजन - फोटो : संवाद
मां ने किया था मना, बोली थी अंधेरा हो गया, कल चले जाना
हरिओम की मां माया देवी ने बेटे के सर्दी और कोहरे के मौसम में रात में सफर करने के लिए मना किया था। माया देवी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि शाम हो गई, साथ ही सर्दी और काेहरा भी पड़ने लगता है। इसलिए सुबह चले जाना। उनकी बात को दरकिनार कर हरिओम ने कहा कि वह सावधानीपूर्वक बाइक चलाकर कुछ देर में गांव पहुंच जाएगा। उनके जाने के कुछ देर के बाद ही हादसे की सूचना आ गई।
 

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हादसे के बाद रेलवे ट्रैक किनारे खड़े लोग - फोटो : संवाद
माता-पिता का इकलौता पुत्र था हरिओम
शाहजहांपुर के रोजा में हुए हादसे में जान गंवाने वाला बनका गांव निवासी हरिओम अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे। उनकी मौत से परिवार में कोहराम मच गया। गांव के लोगों ने बताया कि हरिओम बनका गांव में अपनी ननिहाल में रहते थे। उनसे बड़ी एक बहन है, जिसका विवाह हो चुका है। दो छोटी बहने हैं, जो पिता लालाराम के साथ रोजा में रहती हैं। 
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मृतकों के गमजदा परिजन - फोटो : संवाद
हरिओम का एक बेटा है जिसकी उम्र करीब दो साल है। शाम को जैसे ही हादसे में हरिओम की मौत की खबर यहां आई तो कोहराम मच गया। हालांकि उनकी गर्भवती पत्नी आरती को घटना के बारे में काफी देर तक नहीं बताया गया। हादसे में जान गंवाने वाले हरिओम के बड़े भाई दीपक की मौत भी हादसे में हुई थी। करीब दस साल पहले राष्ट्रीय राजमार्ग पर भिटारा थाना रोजा में साइकिल सवार दीपक को ट्रक ने टक्कर मार दी थी।

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