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जामा मस्जिद में किए गए बड़े बदलाव: एएसआई ने कमेटी पर उठाए सवाल, अब संरक्षण एवं विज्ञान शाखा भी करेगी जांच

Mon, 03 Mar 2025 11:38 AM IST
विमल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, संभल

सार

एएसआई की रिपोर्ट में जामा मस्जिद कमेटी पर बिना सूचना दिए बदलाव करने का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट में फर्श बदलने और टाइल्स लगाने का भी उल्लेख है। अब एएसआई की संरक्षण एवं विज्ञान शाखा इन बदलावों को ऐतिहासिक रूप देने पर काम करेगी।
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जामा मस्जिद पहुंची एएसआई की टीम (फाइल) - फोटो : संवाद

संभल जामा मस्जिद की पुताई के मामले में जांच कर चुकी एएसआई की टीम ने अपनी रिपोर्ट में मस्जिद कमेटी पर सवाल उठाए हैं। उच्च न्यायालय में दाखिल की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि मस्जिद में पुताई की जरूरत तो नहीं है लेकिन मस्जिद कमेटी ने एएसआई को जानकारी दिए बिना कई बदलाव कर दिए हैं। अब इन बदलाव को ऐतिहासिक रूप देने की जरूरत है, जिसके लिए एएसआई की संरक्षण एवं विज्ञान शाखा काम करेगी।

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जामा मस्जिद पहुंची एएसआई की टीम (फाइल) - फोटो : संवाद
सूत्रों का कहना है कि एएसआई की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि मस्जिद की फर्श को बदल दिया गया है। टाइल्स लगा दी गई हैं। इसकी भी जानकारी एएसआई को नहीं है। दरअसल जामा मस्जिद कमेटी ने रमजान से पहले जामा मस्जिद में पुताई, सफाई और सजावट की अनुमति के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने एएसआई से इस अनुमति के लिए जांच करा रिपोर्ट देने के लिए कहा।
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जामा मस्जिद पहुंची एएसआई की टीम (फाइल) - फोटो : संवाद
27 फरवरी को एएसआई की टीम जामा मस्जिद की स्थिति का आकलन करने के लिए पहुंच गई। इसमें एएसआई के संयुक्त निदेशक मदन सिंह चौहान, निदेशक (स्मारक) जुल्फिकार अली और मेरठ सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद्  विनोद सिंह रावत शामिल थे। इस टीम ने अपनी रिपोर्ट 28 फरवरी को उच्च न्यायालय में पेश की थी। इस रिपोर्ट में ही जामा मस्जिद कमेटी के द्वारा किए गए बदलाव का उल्लेख किया गया है। साथ ही पुताई की जरूरत नहीं होने की बात कही है।

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जामा मस्जिद पहुंची एएसआई की टीम (फाइल) - फोटो : संवाद

परिसर में सफाई की जरूरत बताई
जामा मस्जिद की स्थिति का आकलन कर लौटी एएसआई की टीम ने उच्च न्यायालय में दाखिल की रिपोर्ट में माना है कि सफाई की जरूरत है। जो एएसआई द्वारा कराई जाएगी लेकिन पुताई की जरूरत नहीं है। हालांकि सफाई कब होगी यह तय नहीं हुआ है। मंगलवार को उच्च न्यायालय में फिर से सुनवाई होनी है। उसके बाद तय हो सकता है कि एएसआई द्वारा सफाई कब कराई जाएगी।

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जामा मस्जिद पहुंची एएसआई की टीम (फाइल) - फोटो : संवाद
सदर बोले, 1927 के अनुबंध का किया जा रहा है उल्लंघन
जामा मस्जिद 1920 से एएसआई के संरक्षण में है। जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली एडवोकेट का कहना है कि 1927 में मुरादाबाद के कलक्टर के माध्यम का एक अनुबंध एएसआई के साथ हुआ था। जिसमें स्पष्ट लिखा है कि पुताई, सफाई व अन्य काम मुतवल्ली द्वारा समय-समय पर कराए जा सकते हैं। उसका खर्च भी एएसआई के द्वारा ही दिया जाना है। उस अनुबंध का उल्लंघन किया जा रहा है। जहां पुताई की जरूरत है वह हिस्सा भी रिपोर्ट में पेश किया जाना चाहिए। कहा कि मंगलवार को उच्च न्यायालय में सुनवाई होगी। उसमें मस्जिद कमेटी मजबूती से अपना पक्ष रखेगी।
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जामा मस्जिद पहुंची एएसआई की टीम (फाइल) - फोटो : संवाद
स्वरूप बदलने का आरोप लगा चुके हैं अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन
जामा मस्जिद के सर्वे कराने वाली टीम में शामिल अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन शुक्रवार को जामा मस्जिद कमेटी पर आरोप लगाया था कि वह स्वरूप बदलना चाहते हैं। इसलिए पुताई की अनुमति मांग रहे हैं। उन्होंने कहा था कि अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। इससे स्वरूप को बदला जा सकता है। इसलिए जो सर्वे रिपोर्ट में तथ्य शामिल किए गए हैं उनमें भी बदलाव हो सकता है।
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