लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों की जिले में वापसी तेज हो गई है। शुक्रवार की रात और शनिवार को तीन ट्रेनों से 3863 लोगों को प्रतापगढ़ लाया गया। जिसमें लुधियाना से आने वाली ट्रेन में सबसे अधिक 1174 लोग प्रतापगढ़ के थे। जबकि सूरत से आने वाली दो ट्रेनों में जिले के लोगों की संख्या 226 थी।
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प्रवासी मजदूरों की जांच और व्यवस्थित रूप से घर पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी थी। डीएम डा. रुपेश कुमार और एसपी अभिषेक सिंह पूरे समय तक मौजूद रहकर मजदूरों को खाना-पानी मुहैया कराते रहे। इधर, स्टेशन पर स्वास्थ्य विभाग की टीम थर्मल स्क्रीनिंग करती रही।
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लॉकडाउन में अन्य प्रदेशों में फंसे मजदूरों को गृह जनपद पहुंचाने में अफसरों के साथ ही रेल विभाग ने तेजी दिखानी शुरू कर दी है। गुरुवार की रात करीब नौ बजे सूरत से आई ट्रेन में 1293 लोग सवार थे। जिसमें 125 लोग जिले के थे। 39 जिलों के अन्य मजदूरों को रोडवेज बसों से उनके घर भेजा गया।
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शनिवार की सुबह लुधियाना से आई ट्रेन में 1246 लोग सवार थे। जिसमें 36 फैजाबाद और बहराइच, 36 लोग जौनपुर और 1174 लोग प्रतापगढ़ के थे। करीब पौने ग्यारह बजे सूरत से आई तीसरी ट्रेन में 1324 लोग थे। जिसमें प्रतापगढ़ के 106 लोग शामिल थे।
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प्रवासी मजदूरों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े, इसके लिए जिला प्रशासन ने व्यापक व्यवस्था कर रखी थी। डीएम डा. रुपेश कुमार अंदर और बाहर की व्यवस्था की निगरानी करने के साथ ही सभी लोगों को लंच पैकेट मुहैया कराने पर जोर देते रहे। ट्रेन से उतरने वाले मजदूरों की जांच होने के साथ उन्हें ही सैनिटाइज किया गया।
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सूरत से प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन पहुंचने पर ट्रेन से उतरकर अपनी माटी को प्रणाम करता परिवार।
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सबसे अधिक कुंडा तहसील के थे प्रवासी मजदूर
लुधियाना से आने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेन के शनिवार सुबह 8.55 बजे स्टेशन पर पहुंचते ही उसमें सवार प्रतापगढ़ के प्रवासी श्रमिक खुशी से झूम उठे। किसी ने मातृभूमि को नमन किया, तो किसी ने मोदी, योगी के जिंदाबाद के नारे लगाए। ट्रेन से जिले के कुल 1174 लोग घर पहुंचे।
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शनिवार को लुधियाना से आने वाली ट्रेन के यात्रियों में गजब का उत्साह देखने को मिला। ट्रेनों से आने वाले यात्री प्राय: गुमसुम रहते हैं, मगर लुधियाना से आने वाले यात्री उत्साह से लबरेज दिख रहे थे। ट्रेन से उतरने वाले अधिकांश यात्री खुशी से चहक रहे थे। स्टेशन से बाहर निकलने वाले लोग अपनी भावनाओं को नहीं रोक पाए और नारेबाजी करने लगे। बस में बैठने से पहले पीएम मोदी और सीएम योगी जिंदाबा
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द के नारे लगाए। ट्रेन से उतरने वाले सभी लोगों को लंच पैकेट और पानी का बोतल दिया गया। फिर तहसीलों के लिए बसों में बैठाकर आश्रय स्थलों के लिए भेज दिया गया।
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तहसीलों में हुआ स्वास्थ्य परीक्षण
लुधियाना और सूरत से आने वाले बेल्हा के लोगों के स्वास्थ्य की जांच तहसीलों में बने आश्रय स्थलों में की गई। सदर तहसील के लोगों की जयमंगल सिंह प्राथमिक शिक्षण संस्थान में जांच हुई। लोगों को राशन का किट प्रदान किया गया। कुंडा, रानीगंज, पट्टी और लालगंज के आश्रय स्थलों में गहन जांच होने के बाद सभी को 21 दिन होम क्वारंटाइन रहने को कहा गया।
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लुधियाना से किस तहसील में आए कितने लोग
तहसील का नाम संख्या
सदर 272
रानीगंज 239
पट्टी 182
कुंडा 359
लालगंज 122
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प्रयागराज से मंगाई गईं 40 बसें
जिले में लगातार ट्रेनों के आने से रोडवेज डिपो में बसें कम पड़ गईं। इससे आनन-फानन में प्रयागराज से 40 बसें मंगानी पड़ीं। दरअसल, बांदा, बस्ती, गोंडा, बहराइच यात्रियों को लेकर जाने वाली बसें अभी लौट नहीं पाई हैं। इससे अचानक बसों की कमी पड़ गई।
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शुक्रवार की रात करीब नौ बजे सूरत से आई ट्रेन में सवार यात्रियों को रोडवेज बस रात में लेकर उनके गृह जनपद के लिए रवाना हो गईं। इधर, जिला प्रशासन को सुबह पौने ग्यारह बजे सूरत से दूसरी ट्रेन आने की जानकारी हुई। एआरएम पौने ग्यारह बजे आने वाली ट्रेन की व्यवस्था में लगे ही थे कि शनिवार की शाम छह बजे एक और ट्रेन आने की जानकारी हुई। इससे परिवहन निगम में हड़कंप मच गया।
एआरएम ने आनन-फानन में आरएम प्रयागराज से बात कर 40 बसें मंगाईं। प्रयागराज से बसें आने के बाद एआरएम ने राहत की सांस ली। फिलहाल लुधियाना से आई ट्रेन ने जिला प्रशासन को काफी राहत दी है। लुधियाना की ट्रेन में जिले के ही 1174 लोग सवार थे। इन लोगों को तहसीलों में ही छोड़ना था। इसलिए बसों को कम चक्कर लगाना पड़ा। सूरत से आने वाली ट्रेनों ने जिला परेशानी की परेशानी बढ़ा दी है। हर ट्रेन में 40-50 जिलों के मजदूर आ रहे हैं।