मंगलवार भोर में श्रमिकों को लेकर मुंबई से दूसरी स्पेशल ट्रेन जंक्शन पहुंची। ट्रेन से कुल 1257 श्रमिकों को उतारा गया। 32 जिले के श्रमिकों को 35 बसों से उनके घर भेजा गया। करीब 200 लोग प्रतापगढ़ के थे। जिन्हें तीन दिनों के लिए क्वारंटीन करा दिया गया। मुंबई से आई ट्रेन को लेकर प्रशासन पहले से सतर्क दिखा। सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही कहीं कोई चूक न हो जाए, इसका भी ध्यान रखा गया।
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जिलाधिकारी डा. रुपेश कुमार ने भी स्टेशन का जायजा लिया। मंगलवार भोर में करीब चार बजे मुंबई से श्रमिकों को लेकर दूसरी स्पेशल ट्रेन पहुंची। रेलकर्मी एनाउंस करने लगे कि यात्री बिना अनुमति के नीचे नहीं उतरें। सफाई कर्मचारियों ने गेट खोला। जिलेवार उतरने की घोषणा की गई।
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जिलेवार उतरे श्रमिकों को उनकी बसों की तरफ भेजा गया। बसों के जाने के बाद श्रमिकों की गिनती का मिलान कागज पर शुरू हुआ। ट्रेन से कुल 1257 श्रमिक आए थे। जिसमें देवरिया, अंबेडकर नगर, कौशांबी समेत 32 जनपदों के श्रमिक शामिल थे। 200 लोग प्रतापगढ़ के थे। उन्हें घर तक पहुंचाने के लिए 35 बसें लगाई गई थीं। प्लेटफार्म पर सुरक्षा की जिम्मेदारी आरपीएफ और जीआरपी ने संभाल रखी थी।
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ट्रक और लोडर से प्रतापगढ़ पहुंचे मजदूर
जिले में लोडर और ट्रक पर सवार होकर बाहर से लोगों के आने का सिलसिला जारी है। मंगलवार को सूरत से लोडर पर सवार होकर नौ लोग बेल्हा पहुंचे। इधर, जीजीआइसी के सामने हाइवे पर पैदल चलने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए पुलिस ने ट्रक रुकवाया और उसमें बैठाकर फैजाबाद के लिए रवाना किया।
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प्रवासी कामगारों के आने का सिलसिला थम नहीं रहा है। पैदल, साइकिल, बाइक, टेंपों और ट्रक से आने वालों की संख्या में कोई कमी नहीं आ रही है। मंगलवार को लोडर पर सवार होकर नौ लोग सूरत से बेल्हा पहुंचे। लोडर पर एक व्यक्ति पट्टी और बाकी लोग लालगंज के निवासी थे।
रोडवेज बस अड्डे पर पहुंचते ही थोड़ी देर रुककर पट्टी जाने वाले मजदूर को छोड़ने के बाद वह लालगंज के लिए चल पड़ा। हालांकि उसे रोकने वाला कोई नहीं था। मंगलवार को दोपहर में जीजीआईसी की तरफ से लगभग दो दर्जन लोग पैदल ही फैजाबाद जा रहे थे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें ट्रक में बैठाकर भेजा।