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दोनों के जज्बे को सलाम: एक साथ पढ़ाई कर बने फौजी, तीन साल में दोनों के बलिदान से हर आंख हुई नम; तस्वीरें

Tue, 03 Jun 2025 08:56 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पीलीभीत

सार

ग्रामीणों और परिजनों के अनुसार, लखविंदर और मनतेज सिंह दोनों ने बचपन में पढ़ाई एक साथ की। दोनों को बचपन से ही फौजी बनने का सपना था। इस सपने को पूरा करने के लिए दोनों ने साथ ही तैयारी की।
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लखविंदर सिंह और मनतेज सिंह - फोटो : अमर उजाला
बचपन में साथ खेले, पढ़े और देश की सेवा का संकल्प लिया। तहेरे-चचेरे भाइयों ने एक साथ ही तैयारी की। एक ने एसएसबी और दूसरे ने भारतीय सेना से जुड़कर देश सेवा शुरू कर दी। वर्ष 2023 में अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान एक बलिदान हो गया। सोमवार को सिक्किम में हुए भूस्खलन में दूसरा भाई भी बलिदान हो गया। यह कहानी पीलीभीत के गांव धुरिया पलिया निवासी हवलदार लखविंदर सिंह और तीन साल पूर्व बलिदान हुए उसके तहेरे भाई मनतेज सिंह की है। दोनों के जज्बे को याद कर परिजन और ग्रामीणों की आंखें नम हैं। 
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लखविंदर सिंह और परिवार वाले - फोटो : अमर उजाला
गुरदेव सिंह के पुत्र लखविंदर सिंह सेना में हवलदार थे। वह बीते दिनों 50 दिन की छुट्टी पर घर आए थे। बेटी के जन्म के बाद करीब डेढ़ माह पूर्व 20 अप्रैल को ड्यूटी पर वापस गए थे। सोमवार शाम उनके बलिदान होने की सूचना मिली तो परिवार में कोहराम मच गया। बुजुर्ग माता-पिता, भाई, पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। बुधवार को उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचने की उम्मीद है। 
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गमगीन परिजन - फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों और परिजनों के अनुसार, लखविंदर और मनतेज सिंह दोनों ने बचपन में पढ़ाई एक साथ की। दोनों को बचपन से ही फौजी बनने का सपना था। इस सपने को पूरा करने के लिए दोनों ने साथ ही तैयारी की। लखविंदर सिंह डोगरा रेंजीमेंट और मनतेज सिंह एसएसबी में भर्ती होकर देश सेवा में जुट गए।

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गमगीन परिजन - फोटो : अमर उजाला
क्षेत्रीय नागरिक जसवंत सिंह का कहना है कि दोनों गांव आते तो देश सेवा का जज्बा दिखता। अन्य युवाओं को भी फौजी बनने के लिए प्रेरित किया करते थे। इस बीच वर्ष 2023 में मनतेज सिंह अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान बलिदान हो गए थे।
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बलिदानी के पिता गुरदेव सिंह - फोटो : अमर उजाला
अपने भाई से ज्यादा दोस्त के जाने की खबर से लखविंदर दुखी हुए, लेकिन देश सेवा में जुटे रहे। सोमवार को सिक्किम के लाचुंग में हुए भूस्खलन में वह भी बलिदान हो गए। इस खबर से परिवार और आसपास के लोग टूट गए। गांव में लोगों का तांता लग गया। हर किसी की आंखें नम हो गईं। बलिदान हुए हवलदार लखविंदर सिंह और तीन साल पहले बलिदान हुए उसके तहेरे भाई मनतेज सिंह की कहानी को लोग याद करते रहे।
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बलिदानी के घर पहुंचे डीएम और एसपी - फोटो : अमर उजाला
क्षेत्रीय लोगों की मांग, गांव के दोनों ओर बने शहीद द्वार
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि तीन साल पूर्व एसएसबी जवान मनतेज और सोमवार को हवलदार लखविंदर सिंह ड्यूटी के दौरान बलिदान हुए। दोनों ने देश सेवा के दौरान अपने प्राण त्याग दिए। लोगों का कहना है कि दोनों बलिदान सैनिकों की याद में धुरिया पलिया गांव के दोनों ओर शहीद द्वार बने। इससे लोग इन बलिदानियों की कहानी को हमेशा याद रखें। इसके अलावा लैहारी पुल को भी शहीद का नाम दिया जाए। लोगों का कहना है कि इसको लेकर पूर्व में भी मुख्यमंत्री को पत्राचार किए गए थे।
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