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शहादत: अंकित को गोली लगी है.., परिवार को संभालना, एक कॉल से घर में पसरा मातम, आंसू बहाते कटी परिजनों की रात

Sat, 28 May 2022 12:04 PM IST
Dimple Sirohi अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
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एसएसबी जवान शहीद - फोटो : amar ujala
मुजफ्फरनगर शहर के दक्षिणी कृष्णापुरी निवासी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में हवलदार अंकित चौधरी (30) असम के कोकराझार में नक्सली हमले में गोली लगने से शहीद हो गए। परिजनों का कहना है कि अधिकारियों ने गोली लगने की जानकारी दी थी। जिसके बाद जिलेभर में गम का माहौल बन गया। आज शहीद का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

मूल रूप से तितावी थाना क्षेत्र के मुकुंदपुर गांव निवासी और शहर के दक्षिणीपुरी में रह रहे प्रमोद बालियान का बेटा अंकित चौधरी एक अप्रैल 2013 को हवलदार के पद पर भर्ती हुए थे। इन दिनों वह नक्सली प्रभावित कोकराझार में तैनात थे। गुरुवार रात करीब दस बजे सशस्त्र सीमा बल के अधिकारियों ने परिवार को मोबाइल कॉल कर जानकारी दी कि अंकित की गोली लगने से मौत हो गई है। गोली कब और कहां लगी इसकी जानकारी परिवार को नहीं दी गई। 

अंकित के भाई मोनू ने बताया कि गोली लगने के अलावा उन्हें दूसरी कोई जानकारी एसएसबी की ओर से नहीं दी गई है। शुक्रवार सुबह अंकित के शहीद होने की जानकारी लोगों को मिली तो घर पर लोगों की भीड़ लग गई। परिवार को ढांढस बंधाया गया। शहीद जवान अंकित की मां मुनेश देवी पूर्व सभासद रही हैं।  
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एसएसबी का जवान शहीद। - फोटो : amar ujala
पूर्व सभासद मुनेश देवी के बेटे अंकित चौधरी की शहादत के बाद गम का माहौल है। आंसू बहा रहे परिवार को हिम्मत बंधाने वालों का तांता लगा है। मृतक के भाई मोनू ने बताया कि गुरुवार रात करीब 10 बजे उनके मोबाइल पर एसएसबी के अधिकारियों की कॉल आई थी। दूसरी तरफ से कहा गया कि अंकित को गोली लग गई है...।  यह सुनते ही मोनू हक्का-बक्का रह गया। सवाल किया कब, कैसे...? लेकिन दूसरी तरफ से बस इतना कहा गया कि हिम्मत रखो और अपने परिवार को समझाने और संभालने का काम करो।

इससे ज्यादा अधिकारियों ने कुछ नहीं बताया। मोनू की आंखों से आंसू बहने लगे तो परिवार के अन्य सदस्य भी इकट्ठे हो गए। हकीकत पता चली तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिवार ने दोबारा कॉल कर घटना के विषय में जानना चाहा, लेकिन इसके अलावा कोई जानकारी नहीं मिल सकी।
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विलाप करते परिजन - फोटो : amar ujala
बेटे को खोने का गम, आंसू बहाते हुए कटी रात
एसएसबी की ओर से आई कॉल के बाद परिवार की रात आंसू बहाते हुए कटी। नजदीकि रिश्तेदार और परिचित भी रात में ही घर पर पहुंच गए थे। शुक्रवार को भी दिनभर रिश्तेदार आते-जाते रहे। शनिवार सुबह से ही लोगों का शहीद के आवास पर तांता लगा रहा।

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विलाप करते परिजन। - फोटो : amar ujala
पालिकाध्यक्ष और सिटी मजिस्ट्रेट पहुंचे
पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल ने पूर्व सभासद मुनेश देवी के आवास पर पहुंचकर गम जताया। अंकित चौधरी के पिता प्रमोद बालियान को हिम्मत बंधाई। सिटी मजिस्ट्रेट अनूप कुमार ने भी घर पर पहुंचकर मामले की जानकारी ली।
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परिवार पर टूटा गमों का पहाड़। - फोटो : amar ujala
मुकुंदपुर से आकर शहर में बस गया परिवार
दक्षिणी कृष्णापुरी निवासी प्रमोद बालियान मूल रूप से मुकुंदपुर गांव के रहने हैं। परिवार में पत्नी मुनेश देवी, बेटा मोनू, अंकित चौधरी और बेटी मोनिका है। अंकित की शादी सरधना क्षेत्र के गांव भलसोना की शिवानी से सात दिसंबर 2016 को हुई थी। परिवार में बेटी तन्वी और अन्वी हैं।
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विलाप करते परिजन - फोटो : amar ujala
हवलदार के पद पर हुआ था भर्ती
मोनू ने बताया कि उसका भाई अंकित एक अप्रैल 2013 को सेना में हवलदार के पद पर भर्ती हुआ था। इन दिनों असम के कोकराझार में तैनात था। इससे पहले भी वह कई दुर्गम क्षेत्रों में तैनात रहा था।
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परिवार पर टूटा गमों का पहाड़। - फोटो : amar ujala
राज्यस्तर का पहलवान था अंकित
कुश्ती कोच जितेंद्र पहलवान ने बताया कि शहीद अंकित चौधरी राज्य स्तर का पहलवान था। 74 किलो भार वर्ग में कई बार जिले के लिए पदक जीते। साल  2009 से 2013 तक वह कुश्ती सीखने के लिए आता था। इसी दौरान एसएसबी में भर्ती हो गया।  
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