फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तस्वीरें: 45 मिनट तक मलबे के नीचे तड़पता रहा परिवार, समय पर नहीं मिली मदद, दो बच्चों ने तोड़ा दम

Sat, 24 Sep 2022 09:35 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
विज्ञापन
1 of 7
मकान की छत गिरी। - फोटो : amar ujala
मुजफ्फरनगर के मिमलाना गांव में मकान की छत गिरने से लोहे के गार्डर के नीचे दबा परिवार मदद के लिए 45 मिनट तक तड़पता रहा। घायल हादसे के एक घंटे बाद जिला अस्पताल पहुंच पाए। बताया गया कि घटनास्थल की अस्पताल से दूरी मात्र पांच मिनट की है। उपचार में देरी से इस बीच दो बच्चों की मौत हो गई।

बारिश में हुआ हादसा
शहर से सटे मिमलाना गांव में शुक्रवार की रात बारिश के दौरान कच्ची छत का मकान गिर गया। गार्डर के नीचे दबने से भाई-बहन की मौत हो गई, जबकि परिवार के चार सदस्य घायल हैं। आसपास के लोगों ने घायलों को मलबे से निकालकर जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया। कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने पीड़ित परिवार को अस्पताल पहुंचकर हाल जाना और नौ लाख रुपये की आर्थिक मदद दिलाने की घोषण की।
विज्ञापन

2 of 7
मकान की छत गिरी। - फोटो : amar ujala
मिमलाना निवासी आस मोहम्मद शुक्रवार की रात अपने घर के दरवाजे पर जबकि, उसकी पत्नी सलमा अपने बेटे शानू (21), शोएब (14), जुनेद (10), बेटी सना (11) और कलसुम (5) के साथ कमरे में सोए हुए थे। रात में लगभग 1:55 बजे मकान गिर गया। लोहे का गार्डर बच्चों के ऊपर आकर गिरा। हादसे से घर में चीख-पुकार मच गई। आस मोहम्मद ने शोर मचाया तो मोहल्ले के लोग एकत्र हो गए। इस बीच किसी ने एसडीएम सदर परमानंद झा को सूचना दी। 
विज्ञापन

3 of 7
मकान की छत गिरने से दो बच्चों की मौत। - फोटो : amar ujala
उन्होंने एंबुलेंस मौके पर भिजवाई। वे खुद लगभग दो बजकर 45 मिनट पर घटनास्थल पर पहुंच गए। मलबे में दबे परिवार को बाहर निकाला गया और जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया। हादसे में शोएब और सना की मौत हो गई, जबकि परिवार के चार सदस्य अस्पताल में भर्ती है। 

4 of 7
घायल हुए बच्चे। - फोटो : amar ujala
रामलीला टिल्ला से सटा मिमलाना गांव
मिमलाना गांव को शहर का हिस्सा ही कहा जा सकता है। यह शहर के रामलीला टिल्ला से सटा हुआ है। इस गांव में अभी भी बहुत से ऐसे घर हैं, जिनकी छत कच्ची है। रात में लगभग एक बजकर 55 मिनट पर इस गांव के आस मोहम्मद के मकान की छत गिरने से बड़ा हादसा हो गया। बारिश के शोर में परिवार के घायलों की चीख-पुकार पड़ोसियों को सुनाई नहीं दी। आस मोहम्मद के शोर मचाने पर पड़ोसी नियाजुद्दीन घर से बाहर निकला और मकान को गिरा देख सहम गया। उसने आस-पास के घरों का दरवाजा पीटा। कुछ लोग एकत्र हुए तो मलबा गिरने के बाद बंद गेट से अंदर जाने की जगह नहीं मिल पाई। घर में कितने लोग दबे हैं, यह भी किसी को नहीं पता था। शोर मचता गया लोग एकत्र होते गए। 
विज्ञापन

5 of 7
घायल हुए परिवार के लोग। - फोटो : amar ujala
लगभग दो बजकर 40 मिनट पर गेट तोड़ा गया और मलबे में दबे लोगों को एक-एक कर बाहर निकाला गया। परिवार के छह बच्चे और आस मोहम्मद और उसकी पत्नी इसमें दबे थे। इस बीच किसी ने एसडीएम सदर को सूचना दी, उनकी सूचना पर एंबुलेंस मौके पर पहुंची। कोतवाली पुलिस को लेकर एसडीएम सदर परमानंद झा दो बजकर 45 मिनट मौके पर पहुंच गए। नागरिकों की मदद से घायलों को एंबुलेंस से एक बजकर 55 मिनट पर अस्पताल पहुंचाया। हादसे को तब तक इतनी देर हो चुकी थी कि दो बच्चों 11 साल की शना और 16 साल के शोएब की मौत हो चुकी थी। मोहल्ले के नियाजुदीन का कहना है कि यदि लोग जल्दी जाग जाते और मलबा हटने में देरी नहीं होती तो इन बच्चों की जान भी बचाई जा सकती थी। 
विज्ञापन

6 of 7
बारिश में गिरी मकान की छत। - फोटो : amar ujala
घर में रखा सबकुछ नष्ट हो गया
मिमलाना के आस मोहम्मद के परिवार के पास एक ही कमरा था, इसी में पूरे परिवार का जीवन चल रहा था। घर की रसोई से लेकर भोजन सामग्री, बर्तन, कपड़े सब इसी में रखा था। मकान गिरने से सब नष्ट हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
मौके पर पहुंचे अधिकारी। - फोटो : amar ujala
100-100 रुपये चंदा कर सुपुर्द ए खाक किया
गरीबी जीवन का सबसे बड़ा अभिशाप है। गरीबी में पक्का मकान नहीं बना पाने से भट्टा मजदूर आस मोहम्मद के दो बच्चो की कच्चा मकान गिरने से मौत हो गई। आस मोहम्मद के परिवार के बाकी सदस्य घायल अवस्था में अस्पताल में है। ऐसे हालात में दोनो मृतक बच्चों शना और शोएब को सुपुर्दए खाक करने के लिए गांव के लोगों ने चंदा एकत्र किया। आस-पास में सब मजदूर वर्ग के लोग रहते हैं। इस कारण 100-100 रुपये का चंदा एकत्र किया। पड़ोसी रियाज ने बताया कि चंदा एकत्र होने के बाद ग्रामीणों ने दोनो के शव को सुपुर्द ए खाक किया गया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें