सांख्य दर्शन में योग की परिभाषा को पुन: जीने का कारण और आवश्यकता दोनों ही पिछले सवा साल से चल रहे कोरोना संक्रमण काल ने दी है। अनेक चर्चाओं का सार निकालें तो पाएंगे कि व्यक्ति और प्रकृति के बीच आई दूरी ही रोगों की असल वजह है।
कोरोना ने हमें समझाया है कि स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है कि हम अपने खान-पान से लेकर रहन-सहन तक को प्रकृति के अनुरूप ही बनाएं। भारतीय परंपरा में वैसे भी हित भुक, मित भुक, ऋत भुक का नियम है। आयुर्वेद इसी को अपनाने की बात कहता है। कोरोना के कारण हमने अपनी दिनचर्या और जीवनशैली दोनों को बदला है। इस दौरान योग ने अनेक कोरोना रोगियों न केवल ठीक किया, बल्कि उन्हें कम समय में ही पहले जैसी सेहत लौटा दी।
कोरोना काल के बीच आए इस दूसरे विश्व योग दिवस पर मुरादाबादवासियों ने स्वस्थ रहने के संकल्प के साथ योग किया। घर के कमरों से लेकर मैदानों और पार्कों तक पीतलनगरी योगमय दिखाई दी। सूर्योदय के साथ ही अनेक स्थानों पर योग कक्षाएं और शिविरों का आयोजन किया गया। सामाजिक संस्थाओं, शिक्षण संस्थाओं और ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से आसन-प्राणायाम कराए गए। योग प्रशिक्षकों ने योग के महत्व पर प्रकाश डाला। जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों और बुजुर्गों से बच्चों तक ने व्यायाम किया। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सार्वजनिक स्थानों पर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सभी ने संकल्प लिया कि कोरोना सहित अन्य अनेक बीमारियों से बचने के लिए योग को दिनचर्या में शामिल करेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।