पाकबड़ा में पति-पत्नी की माैत
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दोनों की सोच नेक और स्नेहभरी थी लेकिन भावनाओं को समझ न पाने की वजह से एक दूसरे की परवाह करने वाले पति पत्नी जिंदगी खत्म हो गई और जिन बच्चों की वह बेहतर परवरिश की सपने संजो रहे थे, वह अनाथ हो गए। काश, यदि दोनों ने ही रविवार की अंधेरी रात को आत्मघाती कदम उठाने से पहले कुछ देर नौकरी करने के पीछे भावनाओं और बच्चों के भविष्य के बारे में सोचा होता, तो रात्रि 12 बजे से सुबह साढ़े पांच बजे तक साढ़े पांच घंटे में माधव व वासु के सिर से माता पिता का साया न उठता। उनका भविष्य संवरने से पहले ही स्याह न होता।