अमर सिंह के परिवार पर विवादित टिप्पणी के मामले में सपा नेता आजम खां बरी हो गए। एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने फैसला सुनाया गया है। पांच मार्च 2020 को आजम खां पर केस दर्ज हुआ था। इससे पहले, कोर्ट में जाने के लिए आजम खां ने बड़े कैदी वाहन में बैठने से इनकार कर दिया। आजम खां ने बोलेरो उपलब्ध कराने के लिए कहा।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद आजम खां को दिवंगत नेता अमर सिंह के परिवार के खिलाफ विवादित टिप्पणी के मामले में अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।
मामला 17 अक्तूबर 2018 का है। आरोप था कि आजम खां ने एक निजी चैनल को जौहर यूनिवर्सिटी में दिए इंटरव्यू में अमर सिंह के परिवार के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की। इसके बाद अमर सिंह ने नोएडा से लखनऊ तक रैली निकाली थी।
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जेल गेट पर आजम खां को कोर्ट में पेश करने के लिए लगा कैदी वाहन
- फोटो : अमर उजाला
यह रैली रामपुर भी पहुंची थी। इसके बाद बीजेपी सरकार ने केस दर्ज करने के आदेश दिए थे। अमर सिंह ने लखनऊ में पांच मार्च 2020 को मुकदमा दर्ज कराया था। अमर सिंह का आरोप था कि आजम ने उन पर और उनकी 17 साल की जुड़वां बेटियों पर तेजाब फेंकने की धमकी दी थी। केस को बाद में रामपुर के अजीमनगर थाने में स्थानांतरित कर दिया गया था।
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आजम खां (फाइल)
- फोटो : संवाद
मंगलवार को इस केस में अंतिम बहस पूरी हो गई थी। अदालत ने निर्णय के लिए 28 नवंबर की तारीख मुकर्रर की थी। शुक्रवार को आजम कोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। जहां अदालत ने सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया।
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रामपुर जिला जेल (फाइल)
- फोटो : संवाद
आजम खां के अधिवक्ता ने बताया कि धारा 153ए, 153बी, 295, 506 के आरोप साबित नहीं हो सके। अभियोजन पक्ष सबूत पेश करने में विफल रहा और पुलिस गवाह अधूरे थे। ये आदेश 66 पेज का है अभियोजन पक्ष ने पांच गवाह पेश किए।
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रामपुर की जेल में आजम खां
- फोटो : संवाद
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई में शामिल हुए आजम खां
अमर सिंह मामले में विवादित टिप्पणी मामले में आजम खां कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। आजम ने न्यायालय से जेल प्रशासन की शिकायत करते हुए स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। आरोप लगाया कि जेल प्रशासन उनकी मिलाई खत्म करने के लिए षडयंत्र कर रहा है।
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रामपुर की जेल में आजम खां (फाइल)
- फोटो : संवाद
उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहा है। कहा कि उन्हें लोकल दवाइयां दी जा रही हैं। आजम खां के वकील काशिफ ने बताया कि आजम खां कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये शामिल हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि जेल प्रशासन उनकी मिलाई खत्म करना चाह रहा है।
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रामपुर की जेल में आजम खां
- फोटो : संवाद
उनकी पत्नी, बड़ा बेटा और रिश्तेदार अब्दुल्ला से मिलने आए थे। इस दौरान अब्दुल्ला ने मिलने की सहमति दी। वह नहीं मिले लेकिन जेल प्रशासन ने मिलाई खत्म कराने की नियत से पर्ची में उनके हस्ताक्षर भी कर दिए। आजम ने कोर्ट से जांच कराने की मांग की।
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आजम खां और बेटे अब्दुल्ला (फाइल)
- फोटो : संवाद
कहा कि पर्ची में उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। ये फर्जी हस्ताक्षर हैं। आरोप लगाया कि उन्हें जेल में ए कैटेगरी की सुविधा नहीं दी जा रही है। न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है। उन्हें फर्श पर सोने को मजबूर किया जा रहा है।
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रामपुर कोर्ट परिसर में चेकिंग (फाइल)
- फोटो : संवाद
डॉक्टर की लिखी दवाइयां उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। आजम ने दवाइयां दिखाते हुए कहा कि दवाएं लोकल हैं। इसमें कंपनी तक का नाम नहीं है। काशिफ ने बताया कोर्ट ने इसका संज्ञान लिया है।
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रामपुर पुलिस (फाइल)
- फोटो : संवाद
आजम बोले - बोलेरो उपलब्ध कराओ
पूर्व सांसद अमर सिंह के परिवार पर विवादित टिप्पणी मामले में शुक्रवार को सपा नेता आजम खां की कोर्ट में पेशी थी। इससे पहले ही जेल गेट पर अचानक अफरातफरी की स्थिति बन गई। जेल प्रशासन ने दोपहर बाद आजम को कोर्ट पहुंचाने के लिए बड़ा कैदी वाहन लगाया था।
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आजम खां (फाइल)
- फोटो : पीटीआई
बाहर आते ही इसे देख आजम खां ने उसमें बैठने से साफ इनकार कर दिया। कहा कि इस वाहन में सामान ढोया जाता है। वह इस वाहन में नहीं बैठेंगे। वह राजनीतिक कैदी हैं और इस वाहन में नहीं जाएंगे। उन्होंने अपने लिए बोलेरो जैसे छोटे वाहन की मांग की और वापस जेल के अंदर लौट गए। बाद में आजम खां कोर्ट में वीसी के माध्यम से शामिल हुए।
आजम की झलक पाने को उमड़े समर्थक
आजम खां को पूर्व राज्यसभा सदस्य अमर सिंह के परिवार पर विवादित टिप्पणी के मामले में शुक्रवार को अदालत में पेश होना था। जैसे ही यह खबर आजम के समर्थकों को लगी तो दोपहर तक सैकड़ों लोग आजम खां की एक झलक पाने के लिए जेल के बाहर जमा हो गए।