संभल जामा मस्जिद सर्वे बवाल के आरोपी मुल्ला अफरोज को सुप्रीम कोर्ट से एनएसए में राहत मिलने के बाद मुरादाबाद जेल से रिहा कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक वह चार हत्या के मामलों में आरोपी है और एसआईटी ने पिस्टल व घटनास्थल से मिले खोखों की फोरेंसिक जांच के आधार पर चार्जशीट दाखिल की है। मुख्य आरोपी शारिक साठा दुबई में है और उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी है।
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संभल हिंसा की जांच जारी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
संभल जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुए बवाल का मास्टरमाइंड दीपा सराय निवासी शारिक साठा दुबई में होने के कारण पुलिस की पकड़ से दूर है। उसके साथी मुल्ला अफरोज को अब अदालत से राहत मिल गई है। साठा के तीन साथी मोहम्मद अफरोज उर्फ मुल्ला अफरोज, गुलाम और वारिस को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तीनों पर बवाल के दौरान हत्याएं करने व अन्य तरह के संगीन आरोप हैं।
एनएसए के तहत भी कार्रवाई हुई। अब मुल्ला अफरोज को सुप्रीम कोर्ट ने एनएसए रद्द कर राहत दी है। वह मंगलवार की देररात मुरादाबाद की जेल से रिहा होकर अपने दीपा सराय स्थित घर भी पहुंच गया। हाईकोर्ट से उसको चार मुकदमों में जमानत पहले ही मिल चुकी थी। एनएसए प्रभावी होने के चलते वह जेल में बंद था। सुप्रीम आदेश पर एनएसए रद्द होते ही जेल से रिहा होने का रास्ता साफ हो गया।
हालांकि सरगना शारिक साठा भगोड़ा घोषित है और पुलिस की पकड़ से दूर है। वह दुबई में है, पुलिस लुकआउट नोटिस जारी कर चुकी है। एसपी विकास चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि मुल्ला अफरोज के खिलाफ की गई एनएसए की कार्रवाई रद्द हुई है।चार हत्या के मामले में वह आरोपी है और उसके खिलाफ एसआईटी ने सबूतों के साथ चार्जशीट भी दाखिल की है।
मुकदमा ट्रायल पर है और सख्त सजा भी होगी। एसआईटी के पर्यवेक्षक रहे संभल सीओ कुलदीप सिंह ने बताया कि 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद सर्वे के दौरान जो घटना हुई थी। उसमें चार लोगों की हत्या के मामले अज्ञात के खिलाफ दर्ज किए गए थे। जांच करने पर शारिक साठा और उसका गिरोह प्रकाश में आया था। घटनास्थल से जो कारतूस, खोखे बरामद किए गए थे वह जांच के लिए भेजे गए थे।
17 जनवरी 2025 को मुल्ला अफरोज गिरफ्तार किया गया था। सीओ का कहना है कि जो पिस्टल मुल्ला अफरोज से बरामद की गई थी उस पिस्टल से ही वह कारतूस चले थे जो खोखे के रूप में घटनास्थल पर मिले थे। यह प्रमाण लैब की जांच से मिला था। चार्जशीट में भी इसका उल्लेख किया गया है। अपराध जघन्य होने के चलते 13 अक्तूबर 2025 को एनएसए के तहत कार्रवाई की गई थी।
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संभल में हिंसा (फाइल)
- फोटो : संवाद
गुलाम और वारिस पर एनएसए प्रभावी
बवाल के दौरान हत्या करने और अन्य आरोप में मुल्ला अफरोज, वारिस और गुलाम को आरोपी बनाया गया है। इनका सरगना शारिक साठा है। गुलाम और वारिस पर एनएसए के तहत कार्रवाई प्रभावी है। वहीं, शारिक साठा के खिलाफ एलओसी जारी हो चुकी है। इंटरपोल तलाश कर रही है। गुलाम और वारिस के खिलाफ पांच-पांच रिपोर्ट दर्ज हैं। दो-दो मुकदमों में हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। एनएसए प्रभावी होने के चलते उनका जेल से निकलना अभी मुश्किल माना जा रहा है।
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संभल में हिंसा (फाइल)
- फोटो : संवाद
राष्ट्रीय स्तर का विवाद कराना चाहता था गिरोह
पुलिस ने जो चार्जशीट दाखिल की है, उसके मुताबिक शारिक साठा अपने गुर्गों के माध्यम से पुलिसकर्मियों की हत्या कराना चाहता था। उसका उद्देश्य विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाना था। उसकी मंशा थी कि पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद कर्फ्यू लग जाएगा और विवाद राष्ट्रीय स्तर का बन जाएगा। शारिक साठा ने ही गुर्गों को विदेशी हथियार उपलब्ध कराए थे।
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संभल में हिंसा (फाइल)
- फोटो : संवाद
इन लोगों की गई थी जान
हयातनगर थाना क्षेत्र के सरायतरीन निवासी बिलाल, हयातनगर निवासी रोमान, संभल कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला कोटगर्वी निवासी नईम, अयान और नखासा थाना क्षेत्र के तुर्तीपुर इल्हा निवासी कैफ की बवाल के दौरान जान चली गई थी। रोमान के परिजनों ने कार्रवाई से इन्कार कर दिया था। बिना किसी कार्रवाई के सुपुर्द ए खाक होने पर पुलिस रिकॉर्ड में नाम नहीं है।
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संभल में हिंसा (फाइल)
- फोटो : संवाद
गुलाम ने लाकर दिए थे विदेशी हथियार
पुलिस चार्जशीट के अनुसार गुलाम ने शारिक साठा के भेजे हथियार मुल्ला अफरोज और वारिस को दिए थे। इन हथियार से ही बवाल के दौरान अंधाधुंध गोली चलाई थी। पूछताछ के बाद हथियार बरामद किए गए थे। चार हत्या के मामले और अन्य मुकदमे में सभी बराबर के आरोपी हैं।
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संभल में हिंसा (फाइल)
- फोटो : संवाद
2020 में नकली पासपोर्ट बनवाकर दुबई भागा साठा
हथियार, सोना तस्करी के अलावा आईएसआई के नकली नोट भारत में खपाने के लिए सक्रिय रहे शारिक साठा को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हथियार और नकली नोट के मामले दर्ज किए गए थे। सोना तस्करी उसके भागने के बाद उजागर हुई थी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वह नकली पासपोर्ट के माध्यम से 2020 में दुबई भागा है। वह वाहन चोरी की घटनाएं भी वहीं से कराता है। उसका एक गिरोह है जो पूरे देश में सक्रिय है। वाहन चोरी के 60 मुकदमे दर्ज हैं।
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संभल हिंसा में बड़ा खुलासा
- फोटो : अमर उजाला
परिवार हुआ भावुक, मुल्ला अफरोज ने कहा- वह बेगुनाह
मंगलवार की रात 20 महीने 10 दिन बाद जेल से रिहा होकर मुल्ला अफरोज अपने घर पहुंचा तो परिजन भावुक हो गए। मीडिया से बातचीत के दौरान मुल्ला अफरोज ने कहा कि वह बेगुनाह है और उसको बवाल से कोई मतलब नहीं है। दावा यह भी किया कि वह अपनी पूरी जिंदगी जामा मस्जिद की तरफ गया ही नहीं। परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत किया है। मुल्ला अफरोज के बड़े भाई फारुख आलम ने कहा कि उनका परिवार पढ़ा लिखा है और बवाल से कोई वास्ता नहीं था। हम न्याय के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। हमें सरकार और कोर्ट पर पूरा भरोसा है।
मुकदमा ट्रायल पर है। एनएसए के तहत कार्रवाई रद्द हुई है। अन्य सभी मामलों में एसआईटी चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले थे। उसके आधार पर ही पैरवी की जा रही है। जल्द इसमें कोर्ट से निर्णय आएगा। -कुलदीप सिंह, पर्यवेक्षक, एसआईटी, संभल बवाल