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Sambhal Shiv Mandir: प्राचीन शिव और राधा कृष्ण मंदिर में उमड़े श्रद्धालु, जलाए गए दीप.. भंडारे का हुआ आयोजन

Sun, 22 Dec 2024 11:22 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, संभल

सार

संभल के खग्गू सराय स्थित शिव मंदिर और राधा कृष्ण मंदिर के कपाट खुलने के बाद पूजा अर्चना का दाैर शुरू हो गया है। दोनों मंदिरों से सुबह से ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। इसके साथ ही भंडारे का भी आयोजन होने लगा है। 
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संभल शिव मंदिर में पूजा करते लोग - फोटो : संवाद

संभल के खग्गू सराय स्थित प्राचीन शिव मंदिर पर सुबह-शाम आरती की जा रही है। दिनभर श्रद्धालु दर्शन और पूजा पाठ करने के लिए पहुंच रहे हैं। शनिवार की शाम मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन किया गया। काफी संख्या में लोग शामिल हुए। मोहल्ला खग्गू सराय स्थित प्राचीन शिव मंदिर बीते शनिवार को 46 वर्ष बाद खोला गया था। मंदिर की जानकारी के लिए कार्बन डेटिंग होनी है।

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खग्गू सराय में मिले शिव मंदिर में पूजा करते लोग - फोटो : संवाद

एएसआई की टीम ने नमूना शुक्रवार को लिया था। अब रिपोर्ट आने के बाद तय हो जाएगा कि शिव मंदिर किस समय का स्थापित है। लोगों का मानना है कि यह कार्तिकेय महादेव मंदिर है लेकिन कार्बन डेटिंग के बाद इसकी सही जानकारी सामने आ सकेगी। इस मंदिर को 1978 के बाद बंद कर दिया गया था।

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संभल मंदिर - फोटो : संवाद
46 वर्ष बाद ताला खुला है। इस जानकारी के बाद श्रद्धालुओं में उत्साह है। इसी के चलते दिनभर भीड़ जमा रहती है। वहीं, दूसरी ओर सरायतरीन के मोहल्ला कछवायन में 32 वर्ष बाद खोले गए राधा कृष्ण मंदिर पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। 

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संभल में सर्वे करती एएसआई की टीम - फोटो : संवाद

चंदौसी में बांके बिहारी मंदिर के बाद मिली बावड़ी 

चंदौसी के मुस्लिम बहुल मोहल्ले लक्ष्मण गंज में खंडहरनुमा प्राचीन बांके बिहारी मंदिर मिलने के बाद अब एक खाली प्लॉट में बावड़ी मिली है। सनातन सेवक संघ के पदाधिकारियों की मांग पर डीएम के आदेश पर एडीएम न्यायिक और तहसीलदार ने शनिवार की दोपहर को जेसीबी से खोदाई शुरू करा दी। खोदाई में बावड़ी की दीवारें नजर आईं।

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संभल शिव मंदिर में पूजा शुरू - फोटो : अमर उजाला
रात होने पर खोदाई रोक दी गई थी। मोहल्ला लक्ष्मण गंज में 17 दिसंबर को खंडहरनुमा प्राचीन बांके बिहारी मंदिर मिला था। सनातन सेवक संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख कौशल किशोर वंदेमातरम ने शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस में डीएम राजेंद्र पैंसिया को पत्र दिया। जिसमें लक्ष्मण गंज में मंदिर के अलावा बावड़ी होने का दावा करते हुए उसके सौंदर्यीकरण की मांग की थी।
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संभल में मिली मूर्तियां - फोटो : संवाद

डीएम ने एडीएम न्यायिक सतीश कुमार कुशवाहा और तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह को खोदाई कराने के आदेश दिए। शाम करीब साढ़े चार बजे एडीएम, तहसीलदार, लेखपाल और पालिका की टीम दो जेसीबी के साथ लक्षमण गंज पहुंचे और आबादी के बीच खाली पड़े प्लाॅट में बावड़ी की तलाश में खोदाई शुरू कराई। करीब पौन घंटे खोदाई करने के बाद बावड़ी की दीवारें नजर आने लगीं। शाम छह बजे अंधेरा होने पर खोदाई रोकी गई थी। जिसे रविवार को फिर से शुरू करा दिया गया। 

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संभल में बंद मंदिर के कपाट खुलने के बाद पूजा अर्चना शुरू - फोटो : संवाद

पुराने दौर में पानी का स्रोत होती थी बावड़ी

पुराने दौर में नदियों के अलावा कुएं, तालाब और बावड़ी पानी का बड़ा स्रोत होते थे। पुराने भवनों में आज भी बावड़ी देखने को मिल जाती हैं।

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संभल के शिव मंदिर में पूजा - फोटो : संवाद

रानी सुरेंद्रबाला के दौर की बताई जाती है बावड़ी

इलाके के लोगों का कहना है कि इस बाबड़ी का निर्माण 1857 में बिलारी की रानी सुरेंद्रबाला ने कराया था। बताया जाता है कि इस प्राचीन बावड़ी के पास कुछ कमरों का निर्माण भी कराया गया था। एक कुआं भी था। बाद में इस जगह को स्व. लल्लाबाबू ने ले लिया। फिर उनके द्वारा भी बेच दी गई।

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संभल के शिव मंदिर में पूजा करते श्रद्धालु - फोटो : संवाद
इसके बाद इस स्थान पर प्लॉटिंग की गई। मोहल्ले के बुजुर्ग मास्टर आकिल ने बताया कि प्लाॅटिंग के दौरान यहां पर बावड़ी थी। हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि बावड़ी या कुआं बेचा नहीं जाता है। इस पर एक प्लाॅट के बराबर जगह पार्क के लिए छोड़ दी। जिसे मिट्टी डालकर पाट दिया और पार्क का रूप दे दिया गया।
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