अवैध कटान पर पूर्ण प्रतिबंध लगने के बाद मंगलवार को लखनऊ में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि अवैध यांत्रिक कमेले किसी भी हालात में नहीं चलेंगे। केवल वैध कमेलों का ही संचालन किया जाएगा।
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मीट प्लांट
इधर मेरठ में छह मीट कारोबारियों ने यांत्रिक कमेलों के संचालन के लिए लाइसेंस की अर्जी दी है। हालांकि यह संख्या अधिक होने की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में कुछ लोगों का तो यह कहना है कि योगीराज में कमेले बंद नहीं होंगे बल्कि इनकी संख्या दोगुनी हो जाएगी। क्योंकि वैध रूप से मीट शॉप चलाने के लिए अधिक संख्या में लोग लाइसेंस लेना चाहते हैं। लाइसेंस लेने के लिए ज्यादा संख्या में लोग लाइन में लगे हैं।
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मीट प्लांट
यांत्रिक कमेलों को लेकर सरकार गंभीर है। अवैध रूप से हो रहे इस कारोबार पर सरकार ने चाबुक चला दिया है। मेरठ में 17 फैक्ट्रियां ऐसी हैं, जो बंद हैं। इनमें से नौ फैक्ट्रियों को 22 मार्च को एक साथ ही सील किया गया था। मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह साफ कर दिया गया कि वैध कारोबार करने वालों को परेशान नहीं किया जाएगा। किसी भी हालत में अवैध मीट कटान होने नहीं दिया जाएगा।
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मीट प्लांट
मेरठ में अल साकिब, अल फहीम तथा तान्या मीटैक्स ही ऐसे एक्सपोर्ट ओरिएंटिड प्लांट हैं जिन्हें लाइसेंस मिले हैं। इन पर टीम ने छापेमारी नहीं की। अल यासिर, अल अक्शा, अल कैफ को भी एपीडा ने लाइसेंस जारी किया था, लेकिन एमडीए से मानचित्र स्वीकृत न होने पर सील कर दिया गया।
इन विभागों से लेनी होगी एनओसी
पशुपालन, प्रदूषण नियंत्रण, जिलाधिकारी, फायर, पुलिस, श्रम विभाग, नगर निगम, एमडीए, पावर कारपोरेशन आदि। इन सभी की स्वीकृति मिलने के बाद ही एपीडा में आवदेन किया जा सकेगा।