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विश्व गौरैया दिवस: किताबों- कहानियों में याद बनकर न रह जाए गौरैया, देखें- ये खास तस्वीरें

Fri, 20 Mar 2020 11:51 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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गौरैया - फोटो : अमर उजाला
गौरैया जो एक समय तक गांवों- शहरों के हर घर में फुदकती नजर आती थी। गर्मियों में पानी के आसपास चहल कदमी करती वो गौरैया अब कहीं- कहीं ही नजर आती है। पेड़ों के काटे जाने और घरों के आसपास का माहौल बदलने के कारण उनकी संख्या लगातार घटती जा रही है। अगर लोगों ने गौरैया को बचाने के लिए पहल नहीं की तो वह दिन दूर नहीं जब गौरैया सिर्फ किताबों- कहानियों में ही याद बनकर रह जाएगी।
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वेस्ट एंड रोड स्थित एसडी स्कूल में बना गौरैया घर - फोटो : अमर उजाला
गौरैया एक छोटी प्रजाति की चिड़िया है। यह एशिया, अमेरिका, यूरोप आदि देशों में पाई जाती है। इंसान जहां भी अपना घर बनाते हैं यह वहीं पर पहुंच जाती है। इसलिए इसको घरेलू चिड़िया यानी हाउस स्पैरो भी कहा जाता है। आज भारत ही नहीं दुनियाभर में गौरैया की संख्या कम हो रही है। शहरी इलाकों में गौरैया की छह तरह की प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें हाउस स्पैरो, स्पेनिस स्पैरो, सिंड स्पैरो, रसैट स्पैरो, डेड सी स्पैरो और ट्री स्पैरो शामिल हैं। इनमें हाउस स्पैरो को गौरैया कहा जाता है।
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गोल्डन पार्क में बना गौरैया घर - फोटो : अमर उजाला
बताया गया कि गौरैया सामान्य रूप से घरों में घोंसले बनाती है। बहुमंजिली इमारतों के बनने के बाद गौरैया को घोंसले रखने की जगह नहीं मिल रही। पहले घर बड़े हुआ करते थे। पंछियों के आने के लिए झरोखे बनाए जाते थे। लेकिन अब शहर के साथ ही गांवों में घरों के निर्माण में भी बदलाव आ गया है। प्रदूषण, विकिरण, कटते पेड़ आदि के कारण शहरों का तापमान तेजी से बदल रहा है। गौरैया बबूल, कनेर, नींबू, अमरूद, अनार आदि पेड़ों को ज्यादा पसंद करती है।

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गांधी बाग पार्क में बना गौरैया घर - फोटो : अमर उजाला
इन लोगों से लें सबक तो बदल जाए तस्वीर 
गौरैया के संरक्षण को लेकर शहर में कुछ लोग जागरूक भी हैं। वे गौरैया के लिए लकड़ी के घर लगाते हैं। रोजाना उन्हें दाना डालते हैं। एनएएस कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. देवेश चंद्र शर्मा बताते हैं कि साल 2011 में कॉलेज के शिक्षक डॉ. विवेक त्यागी, डॉ. नवीन गुप्ता, डॉ. देवेश टंडन, डॉ. हरीश गुप्ता, डॉ. केके शर्मा, एमएम कॉलेज मोदीनगर, डॉ. जितेंद्र तोमर अन्य शिक्षकों के साथ गौरैया मित्र क्लब का गठन किया। इसके बाद लोगों को जागरूक करने का काम किया।
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गौरैया - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने एक गौरैया हाउस डिजाइन किया। इन घरों को बनवाकर लोगों को उपहार में देना शुरू किया। अब तक छह सौ लोगों को यह क्लब गौरैया के घर उपहार में दे चुके हैं। शिक्षकों को देखते हुए छात्र भी पीछे नहीं हैं। इनमें अनुज त्यागी एडवोकेट, गौरव दत्ता भी खुद गौरैया के लकड़ी के घर बनवाकर करीब 40 लोगों को दे चुके हैं। गंगानगर, अंसल कॉलोनी में इस क्लब से लोग जुड़ रहे हैं।
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गौरैया - फोटो : अमर उजाला
वहीं फैज ए आम कॉलेज के एनसीसी ऑफिस कैप्टन आईए खान भी गौरैया बचाने की पहल कर रहे हैं। डॉ. देवेश शर्मा के घर में सात घोंसलों में गौरैया रहती हैं। हर रोज यहां पर शाम को 50-60 गौरैया दिख जाती हैं। उनकी देखा देखी एफ ब्लॉक में दूसरे घरों में भी गौरैया के घर रखे जाने के कारण वहां भी गौरैया नजर आ रही हैं। इसके अलावा सुभारती विवि में भी गौरैया के कई विभागों में लकड़ी के घर बनाए गए हैं।
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गौरैया - फोटो : अमर उजाला
2010 से मनाया जाता है गौरैया दिवस 
गौरैया की लंबाई 14 से 16 सेंटीमीटर होती है। वजन 25 से 32 ग्राम तक होता है। गौरेया अधिकतर झुंड में ही रहती है। भोजन तलाशने के लिए गौरेया का एक झुंड अधिकतर दो मील की दूरी तय करता है। इसको बचाने के लिए साल 2010 से हर साल 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है।
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गौरैया - फोटो : अमर उजाला
ये रखें ध्यान 
- गर्मी के दिनों में अपने घर की छत पर बर्तन में पानी भरकर रखें। 
- बालकनी, छत और पार्कों में गौरैया को खाने के लिए कुछ अनाज छतों और पार्कों में रखें।
- गौरैया को कभी नमक वाला खाना नहीं डालना चाहिए, नमक उनके लिए हानिकारक होता है।
- प्रजनन के समय उनके अंडों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।
- बाजार में लकड़ी के घर बिक रहे हैं, इनको घर के बाहर सुरक्षित जगह पर लटका सकते हैं। 
- आंगन और पार्कों में कनेर, नींबू, अमरूद, अनार, मेहंदी, बांस, चांदनी जैसे पौधे लगाएं।

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