सत्यपाल सिंह और जयंत चौधरी का फाइल फोटो
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रालोद ने बागपत का किला जीतने के लिए हर दांव चला था। सपा और बसपा से गठबंधन किया गया। यही नहीं कांग्रेस बागपत सीट पर मैदान में नहीं थी। इस बार युवाओं को लुभाने के लिए रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने बागपत से अपने बेटे जयंत चौधरी को मैदान में उतारा था। जाट, मुस्लिम और दलित समीकरण का गणित फलाया गया, लेकिन नतीजे उल्टे निकले।