फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ये रही छोटे चौधरी की हार के पीछे की बड़ी वजह, इसलिए रोमांचक मुकाबले में जीते सत्यपाल

Fri, 24 May 2019 07:09 PM IST
कपिल kapil मदन बालियान, अमर उजाला, बागपत
विज्ञापन
1 of 7
सत्यपाल सिंह और जयंत चौधरी - फोटो : अमर उजाला
विरासत की सियासत बचाने बागपत के चुनावी रण में उतरे रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी चित्त हो गए। जाट वोटों का ध्रुवीकरण, दलित वोटों का कम प्रतिशत हार की वजह रहा।
विज्ञापन

2 of 7
जयंत चौधरी और सत्यपाल सिंह का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
रालोद का गढ़ कही जाने वाली छपरौली और सिवाल खास विधानसभा में भी जयंत चौधरी निर्णायक बढ़त नहीं ले सके। यही वजह रही कि कांटे के मुकाबले में वह आखिर तक मैदान में जरूर रहे, लेकिन भाजपा के चक्रव्यूह को भेद नहीं सके।
विज्ञापन

3 of 7
सत्यपाल सिंह और जयंत चौधरी का फाइल फोटो - फोटो : social media
रालोद ने बागपत का किला जीतने के लिए हर दांव चला था। सपा और बसपा से गठबंधन किया गया। यही नहीं कांग्रेस बागपत सीट पर मैदान में नहीं थी। इस बार युवाओं को लुभाने के लिए रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने बागपत से अपने बेटे जयंत चौधरी को मैदान में उतारा था। जाट, मुस्लिम और दलित समीकरण का गणित फलाया गया, लेकिन नतीजे उल्टे निकले।

4 of 7
जयंत चौधरी - फोटो : अमर उजाला
इसकी बड़ी वजह जाट वोटों को सियासी पंडितों की उम्मीद से ज्यादा भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण रहा। छपरौली विधानसभा में रालोद 70 हजार वोटों से बढ़त की उम्मीद लगाए बैठा था, लेकिन यह सिर्फ उम्मीद ही रह गई।
विज्ञापन

5 of 7
जीत के बाद सत्यपाल सिंह के साथ सेल्फी लेते - फोटो : अमर उजाला
वहीं सिवाल खास सीट पर भी रालोद को सिर्फ 34763 वोटों की बढ़त मिली। जिस कारण बागपत लोकसभा में कमल खिलने से कोई रोक नहीं सका। मुकाबला कांटे का हुआ।
विज्ञापन

6 of 7
जीत के बाद समर्थकों के साथ सत्यपाल सिंह - फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह असल में लोगों के बीच विकास का विश्वास जगाने में कामयाब रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि से लाभ हुआ, यही वजह है कि भाजपा ने प्रत्येक विधानसभा में अच्छे वोट हासिल किए।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
जयंत चौधरी - फोटो : अमर उजाला
मोदीनगर विधानसभा में 36734 वोटों से लीड लेकर सत्यपाल सिंह आगे बढ़े। जिसका लाभ उन्हें पूरे चुनाव में हुआ। बागपत लोकसभा के अधिकतर बूथों पर दलित वोटों का कम प्रतिशत रहना भी रालोद के लिए खतरनाक रहा।

नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें


https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें