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महादानी कर्ण ने इस जगह दान किए थे कवच और कुंडल, मेरठ के इस मंदिर में पूजा करती थी मंदोदरी

Wed, 06 Nov 2019 04:41 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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हस्तिनापुर - फोटो : अमर उजाला
पर्यटन के हिसाब से पश्चिमी यूपी काफी पिछड़ा हुआ है। आजादी से अब तक केंद्र व राज्य सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। कई बार क्रांतिधरा ही नहीं बल्कि महाभारत सर्किट को विकसित करने की मांग उठी। प्रत्येक राज्य सरकार ने महाभारत सर्किट को विकसित करने के लिए बयानबाजी भी की, लेकिन किसी ने धरातल पर उतारने के लिए नीति और नियत साफ नहीं की। 

हालांकि पर्यटन विभाग का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्यटन संवर्धन योजना के तहत प्रत्येक विधानसभा में एक-एक पर्यटन स्थल को विकसित करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए विभाग ने सभी विधायकों से ऐसे स्थलों की सूची मांग ली है। जिसका प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। आज हम आपको कुछ ऐसे ही स्थलों के बारे में बता रहे हैं जिनका अपना एक अनोखा इतिहास रहा है -
 
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शहीद स्मारक

शहीद स्मारक : 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए 85 सैनिक व आजादी की लड़ाई के शहीदों की स्मृति में बना शहीद स्तंभ 110 फीट ऊंचा है। जिस पर अशोक चक्र और शेर बने हैं। यहां पर संग्रहालय भी खुला है। इसमें क्रांति से जुड़े चित्र और किताबें मिलती हैं। 

 
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हस्तिनापुर - फोटो : अमर उजाला
हस्तिनापुर: हस्तिनापुर में दुष्यंत शकुंतला से लेकर महाभारत ग्रंथ व पुराणों से इतिहास मिलता है। यह भारत का प्रमुख जैन तीर्थ क्षेत्र है। जंबूद्वीप प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर, कैलाश पर्वत, पांडेश्वर मंदिर, द्रोपदेश्वर महादेव मंदिर, पंच प्यारे भाई धर्मसिंह की जन्मस्थली, कर्ण मंदिर, विदुर टीला, दुर्गा मंदिर, रघुनाथराव महल, नेहरू पार्क, आनंद बौद्ध विहार के साथ वन जीव अभ्यारण्य क्षेत्र है। 
 

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बिल्वेश्वरनाथ मंदिर - फोटो : अमर उजाला
मंदोदरी का मंदिर:   मेरठ के सदर क्षेत्र स्थित बिल्वेश्वरनाथ मंदिर में रावण की पत्नी मंदोदरी पूजा करने आती थी। माना जाता है कि यहां चालीस दिन नियमित पूजा अर्चना करने से हर मुराद पूरी होती है।
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suraj kund park - फोटो : अमर उजाला
सूरजकुंड पार्क: महाभारत कालीन कर्ण ने सूरजकुंड में अपने कवच कुंडल दान किए थे। जवाहर सिंह द्वारा 1700 ई में पुत्र प्राप्ति की खुशी में सूरजकुंड पार्क का निर्माण कराया था। यह स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का केंद्र रहा है। निकट ही कारागार होती थी। कुंड के चारों तरफ मंदिर आज भी हैं।  
 
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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
ये भी प्रसिद्ध: शाहपीर का मकबरा, विक्टोरिया पार्क, सेंट जॉन चर्च एवं सिमेटरी, सरधना चर्च, गगोल तीर्थ स्थल, भोला की झाल, सरधना में वेसालिका चर्च और बेगम समरू का महल, बरनवा में लाक्षागृह जाते समय सरधना में महाभारत कालीन महादेव मंदिर, परीक्षितगढ़ में गांधारी तालाब।
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