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यूपी: वीरान मस्जिद को रोशन कर रहा है हिंदू परिवार, सांप्रदायिक दंगों में नहीं आने दी थी आंच

Sat, 08 Sep 2018 03:20 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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मस्जिद की देखरेख करते जामल - फोटो : अमर उजाला
पांच साल पूर्व सात सितंबर को यूपी के मुजफ्फरनगर में जो हुआ, उसे याद करके आज भी दंगा पीड़ित सिहर जाते हैं। दंगे ने उनसे सबकुछ छीन लिया। घर छूट गया, परिवारों को झोपड़ी में रहना पड़ रहा है, जहां लोग सुविधाओं से मोहताज हैं। कई लोग अपने परिवार सहित गांवों से पलायन कर गए। आज भी यहां कई घरों पर ताला लगा हुआ है वहीं कई मस्जिदें वीरान हैं। यहीं पर सूनी पड़ी एक मस्जिद को कई साल से रोशन करता आ रहा है एक हिंदू परिवार :-
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दंगों के दौरान की थी मस्जिद की सुरक्षा

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मुजफ्फरनगर न्यूज - फोटो : अमर उजाला
पांच वर्ष पहले जब यह  क्षेत्र सांप्रदायिक दंगों की आग में झुलस रहा था, वहां एक मस्जिद की सुरक्षा करने के लिए हिंदू परिवार ही पहरेदार बन गया था। मस्जिद को सुरक्षा देने वाला वाला यह हिंदू परिवार आज भी उस घटना को याद कर सिहर उठता है। लेकिन आज भी इस परिवार ने मस्जिद की देखरेख करना नहीं छोड़ा है।
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हर सुबह करते हैं मस्जिद की साफ-सफाई

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मस्जिद में झाड़ू लगाते जामल - फोटो : अमर उजाला
दरअसल,भोपा क्षेत्र के गांव नंहेड़ा की आबादी लगभग 3500 है। जाट बाहुल्य इस गांव में 120 वर्ष पुरानी मस्जिद स्थित है। जिसकी देखरेख रामवीर कश्यप पुत्र जामल करता है। वह हर रोज सुबह उठकर मस्जिद में झाड़ू लगाते हैं और मस्जिद की देखरेख करते हैं। इसी तरह शाम को जकर मस्जिद को मोमबत्ती जलाकर रोशन करते हैं। और यह जामल की दिनचर्या में शामिल है। 

1995 से देखरेख में जुट गया था हिंदू परिवार

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मस्जिद की देखरेख करते जामल - फोटो : अमर उजाला
बताया कि ब्रिटिश काल में गांव में मुस्लिम परिवार काफी संख्या में रहते थे। समय बीतता चला गया और मुस्लिम परिवार एक-एक करके गांव से पलायन करते चले गए। गांव के मुस्लिम विहीन हो जाने के बाद मस्जिद वीरान हो गई। 1995 से वह मस्जिद की देखरेख में जुट गए।
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गांव से पलायन कर गए दंगा पीड़ित

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फाइल फोटो
7 सितंबर, साल 2013 को मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक दंगा हुआ था। नजदीकी गांव बसेड़ा में एक हिंदू ग्रामीण दंगे का शिकार हो गया था। जिसके बाद जामल के परिवार को पता चला कि रात में बसेड़ा गांव के लोग मस्जिद को तोड़ने के लिए निकल पड़े हैं। इसी आशंका को लेकर नंहेड़ा के हिंदू परिवारों ने रातों का जागकर मस्जिद के चारों ओर पहरा लगाकर सुरक्षा की। गौरतलब है कि सांप्रदायिक दंगों की आग की चपेट में आए पीड़ित ग्रामीण विभिन्न स्थानों पर बनी कालोनियों में रह रहे हैं। कालोनियों में रहने वाले सभी परिवार अपने-अपने गांवों से अपने घर व जमीन आदि बेचकर चले गए। हालांकि  दंगा पीडित कालोनियों में रहने वाले इन परिवारों के लोगों का अपने गांवों में आना-जाना आरंभ हो गया है। 

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