प्रदेश सरकार भले ही शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। मेरठ शहर में ही परिषदीय स्कूलों का बुरा हाल है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योकि शहर के सरकारी स्कूलों में कहीं शिक्षकों की कमी है तो कहीं बच्चों के बैठने के लिए कमरे बहुत कम हैं। कुछ स्कूलों के तो भवन ही जर्जर हो चुके हैं। इसके बावजूद बच्चों को यहां बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। शहर के सरकारी स्कूलों की इन्हीं अव्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए अमर उजाला की टीम प्रह्लाद नगर स्थित प्राथमिक स्कूल पहुंची। मौके पर हालात को देखकर यह कहना मुश्किल नहीं होगा कि ऐसे हालत में बच्चों का पढ़ाई करना मुश्किल नहीं नामुमकिन है। आगे तस्वीरों में देखें कैसे जान जोखिम में डालकर इस स्कूूल में पढ़ने आते हैं बच्चे:-