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सहारनपुर: नौकरी का मोह छोड़ अब कर रहे यह काम, मामा-भांजे कमा रहे दुगने दाम

Wed, 01 May 2019 04:23 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
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फूलों की खेती - फोटो : अमर उजाला
खेती को घाटे का सौदा मानकर उससे मुंह मोड़ने वाले ग्रामीण युवाओं के लिए मामा-भांजा की जोड़ी प्रेरणास्रोत हो सकती है। दोनों युवाओं ने नौकरी का मोह छोड़कर पॉली हाउस लगाया। पॉली हाउस में फूलों की खेती कर न सिर्फ बढ़िया लाभ कमा रहे हैं बल्कि 25 लोगों को रोजगार भी दे रखा है। वर्ष 2016 में 4000 वर्ग मीटर से शुरू किया गया पॉली हाउस का क्षेत्रफल बढ़कर अब 12500 वर्ग मीटर हो गया है।

 
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फूलों की खेती - फोटो : अमर उजाला
परंपरागत खेती में बढ़ती लागत और घटती आमदनी के चलते किसानों के बेटों का खेती से मोहभंग हो रहा है। ऐसे में गांव मवी खुर्द में पॉली हाउस लगाकर फूलों की खेती करने वाले उच्च शिक्षित युवा मिसाल बन गए हैं। गांव मवी कलां निवासी राजेश पंवार ने देहरादून से एमकॉम और गांव उमरी खुर्द के मोहित चौधरी ने पंजाब यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई अच्छे अंकों से पास करने के बाद नौकरी का मोह छोड़कर संरक्षित खेती को अपनी आमदनी का आधार बनाया। 
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फूलों की खेती - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने वर्ष 2016 में मवी खुर्द में 4000 वर्ग मीटर में पहला पॉली हाउस बनाकर जरबेरा फूल की खेती शुरू की। इसकी सफलता से उत्साहित होकर मामा राजेश पंवार और भांजे मोहित चौधरी ने वर्ष 2017 में 8500 वर्ग मीटर में दूसरे पॉली हाउस  का निर्माण किया। 

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फूलों की खेती - फोटो : अमर उजाला
वह बताते हैं कि पॉली हाउस में उन्होंने जरबेरा की खेती की। इसमें लाल, पीला, सफेद, गुलाबी और संतरी कलर के फूल हैं। एक पौधे से वर्ष में 30 से 40 फूल तोड़कर बेच दिया जाता है। बाजार में इसकी कीमत तीन से चार रुपये है। फूलों की प्रतिदिन तुड़ाई करके दिल्ली के गाजीपुर स्थित फूलमंडी में भेजा जाता है। इसके अलावा पॉलीहाउस से बाहर ग्लोडियोलस फूल और तरबूज की खेती भी सफलता पूर्वक कर रहे हैं।

 
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फूलों की खेती
यह है पॉली हाउस का अर्थशास्त्र
 मोहित चौधरी बताते हैं राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत  लगाए गए उनके 12500 वर्गमीटर के पॉली हाउस में जरबेरा के करीब सवा लाख पौधे हैं। इनसे लगभग 30 लाख फूल प्रतिवर्ष प्राप्त हो जाते हैं। जो औसतन तीन से चार रूपये प्रति फूल के हिसाब से मंडी में बिक जाते हैं। पूरा खर्च काटकर भी ठीकठाक वार्षिक मुनाफा हो जाता है। इसमें से पॉली हाउस लगाने के लिए जो लोन लिया गया है उसकी किश्त भी जमा की जाती है। 
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फूलों की खेती - फोटो : अमर उजाला
25 श्रमिकों को मिल रहा काम
उन्होंने बताया कि पॉली हाउस में करीब 25 श्रमिक नियमित रूप से प्रतिदिन काम करते हैं। इनमें से अधिकांश महिला श्रमिक हैं। जो पौधों की निराई गुड़ाई से लेकर फूलों की तुड़ाई और पैकिंग आदि का कार्य करती हैं। पॉली हाउस में काम करते हुए अधिकांश महिलाएं एक्सपर्ट हो गई हैं।
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फूलों की खेती
जनपद में 40 से अधिक पॉली हाउस लगे हुए हैं। इनमें से सिर्फ चार में गुलाब और अन्य में जरबेरा के फूलों की खेती हो रही है। एक पॉलीहाउस में 5 से 7 लोगों को नियमित रूप से काम मिल जाता है। यहां से अधिकतर फूलों को दिल्ली की गाजीपुर मंडी में भेजा जाता है। अधिकांश पॉलीहाउस खासे मुनाफे में चल रहे हैं। -अरुण कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।

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