मेरठ के परीक्षितगढ़ में करंट लगने से हुए हादसे ने कृष्णा से न सिर्फ उसके पति को छीन लिया, बल्कि उसके दो बेटों को हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया। सुबह के चार बजे थे। तेज बारिश के साथ हवा चल रही थी। घर में पड़े तीन शव को देखकर कृष्णा कभी बेसुध हो जाती, तो कभी चीख-चीखकर रो पड़ती। कभी पति के शव से लिपटकर, तो कभी बेटों के शव झिंझोड़कर बिलख पड़ती। सोमवार को कृष्णा के घर हुए इस हादसे को जिसने भी देखा उसकी ही आंख से आंसू निकल पड़े।
हर रोज की तरह घर का मुखिया पूरन गिरी घर का मुख्य दरवाजा खोलने के लिए उठा, लेकिन उसे क्या मालूम था कि यह दरवाजा ही उसके और उसके दो बेटों के लिए काल बन जाएगा। दरअसल दरवाजे के बराबर में ही बिजली का मीटर लगा था, किसी कारणवश मीटर में स्पार्किंग से करंट आ गया जो लोहे के बने दरवाजे में भी उतर आया।
पूरन गिरी ने जैसे ही दरवाजे को हाथ लगाया तो वह करंट की चपेट में आ गया। पिता मदद के लिए चिल्ला रहा था कि उसके दो बेटों ने देखते ही पिता को बचाने के लिए दौड़ लगा दी, लेकिन कौन जानता था कि वे पिता को बचाने के बजाय खुद भी मौत का शिकार बन जाएंगे।