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300 की मजदूरी पर हजारों महिलाएं करतीं हैं काम, कटान से लेकर पैकिंग तक का संभालती है जिम्मा

Mon, 27 Mar 2017 02:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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बूचड़खानों में काम करती मुस्लिम महिलाएं
बूचड़खाने और कमेलों के बारे में आपने आज तक सुना तो होगा, लेकिन इनके अंदर कैसे काम होता है और कौन इस काम को करने में प्रफेक्ट होता है यह शायद आप नहीं जानते होंगे।
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बूचड़खानों में काम करती मुस्लिम महिलाएं
आज हम आपको उसी बारे में बताएंगे कि बूचड़खानों में कौन ज्यादा और अच्छा काम करता है। हालांकि यह बात जानकर आप हैरान रह जाएंगे। 
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बूचड़खानों में काम करती मुस्लिम महिलाएं
इन बूचड़खानों में कोई और नहीं बल्कि मुस्लिम महिलाएं अधिक संख्या में काम करती हैं। यह महिलाएं कई शिफ्ट में काम करती है। 

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मीट प्लांट
आप फोटो में देखकर खुद अंदाजा लगा सकते है कि इस जिम्मेदारी को महिलाएं कितने अच्छे से निभाती हैं।
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मीट प्लांट
अब सवाल है कि प्रदेश में योगी राज आते ही बूचड़खानों और कमेलों पर बड़ी तेजी से कार्रवाई हो रही है। तब इनके रोजगार का क्या होगा?
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मीट प्लांट
बात अगर मेरठ की करें तो यहां हजारों महिलाएं प्रतिदिन 300 की मजदूरी पर पशु कटान से लेकर पैकिंग तक का जिम्मा संभालती है। मगर अब उनके काम पर बड़ा असर पड़ा है।
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