प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही जहां मीट प्लांटों पर ताले लटकने शुरू हो गये हैं। वहीं पुलिस प्रशासन के रवैये को देखकर मुस्लिम समुदाय के लोगों की नींद उड़ी हुई हैं। अब तो स्थिति ये है कि मीट प्लांटों में कटान करने से लोग घबरा रहे हैं। वहीं पुलिस की दिनभर की कार्रवाई से भी मीट कारोबारियों में दहशत है।
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मेरठ की गलियों में पशु कटान
मेरठ में पशु कटान के लिए जहां हापुड़ रोड पर मीट प्लांटों की लंबी चौड़ी लाइन है। वहीं मेरठ की गलियां भी पशु कटान के लिए कम बदनाम नहीं है। हिंदू लोगों को इन गलियों में पहुंचना तो दूर की बात है, यहां पुलिस भी जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाती है। यहां सरेआम बीच गलियों में पशु काट दिये जाते हैं।
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पशु कटान पर रोक
मेरठ का पुराना शहर कोतवाली, गुदड़ी बाजार, लिसाड़ीगेट और अन्य इलाके मुस्लिम बाहुल्य हैं। यहां की गलियों के रास्ते ऐसे हैं कि मुस्लिमों के तीन तीन या चार मंजिल के मकान बने हुए हैं। कुछ घरों में पशु काटने की जगह नहीं है, तो पशु को गली में ही काट दिया जाता है। ऐसी एक नहीं बल्कि कई दर्जनों गलियां है। ये ऐसी जगह है जहां हिंदू के पहुंचने से पहले ही उसके पसीने छूट जाते है।
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मेरठ पुलिस
सरेआम गली में पशु काटने में मुस्लिम समुदाय के लोग बिल्कुल नहीं हिचकचाते। इनका कानून ऐसा है कि यहां पुलिस भी जाने से डरती है। रात की बात दूर दिन में भी इन गलियों में अंधेरा पसरा रहता है। खुद पुलिस मानती है कि गलियों में पशुओं के खून को बहा दिया जाता है।
पशु कटान के बाद गलियों में खून बहने से यहां के नालों की भी बुरी स्थिति है। इन नालों के पास से निकलना लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है। कई गलियों में पशु को गली के बाहर काटकर मीट को तराजू से तोलकर बेचा जाता है। पशुओं के इस कटान से लंबा चौड़ा क्षेत्र जुड़ा हुआ है।