शिवरात्रि पर बाबा औघड़नाथ मंदिर में चार लाख से अधिक शिव भक्तों ने जलाभिषेक किया। वहीं कई मंदिरों के बाहर जल रोड पर बहता देखा गया। घोर लापरवाही की वजह से हनुमान चौक पर गंगाजल नाले में बहता दिखा।
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रोड पर बहता गंगाजल
जहां शुक्रवार को दिन भर कांवड़ियों ने हाजिरी का जल चढ़ाया, वहीं सामान्य शिव भक्तों ने त्रयोदशी का जल चढ़ाया। रात्रि 10 बजे से सुबह तक शिवरात्रि का जल चढ़ाया गया।
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शिवलिंग पर जल चढ़ाते कांवड़िये
बाबा औघड़नाथ मंदिर में 20 जुलाई की मध्य रात्रि से ही बम बम भोले के उद्घोष से गूंजना शुरू हो गया। कांवड़िये और अन्य शिव भक्तों ने जलाभिषेक किया। 21 जुलाई की दोपहर दो बजे तक शिवभक्तों की लाइनें लगी रहीं।
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रोड पर बहता गंगाजल
हालांकि इसके उपरांत दो घंटे तक लाइनें तो टूट गईं, लेकिन शिव भक्त जलाभिषेक के लिए पहुंचते रहे। तपती धूप में मंदिर परिसर को ठंडा करने को फर्श पर पानी छोड़ा गया। शाम के समय फिर से शिव भक्तों की लाइनें लगनी शुरू हो र्गइं। रात्रि में कांवड़ियों का सैलाब मंदिर में जलाभिषेक के लिए उमड़ा।
औघड़नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी श्रीधर त्रिपाठी ने बताया कि मंदिर में त्रयोदशी और शिवरात्रि का जल चढ़ाया गया। कुल मिलाकर जलाभिषेक करने वाले शिवभक्तों की संख्या चार लाख से अधिक पहुंच गई है। इनमें लगभग दो लाख कांवड़ियों ने जलाभिषेक किया है। मंदिर की सफाई और रुद्राभिषेक, आरती के समय ही जलाभिषेक रोका गया।
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