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घर का इकलौता चिराग था यशवर्धन: सदमे में परिवार, बार-बार बेहोश हो रही बहन, मां का भी रो-रोकर बुरा हाल, तस्वीरें

Mon, 26 Sep 2022 11:36 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
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यशवर्धन राणा- File Photo - फोटो : amar ujala
बॉस्केटबाल के नेशनल रेफरी यशवर्धन राणा दो भाइयों का इकलौता बेटा था। बेटे की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मां गीता राणा और बहन आकांक्षा यशवर्धन को याद कर बार-बार बेहोश हो रही है। 

रविवार देर रात में उनका शव सुभाष नगर पहुंचा और सोमवार सुबह गमगीन माहौल में सूरजकुंड पर अंतिम संस्कार कर दिया। डेढ़ साल पहले उनके पिता अशोक राणा की कैंसर से मौत हो गई थी। परिवार में अब मां-बहन और चाचा अजय राणा है।
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यशवर्धन राणा- File Photo - फोटो : amar ujala
यशवर्धन राणा पुत्र अशोक राणा मूलरूप से जिला बागपत के गांव गेडापुरा के रहने वाले थे। अशोक राणा एमडीए में ठेकेदारी करते थे। अशोक राणा और उनके भाई अजय राणा लंबे समय से सिविल लाइन थाना क्षेत्र के सुभाष नगर गली नंबर आठ में रह रहे हैं। 
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यशवर्धन राणा- File Photo - फोटो : amar ujala
बताया गया कि अजय राणा की शादी नहीं हुई है वह अपने भतीजे यशवर्धन और भतीजी आकांक्षा को ही अपना बच्चों की तरह मानते हैं। वह सुभाष नगर में अपनी मसाले की दुकान चलाते है।

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यशवर्धन राणा- File Photo - फोटो : amar ujala
उन्होंने बताया कि भतीजी आकांक्षा की शादी हो चुकी है और यश डीएमए स्कूल में स्पोर्ट्स शिक्षक थे। करीब एक साल पहले ही उनका बॉस्केटबाल में नेशनल रेफरी के पद पर चयन हुआ था। इसी के साथ वह सीसीएसयू में एमपीएड फाइनल ईयर के छात्र भी थे। डेढ़ साल पहले पिता की मौत होने के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके ऊपर ही आ गई थी। 
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यशवर्धन राणा- File Photo - फोटो : amar ujala
शनिवार शाम को वह कानपुर में होने वाली स्टेट चैंपियनशिप में टीम के साथ भाग लेने के लिए जा रहा थे। इटावा से भरतला रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन से गिरकर उनकी मौत हो गई। पुलिस ने उनके मोबाइल से यश के जीजा विवेक के मोबाइल नंबर पर हादसे की जानकारी दी। 
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यशवर्धन राणा- File Photo - फोटो : amar ujala
इसके बाद रविवार को परिवार के लोग इटावा पहुंचे और वहां पर पुलिस कार्रवाई कराने के बाद रविवार देर रात में शव लेकर सुभाष नगर पहुंचे। 
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बास्केटबॉल मैच खेलते खिलाड़ी - फोटो : अमर उजाला
पैतृक गांव गेडापुरा में भी शोक लहर
यशवर्धन राणा की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव गेडापुरा में पहुंची तो वहां भी शोक की लहर दौड़ गई। बताया गया है कि यशवर्धन एक अच्छे खिलाड़ी होने के साथ-साथ व्यवहार में भी मिलनसार थे। वह जब भी कभी गांव में जाता थे तो परिवारजनों के सभी लोगों से मिलता थे और उनके व अपने बारे में बातचीत करता थे।
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