ऐतिहासिक नौचंदी मेले की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका शुभारंभ होली के बाद दूसरे रविवार को ही होता है। जो इसका शुभारंभ करते हैं वह समापन नहीं करते। शुभारंभ करने वाले अधिकारियों में से कई बीच में ही चले जाते हैं।
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नौचंदी मेला
मेले में जैसे ही ऊंचे झूले सजते हैं तो आंधी-तूफान का आना तय माना जाता है। अब इसे कुदरत का नजारा कहे या फिर इस जगह से जुड़ी कोई अदभुत शक्ति।
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नौचंदी मेले का आयोजन
लेकिन यह सच है कि हर साल जैसे ही नौचंदी मेला आता है तो किसानों का दिल धड़कने लगता हैं क्योंकि नौचंदी मेला लगते ही किसानों को आंधी-तूफान का डर सताने लगता हैं। इतना ही नहीं बल्कि किसान पहले ही भगवान से हाथ जोड़ने लगते हैं कि हे भगवान उनकी गेहूं की फसल का नुकसान न हो।
नौचंदी का नाम मॉ नवचण्डी के नाम पर पड़ा था। नवचण्डी के मंदिर में नारियल, चुनरी चढ़ाने से भक्त की हर मनोकामना पूरी होती है। नौचंदी के लिए चार मुख्य गेट बने हुए हुए है। भक्तों की भीड़ के लिए गेट पर टोटके किये जाते हैं। जिसके तहत 11 चप्पलों की माला भी लटकायी जाती है। पटेल मंडप में सांस्कृतिक और देशक्ति और लोकनृत्य के कार्यक्रम होते है। कई फिल्म स्टार भी इस मेले की चर्चा कर चुके हैं, जैसे जोली एलएलबी में फिल्म अभिनेता अरसद वारसी, और भी कई फिल्मों में नौचंदी मेले का जिक्र किया गया है। हो सकता है कि शाहरुख खान भी अपनी आने वाली फिल्म की शूटिंग मेरठ के नौचंदी मेले में कर सकत हैं।