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टेस्ट ट्यूब बेबी डे पर विशेष: टूटी आस को मिली सांस... फिर मुस्कुराए सूने आंगन, पढ़िए ये खास खबर

Sat, 25 Jul 2020 04:34 PM IST
कपिल kapil शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ
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अपने बच्चे के साथ माता-पिता - फोटो : अमर उजाला
मन जब पूरी तरह हार गया और जीवन अधूरी खुशियों के साथ गुजारने का आदि बन गया, तब लोगों की जिंदगी में टेस्ट ट्यूब बेबी (टीटीबी) से जन्मे बच्चे आशा और उम्मीदों की नई किरण लेकर आए। चिकित्सकों ने जब कहा कि आप मां बन सकती हैं तो लगा खोया हुआ कोई खजाना मिल गया है। बच्चे के बिना अधूरी जिंदगी गुजार रहे दंपती के जीवन में टेस्ट ट्यूब बेबी वरदान बनकर आए। जिन्होंने इन्हें माता-पिता होने का सुख दिया। आगे पढ़िए पूरा रिपोर्ट-
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डॉ. राजकुमार, सीएमओ - फोटो : अमर उजाला
350 से अधिक परिवार ले चुके लाभ 
मेरठ में वर्तमान में छह सेंटर पर टीटीबी होते हैं। प्रदेश में लगभग 40 सेंटर संचालित हैं। मेरठ जिले में साल में 250 से 300 बच्चे टीटीबी पैदा होते हैं। प्रदेश में हर वर्ष 750 से अधिक बच्चे इस विधि से होते हैं। मेरठ में 350 से अधिक लोग माता-पिता बन चुके हैं। 

चिकित्सा क्षेत्र में इलाज की नई-नई तकनीक आती रहती हैं। मेरठ चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रणी है। पंजिकृत इनफर्टिलिटी एक्सपर्ट और गायनिक विशेषज्ञ डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग में इसके लिए आवेदन करते हैं। - डॉ. राजकुमार, सीएमओ
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जुड़वां बेटियों ने जन्म लिया - फोटो : अमर उजाला
परिवार हुआ पूरा, मिली हर खुशी 
रिठानी निवासी पारुल और मोनू की जिंदगी आज पूरी है। टेस्ट ट्यूब बेबी से तीन दिन पहले घर में दो बेटियों ने जन्म लिया। पारुल कहती हैं अब ऐसा लगता है मानों सूनी जिंदगी में जान आ गई। 22 जुलाई को टेस्ट ट्यूब बेबी से जुड़वा बेटियों को जन्म दिया। पारुल कहती हैं शादी को नौ साल हो गए थे। सब कुछ था हमारे पास फिर भी कमी थी बस बच्चे की। तब मुझे टेस्ट ट्यूब बेबी कराने की सलाह दी। सबकी सहमति से हमने टेस्ट ट्यूब बेबी की प्रक्रिया शुरू कराई। 

बढ़ रही है जागरूकता 
टेस्ट ट्यूब बेबी विधि का प्रयोग कर मां बनने के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी है। 15 साल पहले महीने में चार से पांच मरीज आते थे, अब महीने में 15 से 20 केस आते हैं। - डॉ शशि सिंह, डीजीओ एमएस, इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ 

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अपनी बेटी के साथ वीनू जुनेजा - फोटो : अमर उजाला
गमगीन जिंदगी में खिलीं उम्मीद की नन्ही कलियां 
57 वर्षीय वीनू जुनेजा अपनी पांच साल की बेटी हर्षिता के साथ बच्चा बनकर खेलती हैं। उसकी चोटी करती हैं और तोतली भाषा में सहेली बनकर बात भी करती हैं। वीनू कहती हैं कि टेस्ट ट्यूब बेबी तकनीक ना होती तो आज मुझे मां कहने वाला कोई नहीं होता। 2012 में इकलौता बेटा डॉ. हर्ष जुनेजा हांगकांग में दुर्घटना में चल बसा। हम तो हंसना भूल गए थे। मां सुनने को तरस गई थी। एक दिन मेरे बेटे के दोस्त की पत्नी ने मुझे टेस्ट ट्यूब बेबी के बारे में सलाह दी। मेरा टेस्ट ट्यूब इलाज हुआ। 2015 में मुझे यह प्यारी सी बेटी हुई।  

संतान सुख के लिए टीटीबी पूरी सुरक्षित तकनीक है। इसमें मां और बच्चे को कोई खतरा नहीं होता। सामान्य प्रेग्नेंसी की तरह यह भी होता है। आईटी सेक्टर, बिजनेस के साथ नौकरीपेशा युगल इलाज के लिए अधिक आते हैं। - डॉ. अंशु जिंदल, इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ  

30 से 45 वर्ष वाले अधिक 
टेस्ट ट्यूब विधि से संतानोत्पति के लिए आने वालों की संख्या अब बढ़ रही है। 30 से 45 आयु वर्ग के युवा टीटीबी कराने के लिए अधिक आते हैं। - डॉ. तुषिता जैन, इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ  
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डॉ. तुषिता जैन, इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ - फोटो : अमर उजाला
क्या है आईवीएफ
आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन। यह एक कृत्रिम गर्भाधान तकनीक है। इसमें महिला के अंडे और पुरुष के स्पर्म को लैबोरेट्री में एक साथ रखकर फर्टिलाइज करने के बाद महिला के गर्भ में ट्रांसफर कर देते हैं। इस प्रक्रिया को एंब्रियो कल्चर व टेस्ट ट्यूब बेबी भी कहते हैं। इसकी सफलता दर 45 से 50 प्रतिशत होती है। इसे कराने में औसतन एक से 1.5 लाख रुपये खर्च आता है।  
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डॉ शशि सिंह, डीजीओ एमएस, इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ - फोटो : अमर उजाला
आईवीएफ, टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर के लिए सरकार की गाइडलाइन 
- आईवीएफ केंद्र जन्मे या अजन्मे शिशु का लिंग दर्शाता हुआ विज्ञापन जारी, प्रकाशित या प्रसारित नहीं कर सकेगा। इस तरह के विज्ञापन इंटरनेट पर भी जारी नहीं किए जा सकेंगे। 
- आईवीएफ केंद्रों पर गर्भाधान के लिए आने वाले महिला-पुरुष (दंपतियों) से प्रसव की जानकारी लेना अनिवार्य होगा कि गर्भाधान के बाद लड़का हुआ या लड़की। 
- कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों पर महिला व पुरुष के जो फॉर्म (ओ, ई और एफ) भरे जाते हैं, उनकी रिपोर्टिंग पीसी एंड पीएनडीटी के पोर्टल पर भी डालना होगा। 
- कृत्रिम गर्भाधान के लिए सेंटर पर आने वाले महिला-पुरुष या दंपती का आधार नंबर लेना भी अनिवार्य होगा। कृत्रिम गर्भाधान की प्रक्रिया के दौरान जो फाइल तैयार की जाएगी, इसमें आधार नंबर भी दर्ज किया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर इन्हें खोजा जा सके।
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- डॉ. अंशु जिंदल, इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ - फोटो : अमर उजाला
यह है इतिहास
इंग्लैंड के ओल्डहैम शहर में 25 जुलाई 1978 में दुनिया की पहली आईवीएफ शिशु लुई ब्राउन का जन्म हुआ। करीब ढाई किलोग्राम वजन की लुई ब्राउन आधी रात के बाद सरकारी अस्पताल में पैदा हुई। 1978 से आज तक 50 लाख से ज्यादा टेस्ट ट्यूब शिशु जन्म ले चुके हैं। दुनिया का दूसरा टेस्ट ट्यूब बेबी लुइस के 67 दिन बाद भारत में जन्मा।

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