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घोड़ों की खतरनाक बीमारी को लेकर अलर्ट, जैविक हथियार के रूप में प्रयोग कर सकते हैं आतंकी

Mon, 26 Nov 2018 06:13 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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horse
घोड़ों में फैली ग्लैंडर्स फार्सी बीमारी को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। क्योंकि यह बीमारी घोड़ों ही नहीं मनुष्य के लिए जान का खतरा बन सकती है। इतना ही नहीं आतंकवादी इस बीमारी को फैलाने वाले बैक्टीरिया का इस्तेमाल जैविक हथियार बनाने में कर सकते हैं। इससे पूरे देश को खतरा हो सकता है।
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मेरठ जनपद में करीब तीन हजार खच्चर और घोड़े हैं। 15 दिन पहले दौराला क्षेत्र के दो घोड़ों में ग्लैंडर्स बीमारी की पुष्टि होने के बाद पशुपालन विभाग ही नहीं बल्कि जिला प्रशासन के भी हाथ पांव फूल गए थे। हालांकि समय रहते पशु चिकित्सकों ने बीमार घोड़ों को इंजेक्शन देकर मार दिया। साथ ही उन्हें जमीन में दफना दिया गया। उसके बाद से पशु चिकित्सा विभाग इस बीमारी को लेकर सक्रिय हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी के बैक्टीरिया इतने खतरनाक हैं कि आतंकवादी इसका इस्तेमाल मानव के खिलाफ एक जैविक हथियार के रूप में कर सकते हैं। यही कारण है कि इससे पीड़ित घोड़ों को इंजेक्शन देकर मार दिया जाता है।
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खून के नमूने भेजे जा रहे हिसार 
जिला पशु चिकित्सा अधिकारी डा. एके सिंह का कहना है कि चिकित्सकों की टीमें खच्चर और घोड़ों के खून के नमूने लेकर जांच के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र हिसार भेज रही हैं। 15 दिन पहले दौराला क्षेत्र के दो घोड़ों में बीमारी की पुष्टि हुई थी। उनको इंजेक्शन देकर मारना पड़ा। डॉ. सिंह ने बताया कि ग्लैंडर्स बीमारी से पशु में उत्पन्न होने वाले बैक्टीरिया का प्रयोग जैविक युद्ध में भी किया जा सकता है। सरकार भी इसको लेकर गंभीर है।

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chamurthi horse
घोड़ों में बीमारी के लक्षण 
बीमारी की चपेट में आने पर पशु को तेज बुखार होता है। वह खाना पीना कम कर देता है।
बीमार पशु की नाक से स्राव होना और उसका गाढ़ा हो जाना।
सांस लेने में तकलीफ और खांसी व धस्का होना।
नाक में छाले होना और खून मिला हुआ गाढ़ा स्राव आना। 
गधे और खच्चर का दो-तीन दिन में मर जाना।
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cuba horse
ऐसे फैलता है यह रोग
ग्लैंडर्स से पीड़ित घोड़ों के साथ रहने वाले लोगों में भी यह बीमारी फैल जाती है। 
बीमार पशु के मुंह, नाक और फोड़ों से निकलने वाले स्राव से।
बीमार पशु के साथ चारा खाने वाले पशु को बीमारी लगती है।
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horse - फोटो : अमर उजाला
ये बरतें सावधानी
बीमार पशुओं से दूरी बनाकर रखें, यह बीमारी लाइलाज है।
पशु इलाज के बाद भी सामान्य दिखते हुए बीमारी फैलाता है। 
पशु में बीमारी के लक्षण दिखते ही पशु चिकित्सक को सूचना दें। ताकि समय पर इलाज मिल सके।
बीमार पशुओं से स्वस्थ पशुओं को दूर रखें।
बीमार पशु को छूने के बाद हाथ एंटीसेप्टिक व साबुन से धोएं। 
बीमार पशु की मृत्यु होने पर उसको चूना व नमक डालकर गहरे गड्ढे में दबाएं।

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