दिवाली के बाजार में इस बार चांदी के पटाखे बेहद खास हैं। उपहार में देने और धनतेरस पर खरीदारी के लिए चांदी के पटाखों की विशेष मांग है। बाजार में चांदी के सिक्के, डॉलरों और गिफ्ट आइटमों के अलावा चांदी के पटाखे हैं। ये पटाखे उपहार में भी दिए जा सकते हैं। निवेश के रूप में खरीदे भी जा सकते हैं। इसके साथ ही विक्टोरिया और रामदरबार के सिक्कों के अलावा इस बार अपना फोटो लगा सिक्का भी खास है।
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चांदी के सिक्के
लोग उपहार में देने के लिए मनपसंद तस्वीर लगवाकर ऑर्डर पर सिक्के तैयार करा रहे हैं। 317 ग्राम चांदी से पटाखों के पांच पीस बनाए जा रहे हैं। हालांकि ये पटाखे जलेंगे नहीं। केवल शोपीस के रूप में इन पटाखों को प्रयोग किया जा सकता है। इससे पर्यावरण भी दूषित नहीं होगा। नक्काशी के साथ इन पटाखों को हूबहू असल पटाखों की शक्ल दी गई है। बस रंगत का अंतर है।
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चांदी की हटरी भी खास
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चांदी की हटरी
उपहार में देने के लिए चांदी की हटरी तैयार कराई जा रही हैं। चांदी के लक्ष्मी-गणेश की भी मांग है। शहर के सराफा बाजारों में इन दिनों भीड़ लगी हुई है। बेटी की ससुराल वालों को उपहार में देने के लिए महिलाएं चांदी की हटरी की जमकर खरीदारी कर रही हैं।
क्रेकर चॉकलेट भी हो रही तैयार
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चांदी के पटाखे
दिवाली के लिए खास क्रेकर चॉकलेट तैयार हो रही हैं। बच्चों को लुभाने के लिए विशेष रूप से पटाखों की शक्ल देकर चॉकलेट बनाई जा रही हैं। उन चॉकलेट को लाल, पीले, हरे, गुलाबी व नीले रंग की पटाखा चॉकलेट बनाई जा रही हैं। 200 रुपए से लेकर हजार रुपये कीमत में क्रेकर चॉकलेट बाजार में हैं। इसमें डार्क ब्राउन, व्हाइट चॉकलेट, फिलिंग चॉकलेट, जैम चॉकलेट के साथ अन्य स्वाद भी हैं।
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1500 रुपये में 317 ग्राम चांदी
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चांदी के पटाखे
नीलगली स्थित श्वेता ज्वैलर्स के संचालक राजेश सिंघल कहते हैं विशेष रूप से दिवाली के लिए ये पटाखे तैयार किए गए हैं। चांदी के पटाखों को हॉलमार्क के साथ 317 ग्राम चांदी में तैयार किया जा रहा है। ठोस चांदी से ये पटाखे बनाए जा रहे हैं। इसमें एक अनार, एक फुलझड़ी, एक चकरी, एक रॉकेट और 20 तीलियों वाली एक माचिस है। पूरे सेट की कीमत कुल 1500 रुपये है। पटाखों को पैक करने के लिए अलग से बेलवेट का डिब्बा है। पटाखों और माचिस को ओरिजनल लुक देने के लिए नक्काशी और लाइनें भी उकेरी गई हैं।
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सजावट के सामान पर महंगाई की मार
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मेरठ न्यूज
जीएसटी के साथ ही डॉलर के रेट बढ़ने से बिजली के सजावटी सामान पर महंगाई की मार पड़ी है। पिछले साल की तुलना में बिजली का सामान 50 प्रतिशत तक महंगा मिल रहा है। बिजली का अधिकांश सजावटी सामान चीन आदि देशों से आता है। इंपोर्ट ड्यूटी के साथ ही जीएसटी की मार ने सामान की कीमत करीब 15 प्रतिशत तक बढ़ा दी है। डॉलर के रेट बढ़ने से कीमत में और ज्यादा उछाल आया है। जिस कारण 25 से 50 प्रतिशत तक इस बार सामान महंगा है।
पिछले साल 10 मीटर की चाइनीज झालर थोक बाजार में 35 रुपये के रेट पर उपलब्ध थी। इस झालर में 54 बल्ब थे। लेकिन इस बार इसी कीमत में 9 मीटर की झालर है और उसमें बल्ब भी 32 कर दिए गए हैं। 14 मीटर की झालर जो पिछले साल करीब 48 रुपये की थी, वह इस बार थोक में 55 रुपये की मिल रही है। एसएमडी (एलईडी बल्ब लगी स्ट्रिप ) पिछले साल करीब 25 रुपये प्रति मीटर की दर से उपलब्ध थी, लेकिन इस बार इसकी कीमत 40 रुपये प्रति मीटर है। बिजली के अन्य सजावटी सामान भी इस बार महंगे हैं। थोक व्यापारी विवेक गुप्ता के अनुसार कीमत में सबसे ज्यादा उछाल डॉलर के रेट बढ़ने से आया है।
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