सहारनपुर की सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने अपने 35 पेज के आदेश में मस्जिद को अवैध करार दिया था। फैसले के हर पेज पर दोनों पक्षों ने रखे तर्क और साक्ष्य थे। पढ़ें पूरी जानकारी
सहारनपुर में सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने अपने 35 पेज के आदेश में कलक्ट्रेट परिसर स्थित दो मंजिला मस्जिद को अवैध करार दिया। वहीं, मस्जिद प्रबंधन पक्ष की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए जिला जज की अदालत ने 27 पेज में अपना फैसला सुनाया। आदेश के हर पेज पर पक्ष विपक्ष ने एक दूसरे के तर्क की काट प्रस्तुत की।
फैसले के यह बिंदु रहे थे अहम
मस्जिद प्रबंधन पक्ष
मस्जिद प्रबंधन पक्ष की तरफ से एक जनवरी 1911 का बिजली बिल अदालत में रखा गया था। बताया कि मस्जिद आजादी से पहले की है। इसके संबंध में तत्कालीन मुतवल्ली शाहजाद हुसैन द्वारा बिजली बिल का कनेक्शन भी लिया था।
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सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को तोड़ते बुलडोजर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शासकीय अधिवक्ता
इस दलील पर शासकीय अधिवक्ताओं ने तीखी बहस की। बताया कि एक जनवरी 1911 को रविवार अवकाश का दिन था। इसके साथ ही दस्तावेज प्रस्तुत किए कि महानगर में 1922 में बिजली पहुंची थी। इसका वितरण 1928 से शुरू हुआ।
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सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को तोड़ा गया
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मस्जिद प्रबंधन पक्ष
मस्जिद प्रबंधन पक्ष की तरफ से अदालत में मस्जिद को वक्फ संपत्ति होने का तर्क रखा गया। साथ ही मस्जिद को 150 वर्ष पुरानी होने का दावा किया।
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सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को तोड़ता बुलडोजर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शासकीय अधिवक्ता
शासकीय अधिवक्ताओं ने मस्जिद पक्ष द्वारा दाखिल नगर पालिका बिल, बिजली बिल पर आपत्ति जताई। कहा कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद की विधि व्यवस्था के मुताबिक स्थानीय निकाय का कर निर्धारण स्वत्व का कागज नहीं है। इससे स्वामित्व का निर्धारण नहीं होता।
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सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को तोड़ते बुलडोजर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मस्जिद प्रबंधन पक्ष
सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रबंधन पक्ष ने अब्दुल सलाम, विरेश कुमार आदि के शपथ पत्र दाखिल किए थे।
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सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को तोड़ता बुलडोजर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शासकीय अधिवक्ता
शासकीय अधिवक्ताओं की ओर से राजस्व निरीक्षक पाल सिंह आदि के बयान कराए। उन्होंने बताया कि जमीन हदूद (सीमा) वाली भूमि है। संपत्ति का जमींदारा खात्मा नहीं हुआ है। संपत्ति कचहरी कलक्ट्रेट के रूप में दर्ज है।
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सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को तोड़ता बुलडोजर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मस्जिद प्रबंधन पक्ष
जिला जज की अदालत में मस्जिद प्रबंधन पक्ष की ओर से बताया गया कि खेबट नंबर 10/1 आज भी रिकॉर्ड के मुताबिक, वाहिद खान, याकूब खान के नाम है। यह संपत्ति आज भी उनके नाम पर है। संपत्ति 1947 से पहले की है।
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सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शासकीय अधिवक्ता
शासकीय अधिवक्ताओं ने दलील रखी कि खसरा नंबर 539 रकबा 5.780 हेक्टेयर ग्राम पठानपुरा तहसील व जिला कचहरी कलक्ट्रेट स्थित है। फसली वर्ष 1296 जो 1888-89 होता है में भूमि केसर-ए-हिंद के नाम है, साथ ही कलक्ट्रेट कचहरी भी दर्ज है। भूमि बाद में भारत सरकार को हस्तांतरित हो गई।
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कलक्ट्रेट के मेन गेट के बाहर तैनात जवान
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मस्जिद ध्वस्तीकरण पर मौलाना अरशद मदनी ने उठाए सवाल
सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर स्थित प्राचीन मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने दुख जताते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या संविधान और कानून का पालन हर नागरिक और हर धर्म के लिए समान रूप से हो रहा है।
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कलक्ट्रेट के बाहर खड़े डंपर व बुलडोजर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मौलाना मदनी ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि मामला केवल एक मस्जिद के ध्वस्तीकरण का नहीं, बल्कि संविधान की सर्वोच्चता, कानून के शासन, धार्मिक स्वतंत्रता, नागरिक समानता और राज्य की निष्पक्ष भूमिका से जुड़ा है।
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बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी
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उन्होंने दावा किया कि 1991 का पूजा स्थल अधिनियम अभी प्रभावी है और नए वक्फ कानून में वक्फ बाय यूजर का प्रावधान भी है। ऐसे में कार्रवाई को लेकर सवाल उठते हैं।
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सहारनपुर में मस्जिद का ध्वस्तीकरण
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि मस्जिद का वक्फ बोर्ड में पंजीकरण संख्या 451 है और जमीन याकूब खान व वहीद खान के नाम होने का दावा किया गया है। ऐसे में कार्रवाई किस आधार पर की गई, यह स्पष्ट होना चाहिए। मौलाना मदनी ने कहा कि यदि अवैध कब्जे और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई ही आधार है तो यही मापदंड सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
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सहारनपुर में मस्जिद का ध्वस्तीकरण
- फोटो : अमर उजाला
सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर किया ध्वस्त
सहारनपुर में कलक्ट्रेट परिसर स्थित दो मंजिला मस्जिद को जिला प्रशासन ने शनिवार को ध्वस्त करा दिया। करीब पांच घंटे चले ध्वस्तीकरण में सात बुलडोजर और 12 डंपर लगाए गए। मस्जिद ढहाने के दौरान कलक्ट्रेट के पांचों द्वारों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। तनाव के मद्देनजर आसपास के जिलों से भी फोर्स बुलाई गई थी।
प्रशासन ने शुक्रवार रात में ही कलक्ट्रेट परिसर की घेराबंदी कर फोर्स तैनात कर दी थी। मौके पर पहुंचे एमएलसी शाहनवाज खान, मस्जिद प्रबंधन पक्ष के लोगों और अन्य नेताओं को बताया गया कि मस्जिद को सील किया जा रहा है।
सहारनपुर में मस्जिद का ध्वस्तीकरण
- फोटो : अमर उजाला
सुबह पांच बजे डंपर और जेसीबी कलक्ट्रेट में पहुंचने शुरू हो गए। करीब ढाई घंटे बाद साढ़े सात बजे बुलडोजर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी गई। दोपहर 12 बजते-बजते 315 वर्ग मीटर में बनी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया। पूरा मलबा भी ढोकर बाहर कर दिया गया।डीआईजी अभिषेक सिंह का कहना है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है। अफवाह फैलाने वालों पर निगाह रखी जा रही है।