सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद का मलबा हटाने के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। मलबा हटा रही टीम को मस्जिद के बीचोंबीच एक कुआं मिला है। कुआं पुरानी लखौरी ईंटों का बना हुआ प्रतीत हो रहा है। कुएं का इतिहास जानने के लिए प्रशासन ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान (एएसआई) से संपर्क किया है।
सहारनपुर में कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद मलबे के नीचे कुआं मिलने के बाद सभी के मन में एक सवाल उठ रहा है कि यह कुआं कितना पुराना है और इसका इस्तेमाल कब और किसके द्वारा किया जाता था।
जांच के लिए प्रशासन ने एएसआई से संपर्क साधा है, जिसकी टीम सर्वे के लिए आ सकती है। उधर, राजस्व अभिलेखों को भी खंगाला जा रहा है। कुआं मिलने के बाद राजस्व विभाग अलर्ट हो गया है। विभाग अब कलक्ट्रेट परिसर में कुआं होने की जानकारी के संबंध में पुराने दस्तावेज खंगाल सकता है।
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कलक्ट्रेट परिसर की मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद मिला कुआं
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खसरे में वर्ष में तीन बार लेखपाल तीन बार मौके पर जाकर स्वयं पड़ताल करते थे। इसमें खरीफ, रबी फसलों, जायद फसलों के साथ कुएं की जानकारी राजस्व अभिलेखों में दर्ज की जाती थी। देखा जाता था कि कौन सी फसल कितने क्षेत्रफल में लगी है।
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कलक्ट्रेट परिसर की मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद मिले कुएं को देखते लोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यदि खसरा-खतौनी या फिर अन्य ऐतिहासिक दस्तावेजों में कुआं दर्ज होने संबंधी जानकारी मिलती है तो कुएं के इतिहास के संबंध में जल्द पता चल सकता है। इसके साथ ही प्रशासन की टीम ने भारतीय पुरातत्व विभाग से भी संपर्क किया है। माना जा रहा है कि भारतीय पुरातत्व संस्थान की टीम सर्वे के लिए आ सकती है।
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कलक्ट्रेट परिसर की मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद मिले कुएं को देखती पुलिस व अन्य लोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
लखौरी ईंटों का यह है इतिहास
इतिहासकार और लेखक डॉ. राजीव उपाध्याय यायावर बताते हैं कि मुगलकाल के दौरान खासकर करीब 17वीं से 18वीं शताब्दी के बीच हुए निर्माण में उत्तर भारत में लखौरी ईंटों का इस्तेमाल किया जाता था। लखौरी ईंटों को आपस में जोड़ने के लिए गारे या चूने का इस्तेमाल होता था। निर्माण कार्यों में इन ईंटों का प्रयोग करीब वर्ष 1850 तक किया जाता रहा। जिले में सर्किट हाउस के सामने बने मकबरे और लखनौती के किले में इन ईंटों का इस्तेमाल किया गया है।
ध्वस्त की गई मस्जिद के नीचे मिला कुआं, एएसआई करेगी जांच
सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद का मलबा हटाने के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। मलबा हटा रही टीम को मस्जिद के बीचोंबीच एक कुआं मिला है। कुएं का व्यास करीब डेढ़ मीटर और गहराई 20 से 22 फीट है। कुआं पुरानी लखौरी ईंटों का बना हुआ प्रतीत हो रहा है। कुएं का इतिहास जानने के लिए प्रशासन ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान (एएसआई) से संपर्क किया है।
शनिवार को प्रशासन की टीम ने कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को हटाने की कार्रवाई शुरू की थी। मलबे को हटाने का कार्य देर रात तक जारी रहा। रविवार तड़के मलबा हटा रही टीम को एक कंक्रीट का स्लैब मिला। पहले तो स्लैब को बुल्डोजर से हटाने की कोशिश की गई। जब टीम को सफलता नहीं मिली तो पोकलैंड के माध्यम स्लैब को तोड़ा गया।
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सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को तोड़ा गया
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जब स्लैब को हटाया गया तो उसके नीचे से कुआं निकला, जिसकी चौड़ाई करीब डेढ़ मीटर यानी पांच फीट के आसपास है, जबकि गहराई 20 से 22 फीट है। कुएं के अंदर भी मलबा भरा हुआ है। यानी उसकी गहराई और हो सकती है। कुएं को पुरानी लखौरी ईंटों का इस्तेमाल कर बनाया गया है।
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सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को तोड़ता बुलडोजर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके साथ ही उसे ढंकने के लिए क्रंकीट का स्लैब रखा गया था। कुएं का पता चलने के बाद तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुएं का इतिहास जानने के लिए प्रशासन ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान (एएसआई) से सर्वे कराने की बात कही है।
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सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को तोड़ते बुलडोजर
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इसके लिए संपर्क किया गया है। उधर, दूसरे दिन रविवार को भी कलक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त रहे। किसी भी बाहरी व्यक्ति को परिसर के भीतर प्रवेश नहीं दिया गया। परिसर के पांचों गेट पर ताला लगा रहा, जिन पर पुलिस बल तैनात रहा। केवल मुख्य गेट से ही आवाजाही रही।
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सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को तोड़ते बुलडोजर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
देव स्थान होने का किया दावा
बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक व मुख्य शिकायतकर्ता विकास त्यागी ने कुआं मिलने के बाद देवस्थान होने का भी दावा किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में कुआं पूजनीय है। जहां पर कुआं होता है। वहां पर देवस्थान अवश्य होता है। उन्होंने प्रशासन से मांग करते हुए सर्वे की बात कही। कहा कि यह पता लगाया जाए कि कुआं कितना पुराना है। ऐसा भी संभव है कि पूजित स्थान को हटाकर मस्जिद का निर्माण किया गया हो।
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सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को तोड़ता बुलडोजर
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बेदखली की कार्रवाई के बाद मलबे को हटाया जा रहा था। इस दौरान कुआं मिला है। इस संबंध में एएसआई से भी संपर्क किया जा रहा है। सर्वे और जांच के बाद ही पता चलेगा कि कुआं कितना पुराना है। - सुबोध कुमार, एसडीएम सदर
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सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को तोड़ता बुलडोजर
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सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर किया ध्वस्त
सहारनपुर में कलक्ट्रेट परिसर स्थित दो मंजिला मस्जिद को जिला प्रशासन ने शनिवार को ध्वस्त करा दिया। करीब पांच घंटे चले ध्वस्तीकरण में सात बुलडोजर और 12 डंपर लगाए गए। मस्जिद ढहाने के दौरान कलक्ट्रेट के पांचों द्वारों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। तनाव के मद्देनजर आसपास के जिलों से भी फोर्स बुलाई गई थी।
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सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद
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प्रशासन ने शुक्रवार रात में ही कलक्ट्रेट परिसर की घेराबंदी कर फोर्स तैनात कर दी थी। मौके पर पहुंचे एमएलसी शाहनवाज खान, मस्जिद प्रबंधन पक्ष के लोगों और अन्य नेताओं को बताया गया कि मस्जिद को सील किया जा रहा है।
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कलक्ट्रेट के मेन गेट के बाहर तैनात जवान
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सुबह पांच बजे डंपर और जेसीबी कलक्ट्रेट में पहुंचने शुरू हो गए। करीब ढाई घंटे बाद साढ़े सात बजे बुलडोजर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी गई। दोपहर 12 बजते-बजते 315 वर्ग मीटर में बनी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया। पूरा मलबा भी ढोकर बाहर कर दिया गया।
कलक्ट्रेट के बाहर खड़े डंपर व बुलडोजर
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डीआईजी अभिषेक सिंह का कहना है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है। अफवाह फैलाने वालों पर निगाह रखी जा रही है।