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Pics: जकार्ता में दमदार प्रदर्शन के बाद मेरठ लौटे आरवीसी के जांबाज घुड़सवार, अगला टारगेट 'गोल्ड'

Sat, 01 Sep 2018 03:22 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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आरवीसी सेंटर लौटते वक्त कुछ इस तरह हुआ घुड़सवारों का स्वागत - फोटो : अमर उजाला
एशियन गेम्स में रजत पदक जीतने वाले सेना के तीनों घुड़सवारों का शुक्रवार को आरवीसी में जोरदार स्वागत किया गया। अधिकारियों ने उन्हें बधाई दी। साथ ही 2020 में जापान की राजधानी टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों में जुटने के निर्देश दिए। आगे तस्वीरों में देखें कैसे शानदार तरीके से किया गया आरवीसी के जांबाजों का स्वागत:-

 
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आरवीसी पहुंचने पर हुआ जोरदार स्वागत

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सिल्वर मेडल के साथ मेरठ लौटे आरवीसी के जांबाज - फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि फ्रांस के घोड़ों के साथ आरवीसी के जांबाजों ने मात्र छह माह तैयारी की, ये घोड़े अपने होते थे जवान देश के लिए सोना लेकर आते। इसकी कमी ओलंपिक में पूरी की जाएगी। जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में घुड़सवारी में भारतीय टीम को सिल्वर मेडल दिलाने वाले आरवीसी के सवार राकेश कुमार, सवार जितेंद्र सिंह और एएएसी के मेजर आशीष मलिक का शुक्रवार को आरवीसी पहुंचने पर स्वागत किया गया। 
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फ्रांस वापस भेज दिए गए प्रतियोगिता में शामिल घोड़े

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शाही बग्गी में सवार विजेता घुड़सवार - फोटो : अमर उजाला
तीनों जांबाज घुड़सवारों को शानदार बग्घी में बिठाया गया। आरवीसी सेंटर के कमांडेंट मेजर जनरल अनिल कुमार सेना मेडल ने तीनों को बधाई दी। तीनों घुड़सवारों की कामयाबी की सबसे अहम बात ये रही कि जिन घोड़ों से तीनों ने इंवेटिंग में भाग लिया वे फ्रांस से खरीदे गए थे। जीत के बाद इन घोड़ों को वापस फ्रांस में भेज दिया गया है। जापान की जिस टीम ने घुड़सवारी में गोल्ड जीता है, उनके पास भी यूरोप के घोड़े थे। ये घुड़सवार कई सालों से इन्हीं घोड़ों के साथ स्पेशल ट्रेनिंग ले रहे थे। जबकि हमारे घुड़सवारों ने सिर्फ छह महीने ही फ्रांस में इन घोड़ों के साथ स्पेशल ट्रेनिंग ली। भारतीय घुड़सवारी टीम के कोच की भूमिका भी बेहद अहम रही। 

ये हैं आरवीसी के जांबाज घुड़सवार

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फ्रांस के घोड़े कैनीजेडी के साथ सवार राकेश - फोटो : अमर उजाला
1.   सवार राकेश कुमार पुत्र बिजेंद्र सिंह
    रिमाउंट ट्रेनिंग स्कूल एंड डिपोर्ट सहारनपुर
    निवासी :  खरकाली, बीबीनगर बुलंदशहर
 
2.    सवार जितेंद्र सिंह पुत्र पहाड़ सिंह
    रिमाउंट ट्रेनिंग स्कूल एंड डिपोर्ट सहारनपुर
    निवासी :  गांव मागरा, हरसानी, बाड़मेर राजस्थान
 
3.   मेजर आशीष मलिक पुत्र हंसराज मलिक
    222 एएससी सप्लाई
    निवासी :  देवलोक कालोनी, रोहतक, हरियाणा 
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तीनों की फ्रांस में स्पेशल ट्रेनिंग 

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घोड़े कैनीजेडी के साथ आरवीसी के सवार राकेश कुमार - फोटो : अमर उजाला
इससे पहले एशियन गेम्स में मेडल पाने को आरवीसी के सवार राकेश कुमार लंबे समय से आरवीसी में अपने घोड़े विक्टरी लैप, सवार जितेंद्र सिंह अपने घोड़े गैबरियल और मेजर आशीष मलिक अपने घोड़े विरासत के साथ पसीना बहा रहे थे। तीनों ने फ्रांस में स्पेशल ट्रेनिंग ली तो उसके बाद उनको ट्रेनिंग वाले घोड़ों से ही प्रतियोगिता में भाग लेना पड़ा।
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बहुत कम समय में घोड़ों से बैठाया तालमेल

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
राकेश कुमार ने फ्रांस के घोड़े कैनीजेडी,जितेंद्र ने बालाखामी और आशीष मलिक ने पिरीमर के साथ इवेंटिंग में हिस्सा लिया। बहुत कम समय में ही तीनों घुड़सवारों ने फ्रांसीसी घोड़ों के साथ बेहतर तालमेल बिठा लिया। जिसके चलते टीम सिल्वर मेडल लाने में कामयाब रही। सवार राकेश कुमार और सवार जितेंद्र सिंह आरवीसी मेरठ ब्वॉयज स्पोर्ट्स कंपनी आरवीसी सेंटर मेरठ के छात्र रहे हैं। 
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खड़े-खड़े ही सो लेता है घोड़ा  

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
घोड़ा पुराने समय से ही इंसान का एक अच्छा दोस्त रहा है। घोड़े की जिंदगी करीब 30 साल की होती है। ये 40 से 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है। दुनियाभर में घोड़ों की 160 नस्लें पाई जाती हैं। विश्व में छह करोड़ के करीब घोड़े हैं। घोड़े केवल नाक से सांस लेते हैं मुंह से नहीं। घोड़ों की खड़े रहने की बजाय बैठने से ज्यादा ऊर्जा खपत होती है। वे खड़े-खड़े ही सो जाते हैं। घोड़ा बेहद वफादार जानवर है वह अपने घर और मालिक को कभी नहीं भूलता।
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'गोल्ड' होगा टीम का अगला टारगेट

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आरवीसी के घुड़सवार - फोटो : अमर उजाला
आरवीसी के जांबाजों की इस कामयाबी का श्रेय इंडियन टीम के स्पाॅन्सर मिस्टर जीतू वीरवानी को भी जाता है, जिन्होंने भारतीय टीम को फ्रांस से घोड़े खरीदकर दिए। इसके साथ ही दो बार के ओलंपियन रहे फ्रांस के रोडोल्फले सचेरेर ने कोच की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आगामी साल 2020 में जापान में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए अब ये घुड़सवार जमकर  तैयारी करेंगे। और इन खेलों में टीमा का एकमात्र लक्ष्य देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना ही रहेगा। 

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